फिजिकल हेल्थ- कमर में दर्द को इग्नोर न करें: हो सकता है एंकिलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस, डॉक्टर से जानें लक्षण और बचाव के तरीके
लगातार कमर दर्द और सुबह की अकड़न को न करें नजरअंदाज; जानें एंकिलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस के लक्षण, रिस्क फैक्टर्स, इलाज और एक्सरसाइज

कमर दर्द आजकल बेहद आम समस्या है। कई लोग इसे थकान, गलत पोस्चर, लंबे समय तक बैठने या उम्र बढ़ने का असर मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन अगर कमर का दर्द बार-बार हो रहा है और कई महीनों से बना हुआ है, तो यह एंकिलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस (AS) का संकेत भी हो सकता है।
एंकिलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस एक क्रॉनिक इंफ्लेमेटरी बीमारी है, जिसमें रीढ़ और जोड़ों में लंबे समय तक सूजन बनी रहती है। इससे दर्द और अकड़न की समस्या होती है। समय के साथ कुछ मरीजों में रीढ़ की हड्डियां आपस में जुड़ सकती हैं, जिससे स्पाइन का लचीलापन कम हो सकता है।
हेल्थकेयर डेटा और एनालिटिक्स फर्म ग्लोबल डेटा के अनुसार, भारत में एंकिलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस के करीब 16.5 लाख मरीज हैं। यह संख्या हर साल लगभग 2.95% की दर से बढ़ रही है। जागरूकता की कमी के कारण कई मरीजों में समय पर बीमारी की पहचान नहीं हो पाती।
इसीलिए आज ‘फिजिकल हेल्थ’ में जानेंगे कि एंकिलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस क्या है, इसके लक्षण सामान्य कमर दर्द से कैसे अलग हैं और इसका इलाज किस तरह किया जाता है।
एक्सपर्ट: डॉ. हेमंत बंसल, सीनियर कंसल्टेंट, ऑर्थोपेडिक्स एंड जॉइंट रिप्लेसमेंट, नारायणा हॉस्पिटल, गुरुग्राम
सवाल- एंकिलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस क्या है? क्या यह एक तरह का अर्थराइटिस है?
जवाब: हां, एंकिलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस एक तरह का इंफ्लेमेटरी अर्थराइटिस है। इसे एक्सियल स्पॉन्डायलोआर्थराइटिस (Axial Spondyloarthritis) भी कहा जाता है।
यह मुख्य रूप से:
- रीढ़ यानी स्पाइन को प्रभावित करता है।
- स्पाइन और पेल्विस को जोड़ने वाले सैक्रोइलिएक जॉइंट्स को प्रभावित करता है।
- जोड़ों और आसपास के टिश्यूज में सूजन, दर्द और अकड़न पैदा करता है।
- कुछ मरीजों में समय के साथ रीढ़ की हड्डियां आपस में जुड़ सकती हैं।
- इससे स्पाइन का लचीलापन कम हो सकता है और चलने-फिरने में परेशानी हो सकती है।
सवाल- एंकिलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस क्यों होता है?
जवाब: एंकिलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस होने की सटीक वजह पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार, इसमें इम्यून सिस्टम शरीर के ही जोड़ों और रीढ़ पर हमला करने लगता है।
कुछ जीन, खासकर HLA-B27, इस बीमारी का जोखिम बढ़ा सकते हैं। जिन लोगों के परिवार में यह बीमारी रही है, उनमें इसका खतरा अपेक्षाकृत ज्यादा हो सकता है।
सवाल- इसके प्रमुख लक्षण क्या हैं?
जवाब: एंकिलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस का सबसे सामान्य लक्षण कमर के निचले हिस्से और कूल्हों में लगातार दर्द और अकड़न है।
यह परेशानी खासतौर पर:
- सुबह उठने पर ज्यादा महसूस हो सकती है।
- लंबे समय तक बैठने के बाद बढ़ सकती है।
- लगातार बनी रह सकती है।
- समय के साथ स्पाइन की मूवमेंट को प्रभावित कर सकती है।
इसके अन्य लक्षणों को ग्राफिक में समझें।
सवाल- सामान्य कमर दर्द और एंकिलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस में क्या अंतर है?
जवाब: दोनों में कमर दर्द हो सकता है, लेकिन एंकिलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस का दर्द सामान्य कमर दर्द से अलग पैटर्न का हो सकता है।
अगर कमर दर्द लंबे समय तक बना रहता है, बार-बार लौटता है या इसके साथ सुबह के समय ज्यादा अकड़न रहती है, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
सवाल- एंकिलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस के रिस्क फैक्टर्स क्या हैं?
