बीकानेर निकाय चुनाव में नामांकन का आखिरी दिन, बागियों ने बढ़ाई सियासी हलचल
कांग्रेस-भाजपा की आधिकारिक प्रत्याशी सूची जारी होने से पहले ही नामांकन को लेकर घमासान; तीज व्रत रखकर मेहंदी लगाए महिलाएं पहुंचीं, टिकट से नाराज दावेदारों के बागी होकर चुनाव लड़ने के आसार।

बीकानेर नगर निगम चुनाव के लिए नामांकन का आज आखिरी दिन है और कलेक्टरी परिसर में सुबह से ही राजनीतिक सरगर्मी तेज है। 9 सितंबर को होने वाले मतदान के लिए कांग्रेस और भाजपा ने अभी तक अपने प्रत्याशियों की आधिकारिक सूची जारी नहीं की है, लेकिन पार्टी के संभावित उम्मीदवारों को फोन के जरिए नामांकन भरने के निर्देश दिए जा चुके हैं। 80 वार्डों के लिए 100 से ज्यादा नामांकन दाखिल होने का अनुमान है। नामांकन के लिए कलेक्टरी परिसर में पांच अलग-अलग स्थानों पर व्यवस्था की गई है और भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस तथा आरएसी के जवान तैनात किए गए हैं। इस बीच वार्ड 72 से प्रत्याशी खुशबू के साथ महिलाएं तीज का व्रत रखकर और हाथों में मेहंदी लगाकर नामांकन के लिए पहुंचीं, जिससे चुनावी माहौल में अलग रंग देखने को मिला। दूसरी ओर टिकट वितरण को लेकर दोनों प्रमुख दलों में असंतोष खुलकर सामने आ रहा है। कांग्रेस और भाजपा के कई दावेदार टिकट के लिए लगातार नेताओं से संपर्क कर रहे हैं, जबकि बड़े नेताओं के फोन बंद होने की चर्चा से कार्यकर्ताओं में नाराजगी बताई जा रही है। भाजपा में देहात अध्यक्ष श्याम पंचारिया के डेंगू के कारण टिकट वितरण व्यवस्था से अलग होने की बात सामने आई है, वहीं शहर अध्यक्ष सुमन छाजेड़ के आवास के बाहर भी टिकट को लेकर कार्यकर्ताओं ने नाराजगी जताई। कांग्रेस में पूर्व मंत्री डॉ. बी.डी. कल्ला और पूर्व अध्यक्ष यशपाल गहलोत को भी कार्यकर्ताओं के विरोध का सामना करना पड़ा। सबसे बड़ी चुनौती दोनों दलों के लिए बागी उम्मीदवार बन सकते हैं, क्योंकि टिकट के लिए बड़ी संख्या में दावेदार मैदान में थे और टिकट किसी एक को ही मिलना है। ऐसे में टिकट से वंचित कार्यकर्ता पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ निर्दलीय या बागी उम्मीदवार के तौर पर नामांकन दाखिल कर सकते हैं। बीकानेर के अंदरुनी क्षेत्रों में यह स्थिति चुनावी मुकाबले को और रोचक बना सकती है, क्योंकि कांग्रेस और भाजपा के आधिकारिक उम्मीदवारों के अलावा उन्हीं दलों से नाराज होकर मैदान में उतरे बागी प्रत्याशी भी वोटों का समीकरण प्रभावित कर सकते हैं। अब नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद तस्वीर साफ होगी कि कितने दावेदार मैदान में टिकते हैं और कितने अंतिम समय में अपना नाम वापस लेते हैं।




