भास्कर एक्सक्लूसिव: वनकर्मी को शहीद मानने में लगे 5 साल, एक करोड़ और मकान का वादा अब भी अधूरा

उज्जैन। देवास के जंगल में वन संपदा की रक्षा करते हुए जान गंवाने वाले उज्जैन के वन रक्षक मदनलाल वर्मा को शहीद का दर्जा मिलने में पांच साल लग गए। 14 अगस्त को भोपाल में उनकी पत्नी कृष्णा वर्मा को शॉल, श्रीफल और प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। पति को शहीद का दर्जा मिलने की खुशी के बीच परिवार की वर्षों पुरानी पीड़ा भी सामने आई।
मदनलाल की मौत के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने परिवार को एक करोड़ रुपए, मकान और बेटे को नौकरी देने की घोषणा की थी। बेटे को नौकरी मिल गई, लेकिन परिवार का कहना है कि एक करोड़ रुपए और मकान का इंतजार अभी भी जारी है।
अब परिवार के सामने एक और संकट खड़ा हो गया है। उज्जैन में सिंहस्थ की तैयारियों के तहत सड़क चौड़ीकरण की कार्रवाई प्रस्तावित है और परिवार के मकान पर भी नोटिस दिए जा रहे हैं। ऐसे में शहीद का परिवार किराए का घर तलाशने को मजबूर है।
2021 में जंगल में हुई थी फायरिंग
4 फरवरी 2021 को देवास जिले के पुंजापुरा के जंगल में वन रक्षक मदनलाल वर्मा गश्त पर थे। बताया गया कि वे अकेले और बिना हथियार के जंगल की निगरानी कर रहे थे। इसी दौरान उनका सामना लकड़ी तस्करों से हुआ।
फायरिंग में गोली लगने से मदनलाल की मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद वन विभाग और प्रशासन में हड़कंप मच गया। उज्जैन स्थित उनके घर पर जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने पहुंचकर परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।
इसी दौरान परिवार के लिए आर्थिक सहायता, मकान और नौकरी जैसी घोषणाएं की गई थीं।
बेटे को मिली नौकरी, लेकिन मकान और राशि का इंतजार
परिवार के अनुसार, मदनलाल के बेटे को नौकरी मिल गई, लेकिन एक करोड़ रुपए और मकान की घोषणा पूरी नहीं हुई। परिवार का कहना है कि पांच साल तक इस संबंध में अधिकारियों और विभाग के चक्कर लगाने पड़े।
मदनलाल की पत्नी कृष्णा वर्मा के अनुसार, परिवार ने सरकार और विभाग को कई पत्र लिखे। अधिकारियों से मुलाकात के दौरान उन्हें लगातार यह बताया जाता रहा कि फाइल प्रक्रिया में है।
अब शहीद का दर्जा मिलने के बाद परिवार को उम्मीद थी कि उनकी बाकी मांगों पर भी कार्रवाई होगी, लेकिन इसी बीच घर टूटने का संकट सामने आ गया।
सड़क चौड़ीकरण में जा रहा मकान
कृष्णा वर्मा का कहना है कि उनके घर पर लाल निशान लगाए गए हैं और मकान टूटने की चिंता सता रही है। उनका कहना है कि परिवार के पास इतना पैसा नहीं है कि वह नया मकान बनवा सके।
उन्होंने कहा कि अगर सरकार की ओर से घोषित मकान मिल जाता तो आज सड़क चौड़ीकरण के नोटिस को लेकर इतनी परेशानी नहीं होती।
परिवार अब किराए का घर तलाश रहा है और सरकार से मदद की उम्मीद कर रहा है।
शहीद का दर्जा पाने के लिए भी पांच साल संघर्ष
मदनलाल को शहीद का दर्जा दिलाने के लिए परिवार ने लंबे समय तक प्रयास किया। परिवार के मुताबिक, सरकार और विभाग को सैकड़ों पत्र भेजे गए और अधिकारियों से मुलाकात की गई।
हर बार परिवार को फाइल प्रक्रिया में होने की जानकारी दी जाती रही। करीब पांच साल बाद 14 अगस्त को भोपाल में आयोजित कार्यक्रम में कृष्णा वर्मा को शॉल, श्रीफल और प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया।
सम्मान मिलने के बावजूद परिवार का कहना है कि आर्थिक सहायता और मकान की पुरानी घोषणा अभी पूरी नहीं हुई है।
सीएम हेल्पलाइन में शिकायत के बाद ट्रांसफर का आरोप
मदनलाल की भतीजी किरण वर्मा ने आरोप लगाया कि परिवार ने अपनी मांगों को लेकर सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत की थी। इसके बाद मदनलाल की जगह वन विभाग में नौकरी कर रहे उनके भाई का ट्रांसफर खिवनी अभयारण्य कर दिया गया।
किरण के मुताबिक, शिकायत वापस लेने और कई प्रयासों के बाद ट्रांसफर वापस देवास किया गया। परिवार का सवाल है कि जंगल और वन संपदा की रक्षा करते हुए जान गंवाने वाले वनकर्मी के परिवार को अपने अधिकारों के लिए इतना संघर्ष क्यों करना पड़ रहा है।
वन विभाग ने कहा- शासन स्तर से चली प्रक्रिया
देवास डीएफओ अमितसिंह चौहान ने कहा कि मदनलाल को शहीद का दर्जा मिल चुका है और इसके लिए प्रक्रिया शासन स्तर से चली।
हालांकि, शहीद का दर्जा मिलने में पांच साल लगने के कारणों पर उन्होंने कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी।
तत्कालीन मुख्यमंत्री की ओर से एक करोड़ रुपए और मकान देने की घोषणा के संबंध में डीएफओ ने कहा कि घोषणा हुई थी, लेकिन उसका पालन शासन स्तर से होना था। फिलहाल इस संबंध में शासन स्तर पर क्या स्थिति है, इसकी जानकारी उनके पास नहीं है।




