हिमाचल के 44 मेधावी इंजीनियरिंग छात्र जापान रवाना, CM सुक्खू ने वर्चुअली दिखाई हरी झंडी
पांच इंजीनियरिंग कॉलेजों से करीब 650 आवेदन में मेरिट के आधार पर हुआ चयन; अंतरिक्ष तकनीक, रोबोटिक्स, एयरोस्पेस और आधुनिक मैन्युफैक्चरिंग की बारीकियां सीखेंगे छात्र, मेडिकल स्टूडेंट्स को भी विदेश भेजने की तैयारी

हिमाचल प्रदेश के मेधावी इंजीनियरिंग छात्रों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की तकनीक, शिक्षा और औद्योगिक कार्यप्रणाली से जोड़ने की दिशा में राज्य सरकार ने एक और पहल की है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने रविवार को प्रदेश के इंजीनियरिंग कॉलेजों में पढ़ने वाले 44 मेधावी बीटेक विद्यार्थियों को जापान के शैक्षणिक एवं औद्योगिक एक्सपोजर विजिट के लिए वर्चुअली हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। छात्रों का यह दल 6 से 12 सितंबर तक जापान के विभिन्न प्रमुख शिक्षण, अनुसंधान और औद्योगिक संस्थानों का दौरा करेगा, जहां उन्हें आधुनिक तकनीक और उद्योगों में इस्तेमाल होने वाली नवीन प्रणालियों को करीब से समझने का अवसर मिलेगा। इस दल में 24 छात्र और 20 छात्राएं शामिल हैं। जापान प्रवास के दौरान विद्यार्थी टोक्यो मेट्रोपॉलिटन यूनिवर्सिटी, जेएएक्सए त्सुकुबा स्पेस सेंटर, साइबरडाइन रोबोटिक्स स्टूडियो, जेएएल एयरोस्पेस फैक्ट्री, क्योसेरा फैक्ट्री और ओसाका के विभिन्न औद्योगिक संस्थानों का भ्रमण करेंगे। इस दौरान छात्रों को अंतरिक्ष विज्ञान एवं तकनीक, रोबोटिक्स, एयरोस्पेस इंजीनियरिंग, आधुनिक मैन्युफैक्चरिंग, इनोवेशन और ट्रांसपोर्ट सिस्टम जैसे क्षेत्रों में हो रहे तकनीकी प्रयोगों तथा विकास को समझने का मौका मिलेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे अंतरराष्ट्रीय एक्सपोजर से विद्यार्थियों की सोच का दायरा व्यापक होता है और उन्हें कक्षा तथा प्रयोगशाला में मिलने वाली जानकारी के साथ वास्तविक दुनिया में तकनीक के इस्तेमाल को समझने का अवसर मिलता है। उन्होंने कहा कि जापान तकनीकी विकास, अनुशासन, अनुसंधान, औद्योगिक दक्षता और आधुनिक परिवहन व्यवस्था के लिए जाना जाता है, इसलिए वहां का अनुभव हिमाचल के विद्यार्थियों के लिए लंबे समय तक उपयोगी रह सकता है। छात्रों को केवल तकनीकी ज्ञान तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि उन्हें जापान की कार्य संस्कृति, समयबद्धता, अनुशासन और सामाजिक मूल्यों को भी समझने का अवसर मिलेगा। राज्य सरकार का उद्देश्य विद्यार्थियों को वैश्विक स्तर की शिक्षा और कार्यप्रणाली से परिचित कराकर उनके भीतर नई तकनीकों के प्रति रुचि और नवाचार की भावना को बढ़ावा देना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार युवाओं को दुनिया में हो रहे तकनीकी और औद्योगिक बदलावों से जोड़ने पर विशेष ध्यान दे रही है, ताकि प्रदेश के विद्यार्थी भविष्य की रोजगार आवश्यकताओं और तकनीकी चुनौतियों के लिए बेहतर तरीके से तैयार हो सकें। इससे पहले भी राज्य सरकार की ओर से सरकारी स्कूलों के मेधावी विद्यार्थियों को कंबोडिया तथा आईटीआई के छात्रों को कजाकिस्तान के शैक्षणिक एवं औद्योगिक भ्रमण पर भेजा जा चुका है। अब इसी दिशा में मेडिकल कॉलेजों के विद्यार्थियों के लिए भी विदेश में एक्सपोजर विजिट कराने की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी की जा रही है। तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी के अनुसार इस अंतरराष्ट्रीय यात्रा के लिए प्रदेश के पांच इंजीनियरिंग कॉलेजों से करीब 650 आवेदन प्राप्त हुए थे, जिसके बाद विद्यार्थियों का चयन पूरी तरह मेरिट के आधार पर किया गया। चयन प्रक्रिया में मेधावी विद्यार्थियों को प्राथमिकता दी गई, जिससे सीमित सीटों के लिए बड़ी संख्या में आवेदन करने वाले छात्रों के बीच प्रतिस्पर्धा रही। मंत्री ने कहा कि जापान तकनीक और औद्योगिक नवाचार के क्षेत्र में दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल है और वहां जाकर विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीकी प्रणालियों को प्रत्यक्ष रूप से देखने और समझने का अवसर मिलेगा। इस तरह की यात्राएं छात्रों के लिए केवल पर्यटन या सामान्य भ्रमण तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि उन्हें उद्योग, अनुसंधान संस्थानों और विश्वविद्यालयों के कामकाज को समझने का व्यावहारिक अनुभव देती हैं। जापान के प्रमुख संस्थानों में होने वाले भ्रमण के दौरान छात्र यह भी देख सकेंगे कि किस तरह रिसर्च, डिजाइन, मैन्युफैक्चरिंग और तकनीकी नवाचार को एक-दूसरे से जोड़ा जाता है। अंतरिक्ष और एयरोस्पेस क्षेत्र से जुड़े संस्थानों का दौरा इंजीनियरिंग विद्यार्थियों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण होगा, जबकि रोबोटिक्स और आधुनिक मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी गतिविधियां उन्हें भविष्य की तकनीकी जरूरतों से परिचित कराने में मदद कर सकती हैं। राज्य सरकार की इस पहल को हिमाचल के युवाओं को वैश्विक अवसरों के लिए तैयार करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। मेडिकल कॉलेजों के विद्यार्थियों को भी इसी तरह विदेश में एक्सपोजर देने की योजना आगे बढ़ती है तो चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में पढ़ रहे छात्रों को भी दूसरे देशों की स्वास्थ्य व्यवस्था, चिकित्सा तकनीक, शोध और संस्थागत कार्यप्रणाली को समझने का अवसर मिल सकता है। सरकार का जोर इस बात पर है कि प्रदेश के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को केवल स्थानीय शैक्षणिक संसाधनों तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उन्हें दुनिया के अग्रणी संस्थानों और तकनीकी वातावरण से परिचित कराया जाए। जापान रवाना हुआ 44 विद्यार्थियों का दल इसी सोच का हिस्सा है और अगले एक सप्ताह के दौरान वहां की शिक्षा, तकनीक, उद्योग तथा कार्य संस्कृति से जुड़ा अनुभव हासिल करेगा। इन छात्रों से उम्मीद की जा रही है कि विदेश यात्रा के दौरान मिली जानकारी और अनुभवों को वापस लौटकर अपने शैक्षणिक कार्य तथा भविष्य के करियर में उपयोग करेंगे और प्रदेश में तकनीकी नवाचार की दिशा में योगदान दे सकेंगे।




