राहुल गांधी का छत्तीसगढ़ चुनाव को लेकर ‘वोट चोरी’ का आरोप
चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और CEC की नियुक्ति पर सवाल; 2023 के चुनाव में BJP को 54 और कांग्रेस को 35 सीटें मिली थीं

रायपुर। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार को चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति को लेकर सवाल उठाए। दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में करीब 55 मिनट की प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों के चुनावों में कथित ‘वोट चोरी’ का आरोप लगाया। ये आरोप राहुल गांधी और कांग्रेस की ओर से लगाए गए हैं।
छत्तीसगढ़ चुनाव का भी किया जिक्र
राहुल गांधी ने दावा किया कि उनके तकनीकी विशेषज्ञों ने छत्तीसगढ़ के चुनाव में चुनाव आयोग से जुड़ी कथित गड़बड़ी पकड़ी है। उन्होंने कहा कि 2024 के लोकसभा चुनाव और उसके बाद हुए विधानसभा चुनावों में चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित किए जाने के सवाल उठते हैं।
उन्होंने छत्तीसगढ़ के साथ हरियाणा, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और गुजरात का भी जिक्र किया। राहुल गांधी ने चुनाव आयोग को कार्यपालिका के प्रभाव से स्वतंत्र रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।
2023 में BJP ने 54 सीटें जीती थीं
निर्वाचन आयोग के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 2023 के छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में 90 सीटों में BJP ने 54 सीटें और कांग्रेस ने 35 सीटें जीती थीं। BJP को वैध मतों का करीब 46.87% और कांग्रेस को करीब 42.77% वोट मिले थे।
चुनाव आयोग के रिकॉर्ड के मुताबिक मतदान दो चरणों में 7 और 17 नवंबर 2023 को हुआ था और मतगणना 3 दिसंबर को हुई थी।
SIR और मतदाता सूची पर भी सवाल
राहुल गांधी ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि विपक्षी दल इस मुद्दे पर एकजुट हैं और मतदाता सूची से जुड़े मामलों की जांच की आवश्यकता है।
उन्होंने युवा मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में जोड़ने में कथित दिक्कतों का भी मुद्दा उठाया। उनका कहना था कि चुनावी व्यवस्था से जुड़े सवालों का समाधान और जांच जरूरी है।
चुनाव आयोग पर लगाए गंभीर आरोप
राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति का विरोध करने का दावा किया और आरोप लगाया कि सरकार ने उन्हें कानून से ऊपर रखा। उन्होंने चुनाव आयोग की स्वतंत्रता को लेकर भी सवाल उठाए।
राहुल गांधी ने अपने संबोधन में कथित ‘वोट चोरी’ को आगे चलकर ‘कानून चोरी’ और ‘संस्था चोरी’ से जोड़ते हुए चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग की। इन बयानों को फिलहाल राहुल गांधी के राजनीतिक आरोपों के रूप में देखा जाना चाहिए; उपलब्ध आधिकारिक चुनाव परिणाम स्वयं किसी ‘वोट चोरी’ के निष्कर्ष की पुष्टि नहीं करते।




