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बच्चों को शिक्षा के साथ अच्छे संस्कार देना भी जरूरी: सत्यप्रकाश जी महाराज

सत्यप्रकाश जी महाराज

जैन स्थानक में उपप्रवर्तक श्री सत्यप्रकाश जी महाराज व सेवाभावी गुरुदेव श्री समर्थ मुनि जी महाराज के सानिध्य में प्रतिदिन हो रहे प्रवचन

डबवाली। स्थानीय जैन स्थानक में चातुर्मास के पावन अवसर पर ज्योतिषाचार्य, उपप्रवर्तक पूज्य गुरुदेव श्री सत्यप्रकाश जी महाराज तथा सेवाभावी गुरुदेव श्री समर्थ मुनि जी महाराज के सानिध्य में धार्मिक कार्यक्रमों का सिलसिला लगातार जारी है। प्रतिदिन आयोजित होने वाले प्रवचनों में डबवाली के श्रद्धालुओं के साथ-साथ पंजाब और हरियाणा के विभिन्न शहरों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर गुरु दर्शन एवं धर्मलाभ प्राप्त कर रहे हैं।

रविवार को आयोजित धर्मसभा में उपप्रवर्तक श्री सत्यप्रकाश जी महाराज ने बच्चों की शिक्षा और संस्कारों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए उन्हें अच्छी शिक्षा देना जितना जरूरी है, उतना ही आवश्यक उन्हें संस्कारवान बनाना भी है। उन्होंने अभिभावकों से आह्वान किया कि बच्चों को अच्छे विद्यालयों में शिक्षा दिलाने के साथ-साथ उन्हें धर्म और संस्कारों से भी जोड़ा जाए। बच्चों को नियमित रूप से सत्संग में लेकर जाने से उनमें नैतिक मूल्यों, सद्विचारों और अच्छे संस्कारों का विकास होता है।

प्रवचन के दौरान उन्होंने पारिवारिक जीवन से जुड़े विभिन्न विषयों पर भी श्रद्धालुओं का मार्गदर्शन किया। पति-पत्नी तथा सास-बहू के रिश्तों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि परिवार में प्रेम, धैर्य, आपसी सम्मान और समझदारी का भाव होना जरूरी है। एक-दूसरे की भावनाओं को समझकर तथा छोटी-छोटी बातों को तूल न देकर परिवार में शांति और सौहार्द का वातावरण कायम रखा जा सकता है।

प्रकृति और मानव जीवन के संबंध पर विचार रखते हुए श्री सत्यप्रकाश जी महाराज ने कहा कि आज वर्षा की कमी और पर्यावरण से जुड़ी कई समस्याएं मनुष्य के प्रकृति के प्रति बदलते व्यवहार का परिणाम हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं से प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनने, जीवन में संयम अपनाने और सदाचार के मार्ग पर चलने का संदेश दिया।

इस अवसर पर जैन सभा के प्रधान सुभाष जैन पप्पी ने बताया कि चातुर्मास की अवधि में जैन स्थानक में प्रतिदिन सुबह 8 से 9 बजे तक धार्मिक प्रवचन आयोजित किए जा रहे हैं। रविवार को मूनक सहित अन्य स्थानों से भी श्रद्धालु धर्मसभा में पहुंचे। उन्होंने श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में जैन स्थानक पहुंचकर संतों के प्रवचन सुनने और धर्मलाभ प्राप्त करने का आह्वान किया।

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