IIT दिल्ली में मोदी बोले- सिर्फ सवाल मत पूछिए, समाधान भी खोजिए: ‘अगले 35 साल आपका काम विकसित भारत का आधार बनेगा’
‘अगले 35 साल आपका काम विकसित भारत का आधार बनेगा’
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को IIT दिल्ली के 57वें दीक्षांत समारोह में छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि आने वाले 35 वर्षों में युवा जो काम करेंगे, वही विकसित भारत की नींव को मजबूत करेगा।
पीएम मोदी ने छात्रों से कहा कि समस्याओं की पहचान करना जरूरी है, लेकिन केवल सवाल पूछना पर्याप्त नहीं है। युवाओं को उन समस्याओं के समाधान भी खोजने चाहिए। उन्होंने IIT के पूर्व छात्रों का उदाहरण देते हुए कहा कि कई लोगों ने ऐसी समस्याओं पर काम किया, जिन पर पहले किसी का ध्यान नहीं गया था।
‘अगले 35 साल आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण’
प्रधानमंत्री ने कहा कि हर पीढ़ी की अपनी चुनौतियां और जिम्मेदारियां होती हैं। आज की पीढ़ी के सामने आने वाला समय बेहद महत्वपूर्ण है।
उन्होंने छात्रों से कहा कि वे इस बात पर विचार करें कि अगले 35 वर्षों में उनका काम देश की कौन-सी जरूरत पूरी करेगा और विकसित भारत के निर्माण में उनका योगदान क्या होगा।
‘मैं बाबा बागेश्वर नहीं हूं’
प्रधानमंत्री ने छात्रों से संवाद के दौरान हल्के-फुल्के अंदाज में कहा, “मैं बाबा बागेश्वर नहीं हूं, लेकिन कुछ तो आपके मन में चलता होगा।” पीएम की इस बात पर समारोह में मौजूद लोगों के बीच हंसी का माहौल बन गया।
उन्होंने कहा कि हर छात्र भविष्य को लेकर कोई न कोई सपना देख रहा होगा। कोई पहली सैलरी का इंतजार कर रहा होगा, कोई स्टार्टअप शुरू करना चाहता होगा और कोई नई प्रतियोगिता की तैयारी कर रहा होगा।
तेजी से बदल रही दुनिया
पीएम मोदी ने कहा कि छात्र ऐसे समय में संस्थान से निकल रहे हैं, जब दुनिया तेजी से बदल रही है। शिक्षा, तकनीक और वैश्विक शक्ति संतुलन में लगातार परिवर्तन हो रहा है।
उन्होंने कहा कि टेक्नोलॉजी इतनी तेजी से आगे बढ़ रही है कि यह अनुमान लगाना मुश्किल है कि अगले 20-30 वर्षों में दुनिया का स्वरूप कैसा होगा।
उनके मुताबिक बदलाव अपने साथ चुनौतियां और अवसर दोनों लेकर आता है। उद्योग और प्रोफेशन का स्वरूप भी बदलता रहेगा, इसलिए युवाओं को लगातार खुद को नई परिस्थितियों के लिए तैयार करना होगा।
कैंपस से अलग होगी असली जिंदगी
प्रधानमंत्री ने छात्रों को कैंपस लाइफ और वास्तविक जीवन के अंतर को समझाते हुए कहा कि IIT में सिलेबस होता है और छात्रों को पता होता है कि कौन-सा कोर्स पढ़ना है और कौन-सी परीक्षा देनी है।
लेकिन असली जिंदगी में सब कुछ ‘आउट ऑफ सिलेबस’ होता है। वहां व्यक्ति को खुद यह पहचानना पड़ता है कि असली सवाल क्या है और उसका समाधान किस तरह निकाला जाए।
हर पीढ़ी की अलग जिम्मेदारी
पीएम मोदी ने स्वतंत्रता संग्राम का उदाहरण देते हुए कहा कि देश की गुलामी के दौर में उस समय की पीढ़ी के सामने आजादी हासिल करना सबसे बड़ी चुनौती थी। लाखों लोगों ने इसके लिए संघर्ष, त्याग और बलिदान दिया।
उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी के सामने चुनौतियां अलग हैं। अब युवाओं को तय करना होगा कि अगले 35 वर्षों में उनका योगदान देश की किस जरूरत को पूरा करेगा।
मेधावी छात्रों को मेडल पहनाए
IIT दिल्ली के 57वें दीक्षांत समारोह में प्रधानमंत्री ने मेधावी छात्रों को पदक प्रदान किए। समारोह के दौरान प्रधानमंत्री को उनकी तस्वीर देकर सम्मानित भी किया गया।
‘हमारे मठ’ की नजर
IIT दिल्ली के दीक्षांत समारोह में प्रधानमंत्री मोदी का संदेश युवाओं को केवल नौकरी तलाशने के बजाय समस्याओं के समाधान खोजने और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार रहने पर केंद्रित रहा। तकनीक और तेजी से बदलती दुनिया के बीच युवाओं की भूमिका विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण रहने वाली है



