झीरम घाटी कांड: 10 दोषियों की फांसी पर हाईकोर्ट में डेथ रेफरेंस
NIA कोर्ट के फैसले की अब डिवीजन बेंच करेगी न्यायिक समीक्षा; 2013 के हमले में 27 लोगों की मौत और 38 घायल हुए थे

बिलासपुर। 2013 के बहुचर्चित झीरम घाटी नक्सली हमले में 10 दोषियों को सुनाई गई मौत की सजा अब हाईकोर्ट की न्यायिक समीक्षा के दायरे में आ गई है। जगदलपुर की विशेष NIA अदालत ने मौत की सजा की पुष्टि के लिए मामला छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट भेजा है। हाईकोर्ट में इसे डेथ रेफरेंस के रूप में दर्ज किया गया है। अब डिवीजन बेंच ट्रायल कोर्ट के फैसले, साक्ष्यों और दोषसिद्धि के आधार की समीक्षा करेगी।
13 साल पुराने मामले में 10 दोषी
25 मई 2013 को बस्तर की झीरम घाटी में कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के काफिले पर माओवादी हमला हुआ था। इस हमले में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं समेत कम से कम 27 लोगों की मौत हुई थी और 38 लोग घायल हुए थे।
मामले की जांच NIA ने संभाली थी। विशेष NIA अदालत ने 5 सितंबर 2026 को 10 आरोपियों को दोषी करार दिया और 16 सितंबर को सभी को मौत की सजा सुनाई। ट्रायल के दौरान 101 गवाहों के बयान दर्ज किए गए।
मौत की सजा की हाईकोर्ट से पुष्टि जरूरी
मौत की सजा वाले मामलों में ट्रायल कोर्ट के फैसले की हाईकोर्ट द्वारा पुष्टि की जाती है। इसलिए विशेष NIA अदालत से सजा सुनाए जाने के बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचना न्यायिक प्रक्रिया का अगला चरण है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक दोषियों को हाईकोर्ट में चुनौती देने के लिए 30 दिन का समय भी दिया गया है।
हाईकोर्ट किन पहलुओं की समीक्षा करेगा?
डेथ रेफरेंस की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के सामने ट्रायल कोर्ट का पूरा रिकॉर्ड रखा जाएगा। इसमें गवाहों के बयान, दस्तावेजी और अन्य साक्ष्य तथा दोषसिद्धि और सजा के लिए दिए गए न्यायालय के कारण शामिल होंगे।
हाईकोर्ट मौत की सजा की पुष्टि करने के अलावा कानून के अनुसार सजा में बदलाव या दोषसिद्धि से संबंधित अन्य आदेश भी दे सकता है। इसलिए फिलहाल 10 दोषियों को मिली मौत की सजा अंतिम न्यायिक निर्णय नहीं मानी जा सकती।
10 दोषियों को सुनाई गई है मौत की सजा
विशेष NIA अदालत ने प्रमिला मोडियम, चैतू लेकाम उर्फ मुन्ना, सुमिता उर्फ पुनेम मोडियम, मुक्का मंडावी, कोसा कवासी उर्फ कोसराम, आयता मरकाम, मड़कम देवा, जोगा मड़कम, बंजामी सन्ना उर्फ चमरा और महादेव नाग को दोषी ठहराया था। इन सभी को मौत की सजा दी गई है।
मामले में 11 आरोपियों के खिलाफ ट्रायल चला था, जिनमें से एक की सुनवाई के दौरान मौत हो गई। NIA की चार्जशीट में नामजद अन्य आरोपी अब भी अलग-अलग स्थिति में वांछित बताए गए हैं।
अब आगे क्या होगा?
हाईकोर्ट में डेथ रेफरेंस और दोषियों की ओर से दायर होने वाली अपीलों पर सुनवाई हो सकती है। इसके बाद हाईकोर्ट यह तय करेगा कि ट्रायल कोर्ट की दोषसिद्धि और मौत की सजा को किस रूप में बरकरार रखा जाए या उसमें बदलाव किया जाए।
इस तरह झीरम घाटी मामले में 10 दोषियों को मिली मौत की सजा पर अब अंतिम न्यायिक निर्णय हाईकोर्ट की कार्यवाही के बाद ही सामने आएगा।




