Welcome to भगवा हिन्दुस्तान   Click to listen highlighted text! Welcome to भगवा हिन्दुस्तान
bathinda

पंजाब में कर्मचारियों का सरकार से आर-पार का ऐलान

DA मामले में हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी पंजाब सरकार; कर्मचारी बोले- मांगें नहीं मानीं तो 8 सितंबर से सामूहिक छुट्टी और 12-13 सितंबर को मंत्रियों के घरों का घेराव

पंजाब में आम आदमी पार्टी सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच टकराव बढ़ता जा रहा है। कर्मचारियों की मांगों को लेकर चल रहे आंदोलन के बीच सरकार ने हाईकोर्ट के DA देने संबंधी आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का फैसला किया है, वहीं कर्मचारी संगठनों ने भी आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी दी है। लुधियाना में हुई कर्मचारी संगठनों की बैठक में सांझा मोर्चे ने ऐलान किया कि यदि कर्मचारियों पर कार्रवाई से संबंधित पत्र 7 सितंबर तक वापस नहीं लिया गया तो 8 सितंबर को कर्मचारी सामूहिक छुट्टी पर जाएंगे और इसके बाद 12 तथा 13 सितंबर को पंजाब सरकार के मंत्रियों के घरों का घेराव किया जाएगा। कर्मचारी नेताओं का कहना है कि वे अपनी सभी मांगें माने जाने तक आंदोलन जारी रखेंगे और सरकार के दबाव में पीछे नहीं हटेंगे। संगठनों ने ‘मुख्यमंत्री की चंडीगढ़ सचिवालय से गांव सतोज की वापसी’ नाम से भी एक मुहिम शुरू करने का ऐलान किया है, जिसके जरिए मुख्यमंत्री भगवंत मान पर राजनीतिक दबाव बनाने की बात कही गई है। कर्मचारियों ने चंडीगढ़ में ‘मुलाजिम विधानसभा’ लगाने की भी घोषणा की है, जिसमें पंजाब के 117 विधायकों और 13 लोकसभा सदस्यों को आमंत्रित कर कर्मचारियों और पेंशनरों की मांगों पर सवाल पूछने की योजना है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि वे कुल नौ मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं और बड़ी संख्या में कर्मचारियों को जारी किए गए शो-कॉज नोटिस को लेकर भी नाराजगी है। उनका आरोप है कि सरकार की ओर से कर्मचारियों पर कार्रवाई का दबाव बनाया जा रहा है, जबकि उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया जा रहा। दूसरी ओर सरकार ने DA से जुड़े हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का फैसला किया है, जबकि हड़ताली कर्मचारियों ने सुप्रीम कोर्ट में पहले ही कैविएट दाखिल कर रखा है, ताकि उनके पक्ष को सुने बिना कोई आदेश पारित न हो। कर्मचारी नेताओं के अनुसार वे बातचीत के विरोध में नहीं हैं, लेकिन बातचीत की स्थिति में अपनी शर्तों के साथ आगे बढ़ेंगे और जब तक उनकी एक-एक मांग पर समाधान नहीं होता, आंदोलन जारी रहेगा। संगठनों ने संयुक्त किसान मोर्चे से जुड़ी जत्थेबंदियों के 1 से 7 सितंबर तक चंडीगढ़ में प्रस्तावित आंदोलन को भी समर्थन देने का फैसला किया है। कर्मचारी नेताओं ने आरोप लगाया कि नीतिगत फैसलों के कारण शिक्षा, स्वास्थ्य और सरकारी विभाग प्रभावित हो रहे हैं तथा बेरोजगारी और अन्य सामाजिक समस्याएं बढ़ रही हैं। फिलहाल पंजाब सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच विवाद निर्णायक दौर में पहुंचता दिखाई दे रहा है और आने वाले दिनों में सरकार की कानूनी कार्रवाई तथा कर्मचारियों के आंदोलन से राज्य की सरकारी सेवाओं पर असर पड़ सकता है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!
Click to listen highlighted text!