रांची

IIT (ISM) धनबाद की नई खोज: सांस के सैंपल से कैंसर की शुरुआती पहचान का दावा

प्रो. संजय मंडल और उनकी पीएचडी टीम ने विकसित किया ब्रीथ एनालिसिस डिवाइस, भारत सरकार से मिला पेटेंट

धनबाद। आईआईटी (आईएसएम) धनबाद के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. संजय मंडल और उनके पीएचडी छात्र ने सांस के सैंपल के विश्लेषण से कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के शुरुआती संकेतों की पहचान करने वाला एक उपकरण विकसित किया है। इस तकनीक को ‘ब्रीथ एनालिसिस डिवाइस फॉर हेल्थ असेसमेंट’ नाम दिया गया है। संस्थान के अनुसार, इस उपकरण को भारत सरकार की ओर से पेटेंट भी प्रदान किया गया है।

इस तकनीक में व्यक्ति की सुबह की सांस का सैंपल लेकर उसमें मौजूद विशेष जैविक घटकों का विश्लेषण किया जाता है। इसका उद्देश्य कैंसर और अन्य गंभीर बीमारियों के शुरुआती संकेतों की पहचान करना है। इस उपकरण के विकास से भविष्य में बीमारी की शुरुआती जांच के नए विकल्प सामने आने की संभावना है।

शुरुआती अवस्था में बीमारी की पहचान पर जोर

प्रो. संजय मंडल के अनुसार, फेफड़ों के कैंसर और शरीर के आंतरिक अंगों से जुड़ी कई गंभीर बीमारियों की शुरुआती अवस्था में पहचान करना चुनौतीपूर्ण होता है। इस दौरान सामान्य जांचों में बीमारी के संकेत स्पष्ट नहीं हो पाते।

उन्होंने बताया कि इस उपकरण को इसी चुनौती को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है। सांस में मौजूद विशेष जैविक घटकों के विश्लेषण के माध्यम से बीमारी के संभावित संकेतों की पहचान करने की दिशा में यह तकनीक काम करती है।

कैसे काम करता है ब्रीथ एनालिसिस डिवाइस?

प्रो. मंडल के मुताबिक, यह उपकरण सांस में मौजूद विशेष ऑर्गेनिक कंपोनेंट्स की पहचान पर आधारित है। शरीर में कैंसर कोशिकाओं की असामान्य वृद्धि या अन्य गंभीर बीमारियों के दौरान कुछ जैविक घटक उत्पन्न हो सकते हैं, जो सांस के जरिए बाहर निकलते हैं।

उपकरण इन्हीं घटकों के विश्लेषण के लिए विकसित किया गया है। इसमें सांस के सैंपल पर विशेष इलेक्ट्रिकल डिस्चार्ज तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है। इसके बाद प्राप्त स्पेक्ट्रम का विश्लेषण कर बीमारी से जुड़े संभावित संकेतों का पता लगाने का प्रयास किया जाता है।

सुबह की पहली सांस का लिया जाता है सैंपल

प्रो. संजय मंडल ने बताया कि सटीक विश्लेषण के उद्देश्य से उपकरण में सुबह की पहली सांस का सैंपल लेने की व्यवस्था की गई है। सैंपल पर विशेष वोल्टेज के जरिए इलेक्ट्रिकल डिस्चार्ज किया जाता है। इसके बाद प्राप्त स्पेक्ट्रम का बारीकी से विश्लेषण किया जाता है।

इस विश्लेषण के आधार पर उपकरण बीमारी से जुड़े संभावित संकेतों की पहचान करने के लिए तैयार किया गया है। हालांकि, इस तकनीक की वास्तविक चिकित्सकीय उपयोगिता और कैंसर की पहचान में इसकी सटीकता स्थापित करने के लिए विस्तृत परीक्षण और चिकित्सकीय सत्यापन महत्वपूर्ण होंगे।

कैंसर की जांच में नई तकनीक की संभावना

सांस के जरिए बीमारी के संकेतों का विश्लेषण करने वाली यह तकनीक भविष्य में शुरुआती जांच के क्षेत्र में उपयोगी साबित हो सकती है। पेटेंट मिलने से इसके विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है।

हालांकि, पेटेंट मिलना किसी उपकरण की चिकित्सकीय सटीकता या व्यापक उपयोग के लिए मंजूरी का प्रमाण नहीं है। फिलहाल सीटी स्कैन, बायोप्सी और अन्य चिकित्सकीय जांचों का विकल्प मानने से पहले इस उपकरण की प्रमाणित जांच और चिकित्सकीय मान्यता जरूरी है।

 

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