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बारिश में छत-दीवारों में बढ़ता लीकेज, इन 10 संकेतों को न करें इग्नोर

सीलन और पानी रिसने से प्लास्टर, फर्नीचर और इलेक्ट्रिक वायरिंग को नुकसान का खतरा; जानिए लीकेज रोकने के 6 असरदार तरीके

नई दिल्ली। मानसून के दौरान लगातार बारिश से घरों में छत से पानी टपकने, दीवारों पर सीलन आने और पेंट उखड़ने जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं। शुरुआत में ये दिक्कतें छोटी लग सकती हैं, लेकिन लंबे समय तक नमी रहने से घर के प्लास्टर, पेंट, फर्नीचर और इलेक्ट्रिक वायरिंग को नुकसान पहुंच सकता है।

पुराने मकानों, खराब वाटरप्रूफिंग और जाम ड्रेनेज वाले घरों में लीकेज का खतरा ज्यादा रहता है। जरूरी है कि पानी अंदर आने का इंतजार करने के बजाय शुरुआती संकेतों को पहचानकर समय रहते मरम्मत कराई जाए।

मानसून में लीकेज क्यों बढ़ जाता है?

बारिश के दौरान छत, बाहरी दीवारों और घर के अन्य हिस्सों पर लगातार पानी और नमी का दबाव रहता है। छत या दीवार में मौजूद छोटी दरारों से पानी धीरे-धीरे अंदर पहुंच सकता है।

शुरुआत में इसका पता नहीं चलता, लेकिन बाद में दीवारों पर दाग, सीलन, फफूंदी, पेंट उखड़ने और पानी टपकने जैसी समस्याएं दिखाई देने लगती हैं।

इन 10 संकेतों को न करें नजरअंदाज

घर में लीकेज की शुरुआत होने पर आमतौर पर ये संकेत दिखाई दे सकते हैं—

  1. दीवारों पर नमी या गीले धब्बे।
  2. छत पर पानी के दाग।
  3. पेंट का फूलना या उखड़ना।
  4. प्लास्टर में दरार या कमजोर होना।
  5. दीवारों पर काली या हरी फफूंदी।
  6. कमरों में लगातार सीलन की गंध।
  7. बारिश के बाद छत से पानी की बूंदें गिरना।
  8. टाइलों के बीच से पानी रिसना।
  9. दरवाजे या खिड़की के आसपास नमी दिखाई देना।
  10. दीवारों के पास फर्नीचर में नमी या फफूंदी लगना।

इनमें से कोई संकेत दिखाई दे तो लीकेज के स्रोत की जांच कराना जरूरी है।

घर में किन जगहों पर लीकेज का खतरा ज्यादा?

घर की छत, बालकनी, बाहरी दीवारों के जोड़, पाइपलाइन कनेक्शन, ड्रेनेज पाइप और टाइलों के जोड़ लीकेज के लिहाज से संवेदनशील हिस्से होते हैं।

छत पर पानी जमा होना भी बड़ी समस्या बन सकता है। अगर टेरेस का स्लोप सही नहीं है तो बारिश का पानी ड्रेनेज तक नहीं पहुंचता और लंबे समय तक एक ही जगह जमा रहता है।

सीलन से घर को क्या नुकसान हो सकता है?

लगातार नमी से प्लास्टर कमजोर पड़ सकता है और पेंट उखड़ने लगता है। दीवारों पर फफूंदी जमने से घर में सीलन की गंध भी आने लगती है।

नमी लकड़ी के फर्नीचर, अलमारी और इलेक्ट्रॉनिक सामान को नुकसान पहुंचा सकती है। अगर पानी बिजली की वायरिंग तक पहुंच जाए तो शॉर्ट सर्किट का खतरा भी बढ़ सकता है।

सेहत पर भी पड़ सकता है असर

सीलन वाले वातावरण में फफूंदी बढ़ सकती है। इससे कुछ लोगों में एलर्जी, आंखों में जलन और सांस से जुड़ी परेशानी बढ़ सकती है। बच्चों, बुजुर्गों और संवेदनशील लोगों के लिए लंबे समय तक नम वातावरण से बचना बेहतर है।

बारिश के दौरान लीकेज हो तो तुरंत क्या करें?

