सिंगरौली में पति-पत्नी बहे, बाणसागर डैम के 6 गेट खुले: मध्यप्रदेश में भारी बारिश से कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात
बाढ़ और बारिश के चलते चित्रकूट, सतना, शहडोल समेत कई इलाकों में जनजीवन प्रभावित, राहत-बचाव कार्य जारी

मध्यप्रदेश में भारी बारिश के बाद कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं। चित्रकूट में मंदाकिनी नदी के उफान से हालात गंभीर रहे, वहीं गोरगी बांध के फूटने से आसपास के इलाकों में पानी भर गया और रामघाट का बड़ा पुल तेज बहाव में बह गया। बाढ़ का पानी उतरने के बाद भी चित्रकूट में घरों और सड़कों पर मिट्टी, कचरा और कीचड़ जमा होने से लोगों की परेशानी बनी हुई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को चित्रकूट पहुंचकर बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लिया और आश्रय स्थल में प्रभावित लोगों से मुलाकात कर राहत सामग्री वितरित की। उन्होंने अधिकारियों को प्रभावित क्षेत्रों में जल्द से जल्द सामान्य स्थिति बहाल करने के निर्देश दिए और चित्रकूट में अतिक्रमण को भी बाढ़ की संभावित वजहों में शामिल बताया। दूसरी ओर शहडोल में बाणसागर डैम में पानी की आवक तेजी से बढ़ने के बाद जलस्तर खतरे के करीब पहुंच गया, जिसके चलते रविवार दोपहर डैम के छह रेडियल गेट खोलकर करीब 2400 क्यूमेक्स पानी छोड़ा गया। डैम का जलस्तर 341.60 मीटर तक पहुंच गया था, जबकि इसका फुल रिजर्वायर लेवल 341.64 मीटर है और डैम करीब 98.94 प्रतिशत भर चुका था। निचले इलाकों में प्रशासन की ओर से अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग ने मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, उमरिया, शहडोल, डिंडौरी, अनूपपुर, मंडला, सिवनी और बालाघाट में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। सिंगरौली में बाढ़ के तेज बहाव के दौरान बाइक से पुल पार कर रहे पति-पत्नी के बह जाने की घटना भी सामने आई है। छतरपुर में जर्जर पुल से आवागमन लोगों के लिए खतरा बना हुआ है और बारिश के दौरान यहां हादसे की आशंका और बढ़ गई है। सतना में कुछ घंटों की भारी बारिश के बाद नदी-नाले उफान पर आ गए और कई क्षेत्रों में पानी भर गया। कलेक्टर के अनुसार चित्रकूट में मंदाकिनी नदी का जलस्तर हाई फ्लड लेवल से काफी ऊपर चला गया था, जिसके कारण कई घरों में पानी घुसा और लोगों के सामान को नुकसान पहुंचा। प्रशासन की ओर से राहत शिविर चलाए गए, जहां बड़ी संख्या में प्रभावित लोगों को ठहराया गया। अब रेस्क्यू के बाद राहत, नुकसान के आकलन, मुआवजा, साफ-सफाई, दवा वितरण और शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। वहीं चित्रकूट में मंदाकिनी का पानी उतरने के बाद नदी किनारे और सड़कों पर जमा कीचड़ ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। दूसरी तरफ धार शहर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में करीब 15 दिनों से अच्छी बारिश नहीं होने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। सोयाबीन की फसल को पानी की जरूरत है और बारिश में देरी होने पर फसल प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। कुल मिलाकर मध्यप्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में कहीं भारी बारिश और बाढ़ से तबाही का सामना करना पड़ रहा है तो कहीं बारिश की कमी किसानों और जलस्रोतों के लिए चिंता का कारण बनी हुई है। प्रशासन प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बहाली के काम में जुटा है, जबकि मौसम विभाग ने कई जिलों में भारी बारिश को लेकर सतर्कता बरतने की सलाह दी है।