जवाब: यह बीमारी किसी को भी हो सकती है, लेकिन कुछ लोगों में इसका जोखिम ज्यादा हो सकता है।
यह बीमारी अक्सर किशोरावस्था के आखिर या 20-30 साल की उम्र में शुरू होती है। परिवार में बीमारी का इतिहास और कुछ आनुवंशिक कारक भी जोखिम बढ़ा सकते हैं।
सवाल- इलाज न कराने पर क्या complications हो सकते हैं?
जवाब: अगर बीमारी का समय पर इलाज न हो तो कई तरह की समस्याएं हो सकती हैं।
रीढ़ की हड्डियों में बदलाव
लगातार सूजन के कारण कुछ मरीजों में रीढ़ की हड्डियां आपस में जुड़ सकती हैं। इससे पीठ की लचक कम हो सकती है और चलने-फिरने में परेशानी हो सकती है।
अन्य जोड़ों पर असर
सूजन कूल्हों, कंधों और शरीर के दूसरे जोड़ों तक भी फैल सकती है।
आंखों में सूजन
कुछ मरीजों में आंखों में सूजन यानी यूवाइटिस की समस्या हो सकती है।
अन्य संभावित समस्याएं
एंकिलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस से कुछ मामलों में:
- सांस लेने में परेशानी
- रीढ़ की हड्डी में फ्रैक्चर
- हार्ट डिजीज
- हार्ट वाल्व से जुड़ी समस्याएं
- फेफड़ों से जुड़ी समस्याएं
- आंतों पर असर
जैसी जटिलताएं भी हो सकती हैं।
सवाल- एंकिलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस का डायग्नोसिस कैसे होता है?
जवाब: डॉक्टर बीमारी की पहचान के लिए मरीज के लक्षणों और मेडिकल हिस्ट्री को समझते हैं। इसके बाद फिजिकल टेस्ट किए जा सकते हैं।
जरूरत के अनुसार:
- रीढ़ और सैक्रोइलिएक जॉइंट्स का एक्स-रे
- MRI
- सूजन का स्तर पता करने के लिए ब्लड टेस्ट
- HLA-B27 की जांच
कराई जा सकती है।
इन सभी जांचों और लक्षणों के आधार पर डॉक्टर बीमारी की पुष्टि करते हैं।
सवाल- इसका इलाज कैसे किया जाता है?
जवाब: इलाज का मुख्य उद्देश्य दर्द और सूजन को नियंत्रित करना तथा स्पाइन की मूवमेंट को बनाए रखना होता है।
डॉक्टर जरूरत के अनुसार दर्द और सूजन को नियंत्रित करने वाली दवाएं दे सकते हैं। इसके साथ फिजियोथेरेपी, नियमित स्ट्रेचिंग और एक्सरसाइज भी इलाज का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
नियमित इलाज और डॉक्टर के फॉलो-अप से ज्यादातर मरीज सामान्य जीवन जी सकते हैं।
सवाल- क्या एक्सरसाइज फायदेमंद है?
जवाब: हां। सही तरीके से की गई एक्सरसाइज दर्द और अकड़न कम करने, रीढ़ की लचक बनाए रखने, शरीर की मूवमेंट बेहतर करने और पोस्चर सुधारने में मदद कर सकती है।
इन एक्सरसाइज को शामिल किया जा सकता है:
- स्ट्रेचिंग
- वॉकिंग
- स्विमिंग
- पोस्चर सुधारने वाली एक्सरसाइज
- ब्रीदिंग एक्सरसाइज
ध्यान रखें: किसी भी नई एक्सरसाइज की शुरुआत डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट की सलाह से करें।
सवाल- एंकिलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस से कैसे बचें?
जवाब: फिलहाल एंकिलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस को पूरी तरह रोकने का कोई तरीका नहीं है, क्योंकि इसके सटीक कारण स्पष्ट नहीं हैं।
हालांकि, समय पर बीमारी की पहचान और सही इलाज से इसके बढ़ने और लक्षणों को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।
नियमित डॉक्टर फॉलो-अप, उचित एक्सरसाइज और लाइफस्टाइल में सुधार बीमारी के मैनेजमेंट में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?
अगर कमर दर्द लंबे समय तक बना रहता है, बार-बार होता है या सुबह और लंबे समय तक आराम के बाद ज्यादा अकड़न महसूस होती है, तो इसे सामान्य दर्द मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
ऐसे लक्षण होने पर डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है, ताकि जरूरत पड़ने पर बीमारी की पहचान और इलाज समय पर शुरू किया जा सके।
जरूरी बात
एंकिलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस एक लंबे समय तक चलने वाली इंफ्लेमेटरी बीमारी है। कमर में लगातार दर्द और अकड़न इसके प्रमुख संकेत हो सकते हैं। समय पर पहचान और सही इलाज से दर्द व जकड़न को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है।
ग्राफिक्स: विपुल शर्मा




