1971 के युद्ध के जांबाज मिग-21 को मिलेगी नई पहचान, बीकानेर के पब्लिक पार्क में बनेगा वार ट्रॉफी
नाल एयरबेस से 1971 में पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध में उड़ान भरने वाले मिग-21 को सार्वजनिक स्थल पर स्थापित करने की तैयारी, युवाओं और विद्यार्थियों को सुनाई जाएगी इसके शौर्य की कहानी।

बीकानेर में भारतीय वायुसेना से रिटायर हो चुके ऐतिहासिक मिग-21 लड़ाकू विमान को अब वार ट्रॉफी के रूप में पब्लिक पार्क में स्थापित करने की योजना है। 1971 के भारत-पाक युद्ध में दुश्मन के ठिकानों पर प्रहार करने वाले इस लड़ाकू विमान को देखकर नई पीढ़ी भारतीय वायुसेना के शौर्य और इतिहास से रूबरू हो सकेगी। राज्य के अर्बन डेवलपमेंट एंड हाउसिंग डिपार्टमेंट ने बीकानेर डेवलपमेंट अथॉरिटी से विमान स्थापित करने के लिए दो संभावित स्थानों के प्रस्ताव मांगे हैं, जिनमें पब्लिक पार्क स्थित गोमुख पार्क को प्राथमिकता दी जा रही है। यह जगह पूरे दिन लोगों की आवाजाही वाला क्षेत्र है और इसके पास टॉय ट्रेन पार्क भी है, जहां बड़ी संख्या में बच्चे आते हैं। गोमुख पार्क के सामने पहले से ही पाकिस्तान से जीता गया बैटल टैंक भी प्रदर्शित है, जिससे मिग-21 की स्थापना के बाद यह स्थान सैन्य शौर्य और इतिहास का प्रमुख आकर्षण बन सकता है। दूसरा संभावित स्थान वरिष्ठ नागरिक भ्रमण पथ बताया गया है, जहां सुबह-शाम लोग बड़ी संख्या में आते हैं और शहीद मेजर पूर्ण सिंह तथा शहीद कैप्टन चंद्र चौधरी के स्मारक भी मौजूद हैं। हालांकि वहां पहले से एक ट्रेनी विमान वार ट्रॉफी के रूप में स्थापित है, इसलिए गोमुख पार्क को प्राथमिकता दिए जाने की संभावना है। रिटायर्ड कर्नल हेम सिंह शेखावत ने इस योजना को युवाओं और विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायक बताते हुए कहा कि इससे लोग मिग-21 की शौर्य गाथा जान सकेंगे और सेना में करियर बनाने के लिए प्रेरित हो सकते हैं। वहीं श्रीडूंगरगढ़ तहसील के बिग्गाबास रामसरा में भी मिग-21 बाइसन को शहीद कैप्टन चंद्र चौधरी के स्मारक के पास स्थापित करने की तैयारी है और उसकी एसेंबलिंग पूरी होने की बात कही गई है। बीकानेर के नाल एयरबेस से मिग-21 का ऐतिहासिक रिश्ता रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 1971 के भारत-पाक युद्ध के दौरान इसी एयरबेस से मिग-21 ने उड़ान भरकर दुश्मन के ठिकानों के खिलाफ कार्रवाई की थी। यही नहीं, भारतीय वायुसेना में दशकों की सेवा के बाद मिग-21 बाइसन की ऐतिहासिक अंतिम उड़ान भी नाल एयरबेस से हुई थी। अब इसी गौरवशाली विमान को सार्वजनिक स्थल पर स्थापित कर नई पीढ़ी को उसके सैन्य इतिहास और शौर्य से जोड़ने की तैयारी की जा रही है।




