महाकाल की सवारी में पहली बार शामिल होगा रोबोट, आरती के साथ सुनाएगा शिव धुन
रामघाट पर शिव धुन और आरती में शामिल होगा रोबोट, भीड़ और अव्यवस्था की सूचना कंट्रोल रूम तक पहुंचाने में भी सक्षम।

उज्जैन में भगवान महाकालेश्वर की भादौ माह की पहली और पांचवीं सवारी 31 अगस्त को निकलेगी। इस बार सवारी में पहली बार एक रोबोट भी शामिल किया जाएगा, जिसे सामाजिक संस्थाओं की ओर से मंदिर समिति की अनुमति के बाद सवारी का हिस्सा बनाया जा रहा है। रोबोट रामघाट पर पालकी पहुंचने के दौरान शिव धुन सुनाएगा और आरती में भी शामिल होगा। इसे सवारी के साथ कुछ दूरी तक चलाया जाएगा। मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक के अनुसार इंदौर की एक निजी कंपनी ने इस रोबोट को तैयार किया है और इसे भीड़ के बीच चलने के साथ-साथ किसी तरह की अव्यवस्था होने पर कंट्रोल रूम को स्वतः सूचना भेजने के लिए प्रशिक्षित किया गया है। यदि इसका प्रयोग सफल रहता है तो आने वाली महाकाल सवारियों के साथ-साथ सिंहस्थ 2028 में भी इसका उपयोग किए जाने की संभावना है। महाकाल की इस सवारी में श्रद्धालुओं को भगवान के पांच अलग-अलग स्वरूपों के दर्शन होंगे। पालकी में चंद्रमौलेश्वर, हाथी पर मनमहेश, गरुड़ रथ पर शिव तांडव, बैलगाड़ी पर उमा-महेश और डोल रथ पर होलकर मुखौटा स्वरूप में बाबा महाकाल नगर भ्रमण करेंगे। इसके अलावा सवारी में 84 महादेव की झांकी भी आकर्षण का केंद्र रहेगी। धार्मिक परंपरा और आधुनिक तकनीक के इस अनोखे मेल को लेकर श्रद्धालुओं में भी उत्सुकता है।