अगर बारिश के दौरान घर में पानी रिसने लगे तो सबसे पहले सुरक्षा पर ध्यान दें।

  • पानी के पास मौजूद बिजली के उपकरण और स्विच से दूरी रखें।
  • जरूरत हो तो सुरक्षित तरीके से संबंधित बिजली सप्लाई बंद कराएं।
  • फर्श पर जमा पानी तुरंत साफ करें।
  • पानी टपकने वाली जगह के नीचे बाल्टी या बड़ा बर्तन रखें।
  • अस्थायी तौर पर वाटरप्रूफ टेप, प्लास्टिक शीट या उपयुक्त सीलेंट का इस्तेमाल किया जा सकता है।
  • बारिश रुकने के बाद लीकेज के वास्तविक स्रोत की जांच कराकर स्थायी मरम्मत करवाएं।

लीकेज ठीक करने के 6 तरीके

1. वाटरप्रूफ कोटिंग

छत और बाहरी दीवारों पर उपयुक्त वाटरप्रूफ कोटिंग लगाने से बारिश के पानी का प्रवेश कम किया जा सकता है। कोटिंग का चुनाव सतह और समस्या के अनुसार विशेषज्ञ की सलाह से करना बेहतर है।

2. क्रैक फिलिंग

छत और दीवारों में मौजूद दरारों को समय रहते भरना जरूरी है। खुली दरारें बारिश के पानी को अंदर पहुंचने का रास्ता दे सकती हैं।

3. टेरेस का स्लोप ठीक कराएं

छत पर पानी जमा हो रहा है तो ड्रेनेज और स्लोप की जांच कराएं। सही ढलान पानी को ड्रेनेज पाइप की ओर ले जाने में मदद करता है।

4. मेम्ब्रेन वाटरप्रूफिंग

मेम्ब्रेन वाटरप्रूफिंग में सतह पर वाटरप्रूफ लेयर बनाई जाती है। यह तकनीक कई तरह की छतों में इस्तेमाल की जाती है, लेकिन सही सिस्टम का चयन भवन की स्थिति के अनुसार होना चाहिए।

5. टाइल ग्राउटिंग

टाइलों के बीच खुले या खराब जोड़ से पानी नीचे जा सकता है। पुराने ग्राउट को ठीक कराकर दोबारा ग्राउटिंग कराने से रिसाव का खतरा कम किया जा सकता है।

6. ड्रेनेज सिस्टम साफ रखें

छत और बालकनी के ड्रेनेज पाइप में कचरा जमा होने से पानी रुक सकता है। मानसून से पहले और बारिश के दौरान ड्रेनेज की सफाई कराना लीकेज रोकने का आसान उपाय है।

दीवारों की सीलन रोकने के उपाय

दीवारों में सीलन रोकने के लिए बाहरी दीवारों पर उपयुक्त वाटरप्रूफ पेंट या कोटिंग, दरारों की मरम्मत और पाइपलाइन लीकेज को ठीक कराना जरूरी है।

कमरों में पर्याप्त वेंटिलेशन और धूप की व्यवस्था भी रखें। फफूंदी दिखाई देने पर उसकी सफाई और जरूरी ट्रीटमेंट कराएं।

क्या सिर्फ वाटरप्रूफिंग पेंट से लीकेज खत्म हो जाएगा?

हर मामले में नहीं। अगर लीकेज का कारण बड़ी दरार, पाइपलाइन, ड्रेनेज की समस्या या कोई संरचनात्मक खराबी है तो केवल पेंट लगाने से समस्या स्थायी रूप से खत्म नहीं होगी।

पहले लीकेज का स्रोत पता करना और उसके बाद उचित तकनीक से मरम्मत कराना ज्यादा प्रभावी रहता है।

नई बिल्डिंग में भी हो सकता है लीकेज

नई बिल्डिंग में भी लीकेज हो सकता है। निर्माण के दौरान सही वाटरप्रूफिंग न होने, खराब गुणवत्ता की सामग्री या गलत ड्रेनेज डिजाइन के कारण नई इमारत में भी पानी रिस सकता है।

इसीलिए केवल मकान नया होने के आधार पर लीकेज की समस्या को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

वाटरप्रूफिंग कितने साल चलती है?

वाटरप्रूफिंग की उम्र इस्तेमाल की गई तकनीक, सामग्री, निर्माण की स्थिति और रखरखाव पर निर्भर करती है। अच्छी गुणवत्ता का काम कई वर्षों तक प्रभावी रह सकता है, लेकिन समय-समय पर छत, ड्रेनेज और सीलेंट की जांच जरूरी है।

जरूरी बात: अगर छत या दीवार में बड़ी दरार, लगातार पानी रिसना, प्लास्टर गिरना या बिजली की वायरिंग के पास पानी दिखाई दे तो खुद मरम्मत करने के बजाय योग्य इंजीनियर, वाटरप्रूफिंग विशेषज्ञ या इलेक्ट्रिशियन की मदद लें।

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