जावेद अख्तर बोले- मुश्किल वक्त में तय करना होता है कि टूटेंगे या रास्ता निकालेंगे: जिंदगी में संघर्ष कोई अलग हिस्सा नहीं, यही जिंदगी है
जावेद अख्तर ने जीवन को 8 अरब लोगों का ऐसा मेला बताया जहां हर कोई अपनी दिशा में आगे बढ़ रहा है; बोले- रास्ता न मिले तो प्रयास करते रहें, संघर्ष जिंदगी से अलग नहीं बल्कि उसका हिस्सा है

मुंबई। मशहूर गीतकार और लेखक जावेद अख्तर का कहना है कि जीवन में संघर्ष से कोई बच नहीं सकता। दुनिया में अरबों लोग अपनी-अपनी महत्वाकांक्षाओं और सपनों के साथ अलग-अलग दिशाओं में आगे बढ़ रहे हैं। ऐसे में हर व्यक्ति को अपने लिए रास्ता तलाशना पड़ता है।
जावेद अख्तर जीवन के संघर्ष को एक ऐसे मेले की तरह देखते हैं, जहां करोड़ों लोग मौजूद हैं, लेकिन हर किसी की मंजिल और दिशा अलग है। कई बार रास्ता आसानी से मिल जाता है और कई बार इंसान भीड़ में फंस जाता है। ऐसे समय में हार मानने के बजाय लगातार प्रयास करते रहना जरूरी है।
8 अरब लोग, 8 अरब कोशिशें
जावेद अख्तर के मुताबिक, दुनिया में जितने लोग हैं, लगभग उतनी ही अलग-अलग इच्छाएं और महत्वाकांक्षाएं हैं। हर व्यक्ति कुछ हासिल करना चाहता है और उसका सपना दूसरे व्यक्ति के सपने से थोड़ा अलग होता है।
वह इसे एक मेले का उदाहरण देकर समझाते हैं। एक ही जगह पर अरबों लोग हैं, लेकिन हर कोई अपनी अलग दिशा में आगे बढ़ रहा है। ऐसे में किसी व्यक्ति का अपनी मंजिल तक पहुंचना आसान नहीं होता।
अगर संयोग से कई लोग उसी दिशा में आगे बढ़ रहे हों, जिस दिशा में आप जाना चाहते हैं, तो रास्ता आसान हो सकता है। लेकिन जब भीड़ दूसरी दिशाओं में जा रही हो तो आपको अपने लिए रास्ता बनाने में ज्यादा मेहनत करनी पड़ सकती है।
रास्ता नहीं मिले तो कोशिश जारी रखें
जावेद अख्तर कहते हैं कि जिंदगी में कई बार ऐसा लगता है कि हमारे लिए रास्ता बंद हो गया है। उस समय व्यक्ति इसे अपनी बदनसीबी समझने लगता है।
लेकिन उनके मुताबिक, कोशिश जारी रखने पर रास्ता मिलने की संभावना हमेशा रहती है। हो सकता है कि रास्ता मिलने में समय लगे, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि रास्ता है ही नहीं।
उनका मानना है कि सफलता रास्ते में आने वाली चट्टानों से टकराकर भी अपना रास्ता तलाश लेती है।
मुश्किल वक्त में टूटना नहीं, रास्ता बनाना है
जीवन में मुश्किल परिस्थितियां आती रहेंगी। ऐसे समय में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि व्यक्ति उनके सामने कैसे प्रतिक्रिया देता है।
जावेद अख्तर के मुताबिक, मुश्किल वक्त में इंसान को खुद तय करना होता है कि वह टूटेगा या अपने लिए कोई रास्ता निकालेगा।
अगर एक रास्ता बंद हो जाए तो दूसरा रास्ता तलाशना चाहिए। वहां भी रुकावट मिले तो फिर प्रयास करना चाहिए। यही जीवन का संघर्ष है।
हर परेशानी को अपनी बदनसीबी न समझें
अक्सर जब किसी व्यक्ति को सफलता नहीं मिलती या रास्ते में लगातार रुकावटें आती हैं, तो वह सोचने लगता है कि उसका नसीब खराब है।
जावेद अख्तर इस सोच पर सवाल उठाते हैं। उनके मुताबिक, हर व्यक्ति अपनी जिंदगी और अपनी समस्याओं में व्यस्त है। जरूरी नहीं कि दुनिया जानबूझकर आपके रास्ते में मुश्किलें खड़ी कर रही हो।
वह कहते हैं कि इंसान कई बार खुद को जरूरत से ज्यादा महत्व देकर यह मान लेता है कि पूरी दुनिया उसके खिलाफ है, जबकि वास्तविकता यह हो सकती है कि हर कोई अपनी दिशा में आगे बढ़ने में लगा है।
हो सकता है आप भी किसी के रास्ते की अड़चन हों
जावेद अख्तर यह भी कहते हैं कि जिस तरह आपको अपनी राह में दूसरे लोग बाधा लग सकते हैं, उसी तरह अनजाने में आप भी किसी और के रास्ते की अड़चन बन सकते हैं।
इसलिए हर परेशानी के लिए किसी दूसरे व्यक्ति या किस्मत को जिम्मेदार ठहराने के बजाय अपने रास्ते और प्रयास पर ध्यान देना जरूरी है।
जिंदगी एक मेले की तरह है
जावेद अख्तर के अनुसार, जिंदगी किसी एक मंजिल तक पहुंच जाने का नाम नहीं है। यह लगातार चलने, रुकने, रास्ता तलाशने और फिर आगे बढ़ने की प्रक्रिया है।
वह कहते हैं कि अगर आप एक जगह फंस जाएं तो प्रयास करते रहिए। रास्ता मिलने पर कुछ दूरी तेजी से तय हो जाएगी। आगे फिर कोई रुकावट आए तो दोबारा रास्ता तलाशना होगा।
यही जिंदगी है—अपनी दिशा तय करना, रास्ता तलाशना और जरूरत पड़ने पर खुद अपना रास्ता बनाना।
संघर्ष जिंदगी का अलग हिस्सा नहीं
जावेद अख्तर के विचारों का सार यही है कि संघर्ष जीवन से अलग कोई अध्याय नहीं है। संघर्ष ही जीवन का हिस्सा है।
हर व्यक्ति अपनी परिस्थितियों, महत्वाकांक्षाओं और सीमाओं के बीच रास्ता खोज रहा है। इसलिए मुश्किलों से घबराने के बजाय उन्हें जीवन की स्वाभाविक प्रक्रिया मानकर आगे बढ़ना चाहिए।
उनके मुताबिक, जिंदगी का मतलब ही इस बड़े मेले में अपनी दिशा पहचानना और लगातार अपने लिए रास्ता बनाते रहना है।




