संजय निषाद का अखिलेश यादव पर पलटवार: बोले- सपा पहले अपना वजूद बचाए, निषाद पार्टी को किसी की बैसाखी की जरूरत नहीं
निषाद पार्टी अध्यक्ष ने कहा- हमारी पार्टी को किसी की बैसाखी की जरूरत नहीं; भाजपा गठबंधन, 2027 चुनाव और सीट बंटवारे को लेकर भी बोले

निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री डॉ. संजय निषाद ने बुधवार को समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव पर पलटवार किया। उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए कहा कि सपा को निषाद पार्टी के राजनीतिक भविष्य पर टिप्पणी करने के बजाय पहले अपने संगठन और गठबंधन की स्थिति पर ध्यान देना चाहिए।
संजय निषाद ने कहा कि निषाद पार्टी को किसी राजनीतिक दल की “बैसाखी” की जरूरत नहीं है। उन्होंने दावा किया कि उनकी पार्टी अपने राजनीतिक आधार और समाज की हिस्सेदारी के मुद्दे पर आगे बढ़ रही है।
अखिलेश यादव के बयान के बाद आया पलटवार
अखिलेश यादव ने 11 सितंबर को गोंडा में निषाद समाज से जुड़े विनोद साहनी की हत्या के मामले को लेकर संजय निषाद के धरने पर टिप्पणी की थी। अखिलेश ने कहा था कि सरकार के सहयोगी मंत्री को धरने पर बैठने के बजाय सरकार पर दबाव बनाना चाहिए।
अखिलेश ने सोशल मीडिया पोस्ट में यह भी लिखा था कि भाजपा में निषाद समाज को “विषाद” के अलावा कुछ नहीं मिलेगा।
इसी के जवाब में संजय निषाद ने कहा कि NDA में निषाद पार्टी का गठबंधन बराबरी और हिस्सेदारी के आधार पर है। उन्होंने कहा कि निषाद समाज अपने राजनीतिक अधिकार और सम्मान के साथ समझौता नहीं करेगा।
‘सपा पहले अपना वजूद बचाए’
संजय निषाद ने सपा नेताओं को लेकर कहा कि उनकी पार्टी के भविष्य की चिंता करने के बजाय समाजवादी पार्टी को पहले अपने राजनीतिक अस्तित्व और कांग्रेस के साथ सीटों के बंटवारे पर ध्यान देना चाहिए।
उन्होंने दावा किया कि सपा के भीतर भी राजनीतिक चुनौतियां हैं। हालांकि, ये संजय निषाद द्वारा किए गए राजनीतिक दावे हैं।
उन्होंने कहा कि सवाल यह नहीं है कि संजय निषाद कहां जाएंगे, बल्कि यह है कि सपा के वरिष्ठ नेता शिवपाल यादव और रामगोपाल यादव का राजनीतिक भविष्य क्या होगा।
कसरवल कांड का भी किया जिक्र
संजय निषाद ने अपने बयान में कसरवल कांड का जिक्र करते हुए सपा पर निषाद समाज के आंदोलनकारियों के खिलाफ कार्रवाई का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि निषाद समाज अपने पुराने आंदोलनों और उनमें हुई घटनाओं को नहीं भूला है। संजय निषाद ने निषाद समाज की राजनीतिक हिस्सेदारी और सम्मान को अपनी पार्टी की राजनीति का प्रमुख मुद्दा बताया।
गोंडा हत्याकांड के बाद संजय निषाद का धरना
गोंडा में निषाद समाज के युवक विनोद साहनी की हत्या के बाद संजय निषाद अपनी ही सरकार के खिलाफ धरने पर बैठे थे। उन्होंने मामले में कार्रवाई और दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की मांग की थी।
इसी दौरान उन्होंने VIP पार्टी के प्रमुख मुकेश सहनी पर भी टिप्पणी की थी।
इसके बाद संजय निषाद की समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय से मुलाकात हुई। संजय निषाद ने इस मुलाकात को सौजन्य भेंट बताया था। हालांकि, मुलाकात के बाद उनके भाजपा से अलग होने की संभावनाओं को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हुईं।
भाजपा से गठबंधन को लेकर क्या कहा था?
हालिया चर्चाओं के बीच संजय निषाद ने कहा था कि यदि भाजपा उनके लिए “दरवाजा बंद” करती है तो वे आगे के विकल्पों पर विचार करेंगे।
इस बयान के बाद 2027 विधानसभा चुनाव में भाजपा और निषाद पार्टी के बीच गठबंधन तथा सीटों के बंटवारे को लेकर चर्चा बढ़ी है। फिलहाल निषाद पार्टी की ओर से भाजपा से गठबंधन खत्म करने की कोई औपचारिक घोषणा सामने नहीं आई है।
आशीष पटेल से मुलाकात के बाद भी चर्चा
मंगलवार को उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री और अपना दल (एस) के नेता आशीष पटेल ने भी संजय निषाद से मुलाकात की थी। आशीष पटेल स्वयं संजय निषाद के सरकारी आवास पर पहुंचे थे।
दोनों नेताओं की मुलाकात के बाद राजनीतिक चर्चाएं तेज हुईं। इसे 2027 विधानसभा चुनाव से पहले NDA के सहयोगी दलों की सक्रियता से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में दोनों नेताओं की बातचीत में सीट बंटवारे या किसी राजनीतिक रणनीति पर चर्चा की आधिकारिक पुष्टि नहीं है।
2027 चुनाव से पहले सहयोगी दलों की सक्रियता
उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले NDA के सहयोगी दल अपनी राजनीतिक हिस्सेदारी और संगठनात्मक आधार को लेकर सक्रिय नजर आ रहे हैं।
निषाद पार्टी निषाद समाज की राजनीतिक हिस्सेदारी और अपने संगठन के विस्तार को प्रमुख मुद्दा बना रही है। वहीं अपना दल (एस) भी अपने राजनीतिक आधार और हिस्सेदारी को लेकर सक्रिय है।
ऐसे में संजय निषाद के हालिया बयान, विपक्षी नेताओं से मुलाकात और NDA के अन्य सहयोगी नेताओं के साथ बैठकें चुनाव से पहले गठबंधन की राजनीति के संदर्भ में महत्वपूर्ण घटनाक्रम बन गई हैं। हालांकि, आगामी चुनाव के लिए सीट बंटवारे और गठबंधन की अंतिम तस्वीर अभी स्पष्ट नहीं है।
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