प्रभाकरन को राजीव गांधी ने दी थी बुलेटप्रूफ जैकेट, चार साल बाद हुई राजीव गांधी की हत्या
1987 में भारत-श्रीलंका शांति समझौते से पहले प्रभाकरन और राजीव गांधी के बीच हुई थी मुलाकात, 1991 में आत्मघाती हमले में राजीव गांधी की हत्या

नई दिल्ली। जून-जुलाई 1987 में श्रीलंका के लिट्टे प्रमुख वेलुपिल्लई प्रभाकरन और तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के बीच कई दौर की बातचीत हुई थी। यह दौर भारत-श्रीलंका शांति समझौते और श्रीलंका के तमिल बहुल क्षेत्रों में राजनीतिक समाधान की कोशिशों से जुड़ा था।
सामग्री के मुताबिक, प्रभाकरन को भारत लाने के बाद दिल्ली के अशोका होटल में ठहराया गया था। इसके बाद प्रधानमंत्री आवास पर राजीव गांधी और प्रभाकरन के बीच बातचीत हुई। राजीव गांधी चाहते थे कि लिट्टे हथियार छोड़े और श्रीलंका में तमिलों के राजनीतिक अधिकारों के लिए हुए समझौते को स्वीकार करे। वहीं प्रभाकरन अलग तमिल राष्ट्र की मांग पर कायम था।
राहुल से मंगवाकर दी थी बुलेटप्रूफ जैकेट
रिपोर्ट में पूर्व विदेश मंत्री कुंवर नटवर सिंह की किताब ‘One Life Is Not Enough’ के हवाले से बताया गया है कि प्रभाकरन के श्रीलंका लौटने से पहले राजीव गांधी ने अपने बेटे राहुल से बुलेटप्रूफ जैकेट मंगवाई और प्रभाकरन को दी। राजीव ने उसे अपनी सुरक्षा का ध्यान रखने की बात कही।
रिपोर्ट के अनुसार, उस समय मौजूद अधिकारियों ने राजीव गांधी से पूछा कि क्या प्रभाकरन ने हथियार डालने का वादा किया है। राजीव गांधी ने कहा कि प्रभाकरन ने उन्हें वचन दिया है। हालांकि, नटवर सिंह ने अपनी किताब में इस मौखिक आश्वासन को लेकर संदेह व्यक्त किया था।
समझौते के बाद भारत ने भेजी थी IPKF
29 जुलाई 1987 को भारत-श्रीलंका शांति समझौते पर हस्ताक्षर हुए। समझौते को लागू कराने के लिए भारत ने इंडियन पीस कीपिंग फोर्स (IPKF) को श्रीलंका भेजा। बाद में लिट्टे और भारतीय सेना के बीच संघर्ष शुरू हो गया। अक्टूबर 1987 में IPKF ने लिट्टे के खिलाफ ऑपरेशन पवन शुरू किया। रिपोर्ट के मुताबिक, करीब दो साल चले संघर्ष में 1,165 भारतीय सैनिक मारे गए और 3,000 घायल हुए।
1991 में आत्मघाती हमले में हुई राजीव गांधी की हत्या
21 मई 1991 को तमिलनाडु के श्रीपेरंबुदूर में चुनाव प्रचार के दौरान राजीव गांधी की हत्या कर दी गई। रिपोर्ट के अनुसार, लिट्टे की आत्मघाती कैडर धनु, जिसका असली नाम थेनमोझी राजरत्नम बताया गया है, ने उनके पास पहुंचकर विस्फोट किया। इस हमले में राजीव गांधी समेत 17 लोगों की मौत हुई।
रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि बाद की जांच, सीबीआई, जैन आयोग और अदालत की कार्यवाहियों में इस हत्या की साजिश के लिए लिट्टे और उसके प्रमुख प्रभाकरन को जिम्मेदार ठहराया गया।
संदर्भ: One Life Is Not Enough — कुंवर नटवर सिंह; The Rout of Prabhakaran — एम. आर. नारायण स्वामी; India Today.
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