BRICS फोटो सेशन में मोदी के दोनों ओर जिनपिंग-पुतिन: बोले- टेक्नोलॉजी और जरूरी मिनरल्स को हथियार बनाना गलत
भारत मंडपम में BRICS नेताओं का ग्रुप फोटो; मोदी के दोनों ओर जिनपिंग-पुतिन, बोले- टेक्नोलॉजी और जरूरी मिनरल्स को हथियार बनाना दुनिया की प्रगति के लिए नुकसानदायक

नई दिल्ली। BRICS समिट के दूसरे दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने टेक्नोलॉजी और जरूरी मिनरल्स को हथियार की तरह इस्तेमाल करने पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि ऐसा करने से दुनिया की प्रगति प्रभावित होती है। मोदी ने BRICS देशों के बीच सहयोग बढ़ाने और मजबूत सप्लाई चेन तैयार करने पर जोर दिया।
भारत मंडपम में साथ दिखे मोदी, जिनपिंग और पुतिन
समिट के दूसरे दिन भारत मंडपम में BRICS सदस्य देशों के नेताओं का ग्रुप फोटो सेशन हुआ। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी के एक तरफ चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और दूसरी तरफ रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन नजर आए।
मोदी ने कहा कि महामारी, जलवायु आपदाओं और सप्लाई चेन में आई रुकावटों ने यह साफ कर दिया है कि दुनिया के देश एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। किसी एक हिस्से में आने वाला संकट दूसरे देशों को भी प्रभावित कर सकता है। ऐसे में BRICS देशों के बीच आपसी सहयोग और मजबूत सप्लाई चेन जरूरी है।
7 देशों के नेताओं से द्विपक्षीय बैठकें
प्रधानमंत्री मोदी समिट के दौरान 7 देशों के नेताओं के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय बैठकें भी करेंगे। समिट के पहले दिन डिनर का आयोजन किया गया था। इसमें चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और अबू धाबी के क्राउन प्रिंस को छोड़कर अन्य विश्व नेता शामिल हुए।
अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद समिट में शामिल होने के बाद अपने देश लौट गए थे। वहीं, रिपोर्ट के मुताबिक शी जिनपिंग आराम करने के लिए होटल लौट गए थे।
नई दिल्ली डेक्लरेशन में पहलगाम हमले की निंदा
BRICS देशों ने शनिवार को नई दिल्ली डेक्लरेशन को मंजूरी दी। साझा बयान में रूस और चीन समेत सदस्य देशों ने पहलगाम आतंकी हमले की निंदा की। बयान में आतंकवादियों को पनाह देने वालों के खिलाफ मिलकर कार्रवाई करने और आतंकियों तक पहुंचने वाली फंडिंग रोकने पर जोर दिया गया।
BRICS में रेजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन और सस्टेनेबिलिटी पर फोकस
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत की अध्यक्षता में BRICS के काम को चार प्रमुख क्षेत्रों पर आगे बढ़ाया गया। इनमें रेजिलिएंस (लचीलापन), इनोवेशन (नवाचार), कोऑपरेशन (सहयोग) और सस्टेनेबिलिटी (स्थिरता) शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि BRICS देशों के सहयोग से साझा सोच को ऐसे काम में बदलने का प्रयास किया गया है, जिसका फायदा सभी सदस्य देशों को मिल सके।
सप्लाई चेन और स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने की तैयारी
मोदी ने बताया कि BRICS लॉजिस्टिक सप्लाई चेन कोऑपरेशन फ्रेमवर्क के जरिए देशों के बीच सामान की सप्लाई को ज्यादा भरोसेमंद और मजबूत बनाने पर काम किया जाएगा। इसके अलावा BRICS देशों के स्टार्टअप्स को जोड़ने के लिए BRICS इनक्यूबेटर नेटवर्क बनाने की पहल की गई है।
छोटे कारोबारियों को नए बाजार और वित्तीय संसाधनों से जोड़ने के लिए BRICS MSME पोर्टल भी शुरू किया गया है।
संकट से निपटने के लिए अर्ली वार्निंग सिस्टम
मोदी ने कहा कि दुनिया में बढ़ते तनाव, महामारी, जलवायु आपदाओं और सप्लाई चेन में रुकावटों का सीधा असर आम लोगों पर पड़ता है। इसी को देखते हुए BRICS देशों के बीच संक्रामक बीमारियों से निपटने के लिए BRICS इंटीग्रेटेड अर्ली वार्निंग सिस्टम पर सहमति बनी है।
आपदाओं से निपटने के लिए अर्ली वार्निंग डेटा इंटीग्रेशन गाइडलाइंस तैयार करने की भी जानकारी दी गई।
मोदी बोले- अब BRICS से ठोस नतीजों की उम्मीद
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि BRICS अब अपने तीसरे दशक में प्रवेश कर रहा है। दुनिया को अब BRICS से सिर्फ विचार और वादे नहीं, बल्कि ठोस नतीजों की उम्मीद है। उन्होंने भरोसा जताया कि सदस्य देश मिलकर इन उम्मीदों पर खरे उतरेंगे।
उन्होंने अगले BRICS समिट की मेजबानी के लिए चीन को शुभकामनाएं दीं और नई दिल्ली में आयोजित समिट को सफल बनाने के लिए सभी नेताओं और उनकी टीमों का आभार जताया।
BRICS में 11 देश
BRICS में वर्तमान में ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, UAE, सऊदी अरब और इंडोनेशिया शामिल हैं। इसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक सहयोग बढ़ाना है।
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