धर्मशाला में सरकारी जमीन घोटाले में 42 लोगों पर FIR, रिकॉर्ड में हेरफेर का आरोप
घनियारा इलाके की 88 कनाल से ज्यादा सरकारी जमीन निजी नामों पर चढ़ाने का मामला; रजिस्ट्री और गिफ्ट डीड के जरिए हुए ट्रांसफर की विजिलेंस जांच, नामजद आरोपी को कोर्ट से जमानत

धर्मशाला के घनियारा क्षेत्र में सरकारी जमीन के रिकॉर्ड में कथित हेरफेर कर उसे निजी व्यक्तियों के नाम दर्ज कराने और बाद में अलग-अलग दस्तावेजों के जरिए ट्रांसफर किए जाने के मामले में राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार रोधी ब्यूरो यानी SV & ACB धर्मशाला ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 42 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। विजिलेंस की प्रारंभिक जांच में आरोप है कि घनियारा क्षेत्र में 88 कनाल से अधिक सरकारी जमीन के राजस्व रिकॉर्ड में हेरफेर किया गया और सरकारी खाते में दर्ज जमीन को पहले निजी काश्तकारों के नाम इंतकाल के माध्यम से चढ़ाया गया। इसके बाद इसी जमीन को रजिस्ट्री, गिफ्ट डीड और अन्य दस्तावेजों के जरिए अलग-अलग व्यक्तियों के नाम ट्रांसफर किया गया। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि जमीन के रिकॉर्ड में बदलाव किस स्तर पर हुआ, किन अधिकारियों या कर्मचारियों की भूमिका रही और निजी नामों पर जमीन दर्ज कराने के बाद उसके हस्तांतरण की प्रक्रिया किस तरह आगे बढ़ाई गई। विजिलेंस के अनुसार मामले में हिमाचल प्रदेश टेनेंसी एंड लैंड रिफॉर्म्स एक्ट की धारा 104 से जुड़े नियमों की अनदेखी किए जाने का आरोप है। जांच में विशेष रूप से वर्ष 2019 और 2020 में दर्ज किए गए कई इंतकाल सामने आए हैं, जिनकी वैधता और पूरी प्रक्रिया अब जांच का हिस्सा है। आरोप है कि सरकारी जमीन को पहले निजी काश्तकारों के नाम दर्ज किया गया और इसके बाद उस जमीन का स्वामित्व या कब्जे से संबंधित रिकॉर्ड अलग-अलग लोगों के नाम ट्रांसफर किया जाता रहा। कुछ मामलों में जमीन एक से अधिक बार ट्रांसफर किए जाने की जानकारी भी जांच में सामने आई है। विजिलेंस इस पूरे रिकॉर्ड की कड़ियों को जोड़ने के साथ यह भी देख रही है कि जमीन के मूल सरकारी रिकॉर्ड में किस आधार पर बदलाव किया गया और बाद में रजिस्ट्री तथा गिफ्ट डीड जैसे दस्तावेजों के माध्यम से हुए लेनदेन में किन-किन लोगों की भूमिका रही। मामले में नामजद आरोपी नेक राम को शनिवार को अदालत से जमानत मिल गई है। एसपी विजिलेंस रमन शर्मा ने FIR दर्ज होने और आरोपी को जमानत मिलने की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि विजिलेंस थाना धर्मशाला में इस मामले को लेकर केस दर्ज किया गया है और कुल 42 लोगों को आरोपी बनाया गया है। आरोपी नेक राम की ओर से अधिवक्ता अंकुर सोनी ने अदालत में पैरवी की। बचाव पक्ष के वकील के अनुसार उनके मुवक्किल को कोर्ट से जमानत मिल गई है और अदालत के आदेश की प्रति मिलने के बाद मामले से संबंधित विस्तृत जानकारी साझा की जाएगी। जमानत मिलने का अर्थ यह नहीं है कि आरोपी के खिलाफ लगे आरोप समाप्त हो गए हैं या वह दोषमुक्त हो गया है; मामले में जांच और न्यायिक प्रक्रिया आगे जारी रहेगी। विजिलेंस की जांच में घनियारा क्षेत्र के तीन महालों से संबंधित राजस्व रिकॉर्ड विशेष रूप से सामने आया है। इनमें चकबन घनियारा में करीब 84 कनाल यानी लगभग 03-24-06 हेक्टेयर भूमि, मोहली लाहड़ा दी में करीब 3 कनाल यानी लगभग 00-12-32 हेक्टेयर और तेहड़ में करीब 17 मरले यानी लगभग 00-03-29 हेक्टेयर भूमि शामिल बताई गई है। इन जमीनों से जुड़े इंतकाल, उनके आधार, संबंधित राजस्व प्रविष्टियां और बाद में हुए ट्रांसफर अब विजिलेंस की जांच के महत्वपूर्ण हिस्से हैं। जांच एजेंसी यह भी देख रही है कि सरकारी जमीन को निजी नामों पर दर्ज कराने के लिए किन दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया और क्या राजस्व रिकॉर्ड में बदलाव नियमानुसार किया गया था या इसमें किसी तरह की अनियमितता हुई। जमीन के बाद के लेनदेन की भी जांच की जा रही है, क्योंकि रिकॉर्ड के अनुसार कुछ जमीन रजिस्ट्री और गिफ्ट डीड के माध्यम से आगे हस्तांतरित की गई। यदि किसी जमीन का स्वामित्व या हस्तांतरण प्रारंभिक स्तर पर ही नियमों के विपरीत हुआ हो तो उसके बाद किए गए लेनदेन की वैधता भी जांच का विषय बन सकती है। यही कारण है कि विजिलेंस अब केवल जमीन के मौजूदा रिकॉर्ड की जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि पुराने इंतकाल से लेकर बाद में हुए प्रत्येक ट्रांसफर की कड़ी को खंगाल रही है। मामले की गंभीरता इस बात से भी जुड़ी है कि आरोप सरकारी खाते में दर्ज भूमि को निजी नामों पर दर्ज कराने और उसके बाद उसका इस्तेमाल निजी लेनदेन में किए जाने से संबंधित हैं। हालांकि फिलहाल सामने आए आरोप जांच एजेंसी के रिकॉर्ड और FIR पर आधारित हैं तथा अदालत में इन आरोपों को साक्ष्यों के आधार पर साबित किया जाना बाकी है। जांच के दौरान दस्तावेजों, राजस्व रिकॉर्ड, इंतकाल की प्रक्रिया, रजिस्ट्री और गिफ्ट डीड सहित संबंधित कागजात की पड़ताल की जाएगी। साथ ही यह भी निर्धारित किया जाएगा कि 42 नामजद आरोपियों में से प्रत्येक की भूमिका क्या रही और किस स्तर पर किस व्यक्ति ने कथित अनियमितता में भाग लिया। विजिलेंस की कार्रवाई के बाद अब घनियारा इलाके में सरकारी जमीन से जुड़े पुराने राजस्व रिकॉर्ड की जांच और गहराने की संभावना है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि सरकारी जमीन के रिकॉर्ड में कथित बदलाव किस तरह किया गया और इसके पीछे कौन-कौन लोग जिम्मेदार थे। फिलहाल 42 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज हो चुकी है, जबकि नामजद आरोपी नेक राम को अदालत से जमानत मिल गई है। मामले की जांच जारी है और आगे सामने आने वाले दस्तावेजों तथा साक्ष्यों के आधार पर विजिलेंस की कार्रवाई आगे बढ़ सकती है।




