उत्तराखंड में हरितालिका तीज अब और भव्य होगी, CM धामी का बड़ा ऐलान
गोर्खाली महिला हरितालिका तीज उत्सव में बोले मुख्यमंत्री- सरकार अपने स्तर पर करेगी आयोजन; नेपाल की आपदा पर जताई संवेदना, कहा- संकट की घड़ी में भारत पूरी तरह साथ

उत्तराखंड में हरितालिका तीज उत्सव को अब राज्य सरकार की ओर से पहले की तुलना में अधिक भव्य और व्यापक स्तर पर आयोजित किया जाएगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून के गढ़ी कैंट स्थित जसवंत सिंह ग्राउंड में आयोजित गोर्खाली महिला हरितालिका तीज उत्सव एवं मेले में यह घोषणा की। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में गोर्खाली समाज की महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में पहुंचीं और तीज पर्व से जुड़ी सांस्कृतिक परंपराओं, लोक रीति-रिवाजों और उत्सव की झलक देखने को मिली। मुख्यमंत्री ने आयोजन में शामिल महिलाओं को हरितालिका तीज की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह पर्व आस्था, प्रेम, समर्पण और पारिवारिक मूल्यों से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व है, जो समाज की सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करने के साथ आपसी भाईचारे को भी बढ़ावा देता है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की पहचान उसकी सांस्कृतिक विविधता से है और अलग-अलग समुदायों के त्योहार, परंपराएं तथा लोक संस्कृति राज्य की समृद्ध विरासत का हिस्सा हैं। मुख्यमंत्री के अनुसार गोर्खाली समाज ने उत्तराखंड के सामाजिक, सांस्कृतिक और विकासात्मक क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है और राज्य सरकार इस समुदाय की परंपराओं तथा सांस्कृतिक विरासत को सम्मान देने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी भावना के तहत उन्होंने घोषणा की कि हरितालिका तीज के आयोजन को अब सरकार अपने स्तर पर और अधिक भव्य स्वरूप देगी, ताकि इस पर्व से जुड़ी सांस्कृतिक परंपराओं को व्यापक मंच मिल सके और आने वाली पीढ़ियां भी अपनी विरासत से जुड़ी रहें। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने नेपाल में आई प्राकृतिक आपदा पर भी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि भारत और नेपाल के संबंध केवल पड़ोसी देशों के नहीं हैं, बल्कि दोनों देशों के बीच लंबे समय से सांस्कृतिक, सामाजिक और पारिवारिक रिश्ते रहे हैं। नेपाल में संकट की इस घड़ी में भारत पूरी तरह उसके साथ खड़ा है और हर संभव सहयोग के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री ने कहा कि दोनों देशों के लोगों के बीच सदियों पुराने संबंध हैं और किसी भी कठिन परिस्थिति में मानवीय संवेदना तथा सहयोग की भावना सबसे महत्वपूर्ण होती है। आयोजन के दौरान मसूरी विधानसभा क्षेत्र में अमर शहीद कैप्टन दल बहादुर थापा की स्मृति में शहीद द्वार का शिलान्यास भी किया गया। मुख्यमंत्री ने शहीदों के योगदान को याद करते हुए कहा कि देश की सुरक्षा और सम्मान के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाले वीरों की स्मृति को संरक्षित करना समाज और सरकार दोनों की जिम्मेदारी है। कार्यक्रम में योगगुरु आचार्य बालकृष्ण समेत अन्य लोग भी मौजूद रहे। हरितालिका तीज उत्सव के दौरान गोर्खाली समाज की महिलाओं ने पारंपरिक गीत-संगीत और सांस्कृतिक परंपराओं के माध्यम से पर्व की विशेष छटा प्रस्तुत की। कार्यक्रम स्थल पर महिलाओं की बड़ी भागीदारी रही और मुख्यमंत्री के पहुंचने पर मातृशक्ति की ओर से उनका स्वागत एवं अभिनंदन किया गया। पारंपरिक परिधानों में पहुंची महिलाओं ने उत्सव में उत्साहपूर्वक भाग लिया और पूरे आयोजन में धार्मिक आस्था के साथ-साथ गोर्खाली संस्कृति की विविधता भी दिखाई दी। मुख्यमंत्री ने महिला सशक्तीकरण के क्षेत्र में राज्य सरकार की ओर से किए जा रहे प्रयासों का भी उल्लेख किया। उन्होंने महिलाओं के लिए 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण, समान नागरिक संहिता यानी UCC लागू किए जाने और तीन लाख से अधिक महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ बनाने जैसी उपलब्धियों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सरकार महिलाओं को सामाजिक और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए विभिन्न योजनाओं पर काम कर रही है और महिला भागीदारी को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि तीज जैसे पर्व केवल धार्मिक या पारिवारिक आयोजन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनके माध्यम से समाज में सांस्कृतिक पहचान, सामाजिक एकजुटता और आपसी सहयोग की भावना भी मजबूत होती है। उत्तराखंड में विभिन्न समुदायों की सांस्कृतिक परंपराओं को सम्मान देने से राज्य की बहुरंगी सांस्कृतिक पहचान और मजबूत होती है। गोर्खाली समाज के तीज उत्सव में भी यही सामाजिक और सांस्कृतिक एकता दिखाई दी। कार्यक्रम में मौजूद महिलाओं ने मुख्यमंत्री के सामने अपनी सांस्कृतिक परंपराओं को उत्साह के साथ प्रस्तुत किया और पर्व की खुशियां साझा कीं। मुख्यमंत्री ने प्रदेश की सभी माताओं और बहनों को हरितालिका तीज की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह पर्व सभी के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लेकर आए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं को संरक्षित करने तथा उन्हें नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। सरकार की ओर से तीज उत्सव को अधिक भव्य स्तर पर आयोजित करने की घोषणा को गोर्खाली समाज की सांस्कृतिक पहचान को संस्थागत मंच देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले समय में सरकारी स्तर पर आयोजन का विस्तार होने से इस पर्व में प्रदेश के अन्य क्षेत्रों और समुदायों की भागीदारी भी बढ़ सकती है। कार्यक्रम ने जहां गोर्खाली समाज की परंपराओं और महिला शक्ति की भागीदारी को सामने रखा, वहीं नेपाल की आपदा के बीच भारत की सहयोग भावना का संदेश भी दिया। मुख्यमंत्री के संबोधन में सांस्कृतिक विरासत, महिला सशक्तीकरण और पड़ोसी देश नेपाल के साथ सामाजिक-सांस्कृतिक संबंधों को प्रमुखता मिली।




