MP के स्कूलों में संस्कृत को बढ़ावा: 9वीं-11वीं के विद्यार्थियों को विषय लेने के लिए प्रोत्साहित करेंगे शिक्षक, 31 अगस्त तक छात्रवृत्ति आवेदन
9वीं-11वीं के विद्यार्थियों को विषय लेने के लिए प्रोत्साहित करेंगे शिक्षक, 31 अगस्त तक छात्रवृत्ति आवेदन

मध्य प्रदेश में संस्कृत शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने हाई स्कूल और हायर सेकेंडरी स्कूलों में विद्यार्थियों को संस्कृत विषय चुनने के लिए प्रोत्साहित करने की पहल शुरू की है। महर्षि पतंजलि संस्कृत संस्थान ने प्रदेश के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी कर उन सरकारी स्कूलों की जानकारी मांगी है, जहां संस्कृत शिक्षक पदस्थ हैं और वहां कक्षा 9वीं तथा 11वीं में कितने विद्यार्थियों ने संस्कृत विषय चुना है। संस्थान के निर्देश के अनुसार जिन स्कूलों में संस्कृत शिक्षक वर्ग-1 कार्यरत हैं, लेकिन 9वीं और 11वीं में संस्कृत विषय का अध्यापन नहीं हो रहा है, वहां शिक्षकों को विद्यार्थियों को संस्कृत विषय लेने के लिए प्रोत्साहित करना होगा। ऐसे विद्यार्थियों के प्रवेश की जानकारी भी राज्य सरकार को भेजी जाएगी। संस्थान ने वर्ष 2025-26 में कक्षा 9वीं और 11वीं में संस्कृत विषय लेने वाले विद्यार्थियों का विवरण भी मांगा है। इस पहल का उद्देश्य स्कूल स्तर पर संस्कृत के प्रति विद्यार्थियों की घटती रुचि को बढ़ाना और विषय के अध्ययन को प्रोत्साहित करना है। इसके साथ ही उच्च शिक्षा विभाग ने वर्ष 2026-27 के लिए पात्र दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति योजनाओं की जानकारी भी जारी की है। शासकीय महाविद्यालयों में कंप्यूटर और प्रबंधन की डिग्री कर रहे पात्र दिव्यांग विद्यार्थियों को एकीकृत संस्कृत छात्रवृत्ति के साथ जीवन निर्वाह भत्ता और परिवहन भत्ता योजना के तहत भी सहायता दी जाएगी। छात्र नए आवेदन और नवीनीकरण आवेदन संस्था प्रमुख से अनुमोदित कराने के बाद संबंधित क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालक, उच्च शिक्षा कार्यालय में जमा कर सकेंगे। दोनों छात्रवृत्ति योजनाओं के लिए आवेदन की अंतिम तारीख 31 अगस्त निर्धारित की गई है। सरकार की इस पहल से एक ओर स्कूलों में संस्कृत विषय के चयन को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है, वहीं दूसरी ओर उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे पात्र दिव्यांग विद्यार्थियों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया जा रहा है।




