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इस खबर का आसान और साफ सार यह है:

पानीपत में साइबर फ्रॉड की जांच के दौरान बैंकों के खाते फ्रीज किए जाने की कार्रवाई को लेकर व्यापारियों में भारी नाराज़गी है।

क्या मामला है:

  • साइबर सेल जांच के दौरान कई व्यापारियों और आम लोगों के बैंक खाते फ्रीज/होल्ड कर दिए गए हैं।
  • वजह यह है कि साइबर फ्रॉड का पैसा कई खातों में “लेयरिंग” के जरिए घूमता है।
  • इसी चेन में जिन खातों में पैसा पहुंचा, उन्हें भी जांच के तहत रोक दिया गया।

समस्या क्या बताई जा रही है:

  • कई लोगों के खातों में सिर्फ छोटी रकम (1000–5000 रुपये) आई थी, लेकिन
    उनके पूरे खातों में मौजूद लाखों-करोड़ों रुपये भी फ्रीज हो गए।
  • इससे व्यापार पूरी तरह ठप हो रहा है—न भुगतान हो पा रहा है, न लेन-देन।

CA जगदीश धमीजा की दलील:

  • उन्होंने गृह मंत्रालय को शिकायत दी है।
  • उनका कहना है कि:
    • सिर्फ संदिग्ध रकम को ही फ्रीज किया जाए, पूरा खाता नहीं
    • कई लोग अनजाने में लेन-देन में आ जाते हैं, वे अपराधी नहीं होते
    • पूरे खाते को रोकना व्यापार और अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा रहा है

मांग क्या है:

  • गृह मंत्रालय से तुरंत निर्देश जारी किए जाएं कि
    👉 केवल विवादित/संदिग्ध रकम पर रोक लगे
    👉 पूरे बैंक खाते को फ्रीज न किया जाए

कुल मिलाकर:

यह मामला साइबर फ्रॉड जांच बनाम व्यापारिक परेशानी का है, जहां जांच एजेंसियों की सख्ती और व्यापारियों की दिक्कतों के बीच संतुलन की मांग उठ रही है।

अगर चाहें तो मैं आपको आसान भाषा में यह भी समझा सकता हूँ कि “लेयरिंग” और “खाता फ्रीज सिस्टम” असल में कैसे काम करता है।

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