JPSC भर्ती घोटाले में बड़ा खुलासा, TDPL निदेशक ने ख्यांग्ते और गुप्ता को दी थी गड़बड़ी की जानकारी
धर्मेंद्र कुमार पर 10-12 अभ्यर्थियों के अवैध चयन और पेपर लीक का दबाव बनाने का आरोप, CID पूछताछ में सामने आई अहम जानकारी

झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच कर रही CID को गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में कई अहम जानकारियां मिली हैं। परीक्षा संचालित करने वाली एजेंसी TDPL के निदेशक रामवीर सिंह ने रिमांड पूछताछ के दौरान जांच अधिकारियों को बताया कि तत्कालीन JPSC अध्यक्ष एल. ख्यांग्ते की गोपनीय शाखा में कंप्यूटर ऑपरेटर के पद पर तैनात धर्मेंद्र कुमार ने उन पर करीब 10 से 12 अभ्यर्थियों का FRO और PCF में कथित तौर पर अवैध चयन कराने तथा प्रश्नपत्र लीक करने का दबाव बनाया था। रामवीर सिंह के अनुसार उन्होंने धर्मेंद्र कुमार के कहने पर किसी भी तरह की गड़बड़ी करने से इनकार कर दिया था और स्पष्ट कर दिया था कि परीक्षा से जुड़ा हर काम आयोग के नियमों और दायरे के भीतर ही किया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि धर्मेंद्र की ओर से दबाव बनाए जाने की जानकारी उन्होंने तत्कालीन JPSC अध्यक्ष एल. ख्यांग्ते और उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता को भी दे दी थी। इसके बावजूद धर्मेंद्र कुमार कथित तौर पर लगातार उन पर कुछ अभ्यर्थियों को गलत तरीके से पास कराने का दबाव बनाता रहा। दूसरी ओर, जेएसएससी CGL परीक्षा में कथित गड़बड़ी की जांच भी CID ने तेज कर दी है। परीक्षा से जुड़े प्रश्नपत्रों की छपाई का काम करने वाली एजेंसी ICN के दो कर्मचारियों सोमांश प्रकाश और राहुल कुमार से पांच दिन की रिमांड पूछताछ पूरी हो चुकी है। दोनों आरोपियों को दिल्ली से गिरफ्तार किया गया था और पूछताछ के दौरान प्रश्नपत्र की छपाई, उसके रखरखाव तथा कथित सिंडिकेट से जुड़े कई महत्वपूर्ण इनपुट मिलने की बात सामने आई है। इन दोनों से मिली जानकारी के आधार पर जांच एजेंसी ने एजेंसी से जुड़े अहम व्यक्ति मिथिलेश सिंह की तलाश तेज कर दी है। जांच अधिकारियों को आशंका है कि मिथिलेश सिंह की गिरफ्तारी और उससे आमने-सामने पूछताछ के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि प्रश्नपत्र कथित तौर पर प्रिंटिंग प्रेस से बाहर कैसे निकला और इसे बाहर पहुंचाने में किन लोगों की भूमिका थी। JPSC और JSSC परीक्षाओं से जुड़ी इन कथित अनियमितताओं ने परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता और अभ्यर्थियों के चयन को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। CID अब पूछताछ में सामने आए बयानों, दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों को जोड़कर कथित गड़बड़ी के पूरे नेटवर्क तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।




