अमृतसर में चक्काजाम खत्म, भंडारी पुल खुला; डॉ. अंबेडकर के अपमान के विरोध में प्रदर्शन
वाल्मीकि समाज ने करीब एक घंटे तक सड़क पर बैठकर लगाए नारे, पंजाब सरकार का पुतला फूंका; बैरिकेडिंग को लेकर पुलिसकर्मियों में भी हुई बहस

अमृतसर में डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा के अपमान के विरोध में वाल्मीकि समाज और विभिन्न संगठनों द्वारा किया गया चक्काजाम अब खत्म हो गया है और भंडारी पुल को यातायात के लिए खोल दिया गया है। प्रदर्शनकारियों ने करीब एक घंटे तक पुल पर बैठकर रोष जताया और ‘वाल्मीकि शक्ति अमर रहे’ तथा ‘पंजाब सरकार मुर्दाबाद’ जैसे नारे लगाए। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने पंजाब सरकार का पुतला भी फूंका और लुधियाना में बाबा साहेब डॉ. अंबेडकर की प्रतिमा के साथ हुई कथित बेअदबी की घटना पर कड़ी कार्रवाई की मांग की। प्रदर्शन के चलते आम यातायात प्रभावित रहा, हालांकि प्रदर्शनकारियों ने इमरजेंसी सेवाओं के लिए रास्ता खुला रखा। भंडारी पुल पर जाम सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक प्रस्तावित था, लेकिन प्रदर्शन करीब 11 बजे शुरू हुआ और लगभग एक घंटे बाद ही पुल को खोल दिया गया। प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस ने पुल से पहले बैरिकेडिंग कर वाहनों को रोकने की व्यवस्था की थी, लेकिन इसी दौरान बैरिकेडिंग को लेकर पुलिसकर्मियों के बीच भी बहस देखने को मिली। एक ओर एएसआई का कहना था कि बैरिकेडिंग एडीसीपी के निर्देश पर की गई है, जबकि कुछ PCR कर्मी इसे हटाकर खुद जाम खुलवाने की बात कहते नजर आए। इससे पहले अमृतसर में पूर्ण बंद का आह्वान किया गया था, लेकिन व्यापारियों को हो रहे नुकसान को देखते हुए विभिन्न संगठनों ने बंद वापस लेने का फैसला किया था। गौरतलब है कि 8 सितंबर को लुधियाना के जालंधर बाईपास चौक पर डॉ. अंबेडकर की प्रतिमा के गले में जूतों का हार डालने और प्रतिमा के साथ छेड़छाड़ की घटना सामने आई थी, जिसके बाद वाल्मीकि और दलित समाज में आक्रोश फैल गया था। इसी घटना के विरोध में पंजाब के अलग-अलग हिस्सों में प्रदर्शन और विरोध की स्थिति बनी हुई है। अमृतसर में भी प्रदर्शनकारियों ने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए अपना रोष जताया।




