उज्जैन में गणेशोत्सव की तैयारियां तेज: मिट्टी के गणेश की बढ़ी मांग, 2 से 10 फीट तक की प्रतिमाएं तैयार
14 सितंबर से शुरू होगा गणेशोत्सव; 2 से 10 फीट तक की शुद्ध मिट्टी की प्रतिमाएं तैयार, पर्यावरण संरक्षण को लेकर श्रद्धालुओं में बढ़ी पसंद

उज्जैन। गणेशोत्सव को लेकर उज्जैन में तैयारियां तेज हो गई हैं। शहर में इस बार श्रद्धालुओं के बीच शुद्ध मिट्टी से बनी गणेश प्रतिमाओं की मांग बढ़ी है। घरों से लेकर सार्वजनिक पंडालों तक मिट्टी से बनी प्रतिमाएं स्थापित करने की तैयारियां चल रही हैं। मूर्तिकार दिन-रात मेहनत कर गणेशजी के अलग-अलग आकर्षक स्वरूपों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं।
14 सितंबर से शुरू होने वाले गणेशोत्सव को लेकर बाजार में 2 फीट से लेकर 10 फीट तक की प्रतिमाएं तैयार की जा रही हैं। मूर्तिकारों के अनुसार, कई प्रतिमाओं की एडवांस बुकिंग भी हो चुकी है।
शुद्ध मिट्टी से तैयार हो रही गणेश प्रतिमाएं
मूर्तिकार त्रिलोक ठाकुर ने बताया कि वे मूर्ति कला से जुड़ी चौथी पीढ़ी से हैं। बचपन से ही प्रतिमाएं बनाने का काम कर रहे हैं। इस बार भी उनके यहां पूरी तरह शुद्ध मिट्टी से गणेश प्रतिमाएं तैयार की जा रही हैं।
प्रतिमाओं की सजावट में प्राकृतिक और देसी रंगों का इस्तेमाल किया जा रहा है। मूर्तिकारों का कहना है कि मिट्टी से बनी प्रतिमाएं विसर्जन के बाद अपेक्षाकृत आसानी से घुल जाती हैं, जिससे जलस्रोतों और पर्यावरण पर नुकसान कम करने में मदद मिल सकती है।
इसी वजह से श्रद्धालुओं को भी मिट्टी की प्रतिमाएं स्थापित करने के लिए जागरूक किया जा रहा है।
अलग-अलग थीम वाली प्रतिमाओं की भी मांग
इस बार बाजार में पारंपरिक गणेश प्रतिमाओं के साथ अलग-अलग थीम और आकर्षक स्वरूप वाली प्रतिमाओं की भी मांग है। श्रद्धालु प्रतिमा खरीदने से पहले उसके निर्माण में इस्तेमाल मिट्टी और रंगों के बारे में जानकारी ले रहे हैं।
कई परिवार पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए शुद्ध मिट्टी की प्रतिमा खरीदने को प्राथमिकता दे रहे हैं।
मूर्तिकार के अनुसार, उज्जैन में इस वर्ष बड़ी संख्या में गणेश प्रतिमाएं तैयार की जा रही हैं। इनमें करीब 50 प्रतिशत प्रतिमाओं की एडवांस बुकिंग हो चुकी है।
रंगों की कीमत बढ़ी, प्रतिमाओं के दाम सीमित बढ़े
मूर्तिकार त्रिलोक ठाकुर ने बताया कि इस वर्ष प्रतिमाएं तैयार करने में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल की कीमत बढ़ी है। खास तौर पर रंगों के दाम में इजाफा हुआ है।
उनके मुताबिक, जिस रंग की कीमत पहले करीब 1,500 रुपए प्रति किलो थी, वह अब बढ़कर करीब 2,000 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गई है। इसके बावजूद ग्राहकों पर ज्यादा बोझ न पड़े, इसका ध्यान रखते हुए प्रतिमाओं की कीमत में करीब 2 प्रतिशत तक ही बढ़ोतरी की गई है।
‘कला श्री’ पुरस्कार से सम्मानित हो चुके हैं त्रिलोक ठाकुर
मूर्तिकार त्रिलोक ठाकुर को शासन की ओर से ‘कला श्री’ पुरस्कार मिल चुका है। वर्ष 2007 में वे सरकार की ओर से दुबई में आयोजित प्रदर्शनी में भी हिस्सा ले चुके हैं।
दुबई प्रदर्शनी में उनकी बनाई कलाकृतियों, खासकर पक्षियों की कलाकृतियों को लोगों ने काफी पसंद किया था। वहां उनकी करीब 70 से 80 प्रतिशत कलाकृतियां बिक गई थीं।
अंतिम रूप देने में जुटे मूर्तिकार
गणेशोत्सव नजदीक आने के साथ ही मूर्तिकारों की व्यस्तता बढ़ गई है। कार्यशालाओं में दिन-रात प्रतिमाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है। कहीं रंग-रोगन का काम चल रहा है तो कहीं प्रतिमाओं की सजावट की जा रही है।
उज्जैन में गणेशोत्सव के दौरान घरों और सार्वजनिक पंडालों में इन प्रतिमाओं की स्थापना की जाएगी। मिट्टी की प्रतिमाओं की बढ़ती मांग से इस बार भक्ति के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी देखने को मिल रहा है




