होर्मुज में फिर टकराव: अमेरिका का ईरान पर हमला, जवाब में जॉर्डन पर मिसाइलें
लारक द्वीप पर रॉकेट लॉन्चर्स को बनाया निशाना; होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ता तनाव वैश्विक तेल और गैस सप्लाई के लिए चिंता बढ़ा रहा है

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। साझा की गई रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी सेना ने करीब एक महीने बाद ईरान के लारक द्वीप पर हमला किया और वहां मौजूद दो रॉकेट लॉन्चर्स को निशाना बनाया। अमेरिका का दावा है कि ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स होर्मुज स्ट्रेट में रॉकेट और समुद्री बारूदी सुरंगें लॉन्च करने की तैयारी कर रहे थे। ईरान ने अमेरिकी हमले में सैनिकों और नागरिकों के मारे जाने तथा कई लोगों के घायल होने का दावा किया। इसके कुछ समय बाद ईरान की ओर से जॉर्डन में मौजूद दो अमेरिकी एयरबेस पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागे जाने का दावा किया गया, हालांकि दूसरी रिपोर्टों के मुताबिक जॉर्डन की एयर डिफेंस ने इन मिसाइलों को इंटरसेप्ट कर लिया। इस पूरे घटनाक्रम का सबसे संवेदनशील केंद्र होर्मुज स्ट्रेट है, जो फारस की खाड़ी और अरब सागर के बीच दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा समुद्री मार्गों में से एक है। रिपोर्ट के मुताबिक युद्ध से पहले दुनिया के इस्तेमाल होने वाले करीब 20% तेल और LNG की आवाजाही इसी रास्ते से होती थी। ऐसे में यहां सैन्य तनाव बढ़ने, समुद्री बारूदी सुरंगों या जहाजों की आवाजाही में किसी भी तरह की बाधा का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है। अमेरिका का कहना है कि उसने हाल ही में अंतरराष्ट्रीय शिपिंग रूट से समुद्री बारूदी सुरंगें हटाई थीं और ईरानी गतिविधियों पर नजर रखी जा रही थी। दूसरी ओर, रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि ईरान होर्मुज से गुजरने वाले कुछ जहाजों से शुल्क वसूलने की तैयारी कर रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा होर्मुज को लेकर पहले दिए गए बयानों के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है। अब अमेरिका के ताजा हमले और ईरान की जवाबी कार्रवाई के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या दोनों देशों के बीच टकराव सीमित रहेगा या होर्मुज स्ट्रेट एक बड़े क्षेत्रीय संकट का केंद्र बन जाएगा। होर्मुज में बढ़ता तनाव सिर्फ अमेरिका और ईरान का सैन्य विवाद नहीं है, बल्कि इसका असर तेल की कीमतों, समुद्री व्यापार और दुनिया की ऊर्जा सप्लाई पर भी पड़ सकता है।




