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पूजा सामग्री फेंकने के मामले में अर्जुन अवॉर्डी ACP को कोर्ट नोटिस: अतिक्रमण हटाने के दौरान मूर्तियां हटाने का आरोप; 18 अगस्त को पेशी

अतिक्रमण हटाने के दौरान मूर्तियां हटाने का आरोप; 18 अगस्त को पेशी

झज्जर/बहादुरगढ़। हरियाणा के बहादुरगढ़ में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान पूजा सामग्री और मूर्तियां हटाए जाने के मामले में अर्जुन अवॉर्डी एवं ACP दिनेश कुमार को अदालत की ओर से नोटिस जारी किया गया है।

नोटिस के अनुसार ACP दिनेश कुमार को 18 अगस्त तक न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश होने के लिए कहा गया है।

अतिक्रमण हटाने के दौरान पूजा सामग्री हटाने का आरोप

मामला बहादुरगढ़ के बाजार क्षेत्र का बताया जा रहा है। यहां अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान सड़क किनारे रखी पूजा सामग्री और मूर्तियों को हटाए जाने का वीडियो सामने आया था।

वीडियो में पूजा सामग्री को सड़क से हटाते हुए पुलिस अधिकारी दिखाई दे रहे थे। इसी मामले को लेकर विवाद खड़ा हुआ और बाद में मामला अदालत तक पहुंचा।

ACP दिनेश कुमार का पक्ष

मामले में ACP दिनेश कुमार की ओर से कहा गया है कि उन्हें यह जानकारी नहीं है कि पूजा सामग्री कब फेंकी गई। उनका कहना है कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान उनकी भूमिका को लेकर लगाए जा रहे आरोपों की स्थिति स्पष्ट नहीं है।

अब अदालत में मामले से जुड़े तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।

18 अगस्त को अदालत में पेश होने का निर्देश

अदालत की ओर से जारी नोटिस में ACP दिनेश कुमार को 18 अगस्त को न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश होने के लिए कहा गया है।

अदालत में सुनवाई के दौरान मामले से संबंधित वीडियो, शिकायत और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों पर पक्ष रखा जा सकता है।

कार्रवाई को लेकर उठे सवाल

पूजा सामग्री और मूर्तियों से जुड़ा मामला सामने आने के बाद धार्मिक भावनाओं और प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर सवाल उठे थे। एक पक्ष का कहना था कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई जरूरी थी, जबकि दूसरे पक्ष ने पूजा सामग्री को संभालकर हटाने की मांग की।

अब मामले की कानूनी प्रक्रिया में यह स्पष्ट होना बाकी है कि घटना की वास्तविक परिस्थितियां क्या थीं और जिम्मेदारी किसकी बनती है।

‘हमारे मठ’ की नजर

अतिक्रमण हटाना प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा हो सकता है, लेकिन धार्मिक सामग्री और मूर्तियों को हटाते समय संवेदनशीलता और निर्धारित प्रक्रिया का पालन महत्वपूर्ण है। अदालत का नोटिस किसी व्यक्ति को दोषी ठहराने के समान नहीं है। मामले में अंतिम स्थिति न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

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