झारखंड सेंट्रल यूनिवर्सिटी में छात्रों का आंदोलन: मेस फीस बढ़ोतरी और खाने की खराब क्वालिटी का विरोध, 200 छात्र धरने पर बैठे
मेस फीस 2,621 से बढ़कर 3,800 रुपए होने पर छात्रों में नाराजगी; खाने की गुणवत्ता, फीस का हिसाब और छात्र प्रतिनिधित्व की मांग

रांची। सेंट्रल यूनिवर्सिटी झारखंड (CUJ) के चेरी मनातू कैंपस में मेस फीस बढ़ोतरी, खाने की गुणवत्ता और छात्र प्रतिनिधित्व को लेकर छात्रों ने रविवार को आंदोलन किया। करीब 200 छात्र धरने पर बैठे। आंदोलन देर रात करीब 12 बजे समाप्त हुआ।
छात्रों का आरोप है कि मेस की फीस लगातार बढ़ाई जा रही है, लेकिन भोजन की गुणवत्ता में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। उन्होंने फीस बढ़ोतरी का पूरा हिसाब सार्वजनिक करने, खाने की गुणवत्ता सुधारने और छात्रों की समस्याओं पर ठोस निर्णय लेने की मांग की।
एक साल में 1179 रुपए तक बढ़ी मेस फीस
छात्रों के अनुसार ग्रीष्मावकाश 2025 से पहले मेस शुल्क करीब 2,621 रुपए प्रतिमाह था। इसमें शाम का स्नैक्स भी शामिल था। इसके बाद फीस यूजी हॉस्टल में 3,071 रुपए और पीजी व पीएचडी हॉस्टल में 3,377 रुपए तक पहुंच गई।
अब मेस फीस 3,800 रुपए प्रतिमाह किए जाने की बात सामने आई है। छात्रों का कहना है कि इसमें शाम का स्नैक्स शामिल नहीं है। उन्होंने मांग की कि फीस बढ़ोतरी का आधार, भोजन की लागत और मेस एजेंसी को किए जा रहे भुगतान की जानकारी सार्वजनिक की जाए।
छात्र प्रतिनिधित्व को लेकर भी सवाल
छात्रों ने कहा कि आंदोलन किसी व्यक्ति या संस्था के खिलाफ नहीं है। वे पारदर्शिता, जवाबदेही और विश्वविद्यालय के निर्णयों में छात्रों की भागीदारी चाहते हैं।
छात्रों का दावा है कि CUJ एक्ट में स्टूडेंट यूनियन के गठन का प्रावधान है, लेकिन महत्वपूर्ण बैठकों और निर्णय प्रक्रिया में छात्रों के प्रतिनिधि शामिल नहीं होते। उनका कहना है कि इससे छात्रों से जुड़े फैसले उनकी राय के बिना लिए जाते हैं।
अधिकारियों ने छात्रों से की बातचीत
आंदोलन के दौरान वार्डन सुभाष कुमार बैठा, एसोसिएट डीएसडब्ल्यू शैलेंद्र कुमार और चीफ प्रॉक्टर अमरेंद्र कुमार छात्रों से बातचीत करने पहुंचे। अधिकारियों ने छात्रों की मांगों को कुलपति और विश्वविद्यालय के अन्य अधिकारियों तक पहुंचाने का आश्वासन दिया।
छात्रों का कहना है कि केवल आश्वासन से समस्या का समाधान नहीं होगा। वे अपनी मांगों पर लिखित और स्पष्ट निर्णय चाहते हैं।
परीक्षा से रोके जाने पर दो छात्र आमरण अनशन पर
इसी बीच पांच वर्षीय इंटीग्रेटेड गणित पाठ्यक्रम के छात्र मनु कुमार और ऋषि कुमार आमरण अनशन पर बैठे हैं। उनका आरोप है कि कम अटेंडेंस के कारण उन्हें परीक्षा में शामिल होने से रोका जा रहा है।
दोनों छात्रों का कहना है कि उन्होंने बीमारी से संबंधित मेडिकल दस्तावेज विश्वविद्यालय में जमा किए थे, लेकिन इसके बावजूद उनकी समस्या पर अपेक्षित विचार नहीं किया गया। उन्होंने परीक्षा में बैठने की अनुमति देने की मांग की है।




