गणेश चतुर्थी आज: गणपति स्थापना के लिए दिनभर में 5 शुभ मुहूर्त, जानें पूजा विधि, सामग्री और प्रतिमा से जुड़े नियम
14 सितंबर से गणेशोत्सव की शुरुआत होगी। गणपति स्थापना के लिए दिनभर में 5 शुभ मुहूर्त रहेंगे। घर में छोटी मिट्टी की बैठी हुई गणेश प्रतिमा और ऑफिस, दुकान या कारखाने में खड़ी गणेश प्रतिमा स्थापित करने की परंपरा मानी जाती है। जानिए स्थापना की सामग्री, पूजा विधि, मंत्र और विसर्जन की तारीख।

14 सितंबर 2026 | धर्म डेस्क
गणेश चतुर्थी के साथ 14 सितंबर से गणेशोत्सव की शुरुआत होगी। इस दिन देशभर में घरों, कार्यालयों, दुकानों और संस्थानों में भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित की जाएगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गणेशजी को विघ्नहर्ता और बुद्धि-विवेक का देवता माना जाता है।
गणेश चतुर्थी पर गणपति स्थापना के लिए दिनभर में 5 शुभ मुहूर्त बताए गए हैं। घर में पूजा के लिए मिट्टी की छोटी गणेश प्रतिमा स्थापित करने की परंपरा है। वहीं ऑफिस, दुकान और कारखानों में खड़ी गणेश प्रतिमा स्थापित करना शुभ माना जाता है।
प्रतिमा स्थापना के बाद गणेशजी की रोज सुबह-शाम पूजा की जाती है। इस दौरान दीपक, दूर्वा, फूल और भोग अर्पित करने की परंपरा है।
गणपति स्थापना के लिए 5 शुभ मुहूर्त
गणेश चतुर्थी पर गणपति स्थापना के लिए दिन में अलग-अलग शुभ समय रहेंगे। अपने शहर के स्थानीय पंचांग के अनुसार इनमें से सुविधानुसार शुभ मुहूर्त में प्रतिमा स्थापित की जा सकती है।
प्रतिमा स्थापना के समय गणेशजी का आह्वान कर विधि-विधान से पूजा करनी चाहिए।
घर के लिए कैसी गणेश प्रतिमा शुभ मानी जाती है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार घर की पूजा के लिए बैठे हुए गणेशजी की छोटी प्रतिमा रखना शुभ माना जाता है।
मिट्टी से बनी प्रतिमा को विशेष महत्व दिया जाता है। प्रतिमा बहुत बड़ी होने के बजाय ऐसी होनी चाहिए जिसे घर में आसानी से स्थापित कर नियमित पूजा की जा सके।
ऑफिस, दुकान और कारखाने में कैसी प्रतिमा रखें?
ऑफिस, दुकान या कारखाने जैसे कार्यस्थलों पर खड़े हुए गणेशजी की प्रतिमा स्थापित करने की परंपरा बताई जाती है।
मान्यता है कि इससे कार्यस्थल पर सकारात्मक वातावरण और काम में सफलता की भावना बनी रहती है।
गणपति स्थापना के लिए जरूरी सामग्री
गणेशजी की स्थापना और पूजा के लिए सामान्य तौर पर इन चीजों की जरूरत पड़ती है:
- गणेशजी की मिट्टी की प्रतिमा
- पूजा की चौकी
- लाल या पीला कपड़ा
- कलश
- रोली और कुमकुम
- अक्षत
- दूर्वा
- फूल
- दीपक और घी/तेल
- धूप और अगरबत्ती
- फल
- मोदक या अन्य मिठाई
- पंचामृत
- नारियल
- सुपारी
- पूजा के लिए जल
गणपति स्थापना की आसान पूजा विधि
सबसे पहले पूजा की जगह को साफ करें और चौकी पर कपड़ा बिछाएं। इसके बाद गणेश प्रतिमा स्थापित करें।
कलश स्थापित करने के बाद गणेशजी का आह्वान करें। भगवान को जल, अक्षत, रोली, फूल और दूर्वा अर्पित करें। इसके बाद धूप और दीपक जलाकर आरती करें।
गणेशजी को मोदक या अपनी श्रद्धा के अनुसार भोग लगाएं। पूजा के अंत में परिवार के साथ गणेशजी की आरती करें।
गणेशजी को दूर्वा क्यों चढ़ाई जाती है?
भगवान गणेश की पूजा में दूर्वा का विशेष महत्व माना गया है। पूजा के दौरान गणेशजी को दूर्वा अर्पित की जाती है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार दूर्वा गणेशजी को प्रिय है। इसलिए गणेश चतुर्थी की पूजा में इसे विशेष रूप से शामिल किया जाता है।
गणेशजी का प्रिय भोग क्या है?
गणेशजी को मोदक प्रिय माना जाता है। गणेश चतुर्थी पर भक्त भगवान को मोदक, लड्डू और अन्य मिठाइयों का भोग लगाते हैं।
भोग लगाने के बाद प्रसाद परिवार और अन्य भक्तों में बांटा जाता है।
गणेश चतुर्थी पर चंद्रमा देखने से क्यों बचते हैं?
धार्मिक ग्रंथों में गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रमा देखने से बचने का विधान बताया गया है। इसके पीछे भगवान गणेश और चंद्रदेव से जुड़ी एक पौराणिक कथा है।
मान्यता है कि इस दिन चंद्रमा देखने से व्यक्ति पर झूठे आरोप लगने का दोष लग सकता है। इसलिए गणेश चतुर्थी पर चंद्र दर्शन से बचने की परंपरा है।
गणेशोत्सव का विसर्जन कब होगा?
गणेश चतुर्थी से शुरू होने वाला गणेशोत्सव अनंत चतुर्दशी, 25 सितंबर 2026 को मुख्य गणपति विसर्जन के साथ समाप्त होगा।
हालांकि, कुछ परिवार अपनी परंपरा के अनुसार डेढ़ दिन, तीसरे, पांचवें, सातवें या अन्य निर्धारित दिन गणेश प्रतिमा का विसर्जन करते हैं।
पूजा के दौरान इन बातों का रखें ध्यान
- पूजा की जगह साफ रखें।
- गणेश प्रतिमा को सम्मानपूर्वक स्थापित करें।
- रोज सुबह-शाम दीपक जलाकर पूजा करें।
- गणेशजी को नियमित रूप से दूर्वा और फूल अर्पित करें।
- भोग लगाकर प्रसाद बांटें।
- पूजा के दौरान परिवार के सभी सदस्य श्रद्धा से शामिल हों।
- विसर्जन के समय स्थानीय प्रशासन और पर्यावरण संबंधी नियमों का पालन करें।
गणेश चतुर्थी पर पढ़ें ये मंत्र
पूजा के दौरान श्रद्धा के अनुसार गणेशजी के मंत्रों का जाप किया जा सकता है।
ॐ गं गणपतये नमः।
इसके अलावा गणेशजी की आरती और गणेश स्तुति का पाठ भी किया जाता है।
गणपति बप्पा मोरया
गणेश चतुर्थी भगवान गणेश की आराधना, परिवार के साथ पूजा और शुभ कार्यों की शुरुआत का पर्व है। भक्त इस दौरान गणेशजी से सुख, समृद्धि, बुद्धि और विघ्नों को दूर करने की प्रार्थना करते हैं।



