ट्रेजरी फर्जीवाड़े के बाद शिक्षा विभाग का बड़ा फैसला: अब सरकारी अफसरों की निगरानी में होगा JEPC का हर भुगतान
ट्रेजरी फर्जीवाड़े के बाद JEPC ने कसा शिकंजा, करीब 800 करोड़ के फंड की डिजिटल निगरानी होगी।

झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद (JEPC) ने बोकारो, हजारीबाग समेत कई ट्रेजरी से फर्जी तरीके से राशि निकासी के मामलों के बाद वित्तीय व्यवस्था को सख्त करने का फैसला लिया है। नई व्यवस्था के तहत जेईपीसी के फंड को बैंकों में रखने के बजाय ट्रेजरी में रखा जाएगा और सभी भुगतान डिजिटल माध्यम से किए जाएंगे। ज्वाइंट सिग्नेचर की पुरानी व्यवस्था को समाप्त करते हुए अब भुगतान के लिए सरकारी अधिकारी के हस्ताक्षर को अनिवार्य किया गया है। जिला स्तर पर डीईओ, बीईईओ और एसपीडी जैसे अधिकारियों को डीडीओ की भूमिका दी जा सकेगी, जिससे फंड की जिम्मेदारी सीधे सरकारी अधिकारियों की निगरानी में रहेगी। छोटे से छोटे खर्च के लिए भी वाउचर अनिवार्य होगा और चेक से भुगतान की व्यवस्था खत्म की जा रही है। करीब 800 करोड़ रुपए की योजनागत राशि पर निगरानी रखने के लिए ट्रेजरी पोर्टल और एसएनए स्पर्श प्रणाली का इस्तेमाल किया जाएगा। केंद्र से मिली 445 करोड़ रुपए की राशि, पीएमश्री स्कूलों के लिए 88 करोड़ रुपए तथा राज्यांश को मिलाकर यह राशि करीब 800 करोड़ रुपए तक पहुंचती है, जिसका इस्तेमाल किताब-कॉपी, साइकिल, पारा शिक्षकों के वेतन समेत विभिन्न योजनाओं में किया जाना है। नई व्यवस्था का उद्देश्य फर्जी निकासी, अनधिकृत भुगतान और वित्तीय अनियमितताओं पर रोक लगाना है। अब प्रत्येक भुगतान का डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा और राशि की रीयल-टाइम मॉनिटरिंग संभव होगी। माना जा रहा है कि इस बदलाव से शिक्षा परियोजनाओं के करोड़ों रुपए के फंड के संचालन में पारदर्शिता बढ़ेगी और जिम्मेदारी तय करना भी आसान होगा।



