PPF में 25 साल निवेश से ₹1 करोड़ से ज्यादा का फंड, 7.1% ब्याज पर करीब ₹61 हजार मासिक ब्याज का हिसाब
15+5+5 रणनीति से लंबी अवधि में बड़ा फंड तैयार करने का दावा; मौजूदा 7.1% दर पर ₹1.03 करोड़ पर सालाना करीब ₹7.31 लाख ब्याज बन सकता है

नई दिल्ली, 16 अगस्त। सुरक्षित और लंबी अवधि के निवेश विकल्प की तलाश करने वाले लोगों के लिए पब्लिक प्रोविडेंट फंड यानी PPF एक लोकप्रिय सरकारी बचत योजना है। वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही के लिए छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है और PPF पर ब्याज दर 7.1 प्रतिशत बनी हुई है। वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग ने जून 2026 में छोटी बचत योजनाओं की दरों से संबंधित अधिसूचना जारी की थी। PPF की खासियत यह है कि इसमें निवेश लंबे समय के लिए किया जा सकता है और कंपाउंडिंग के कारण समय के साथ जमा रकम पर ब्याज भी जुड़ता रहता है। मौजूदा नियमों के अनुसार एक वित्त वर्ष में PPF में न्यूनतम ₹500 और अधिकतम ₹1.50 लाख जमा किए जा सकते हैं। ब्याज दर सरकार द्वारा समय-समय पर तय की जाती है, इसलिए 25 साल की पूरी अवधि के लिए आज की 7.1 प्रतिशत दर को स्थायी मानकर चलना उचित नहीं होगा। 15+5+5 फॉर्मूला दरअसल PPF की 15 साल की मूल अवधि पूरी होने के बाद खाते को पांच-पांच साल के ब्लॉक में बढ़ाने की रणनीति को कहा जाता है। 15 साल पूरे होने पर खाताधारक खाते को बंद कर रकम निकाल सकता है या निर्धारित नियमों के तहत इसे आगे बढ़ा सकता है। पोस्ट ऑफिस की जानकारी के अनुसार PPF खाते को मैच्योरिटी के बाद अतिरिक्त योगदान के साथ या बिना अतिरिक्त योगदान के भी बढ़ाया जा सकता है। उदाहरण के तौर पर यदि कोई व्यक्ति हर साल अधिकतम ₹1.50 लाख निवेश करता है और लंबे समय तक खाते को जारी रखता है, तो कंपाउंडिंग के कारण बड़ा फंड तैयार हो सकता है। दिए गए अनुमान के अनुसार 25 वर्षों में कुल निवेश ₹37.50 लाख होगा और 7.1 प्रतिशत की स्थिर दर मानने पर रकम करीब ₹1.03 करोड़ तक पहुंच सकती है। इसमें करीब ₹65.58 लाख ब्याज से आने का अनुमान है। हालांकि वास्तविक रकम इस बात पर निर्भर करेगी कि सरकार भविष्य में PPF की ब्याज दर कितनी तय करती है और निवेश वर्ष की किस तारीख को किया जाता है। यदि 25 साल बाद खाते में लगभग ₹1.03 करोड़ की रकम हो और उस समय भी ब्याज दर 7.1 प्रतिशत बनी रहे, तो एक साल का ब्याज लगभग ₹7.31 लाख होगा, यानी औसतन करीब ₹60,900 प्रति माह के बराबर। ध्यान रखना जरूरी है कि यह किसी निश्चित मासिक पेंशन की गारंटी नहीं है, बल्कि 7.1 प्रतिशत की दर को पूरे साल स्थिर मानकर किया गया गणितीय अनुमान है। PPF में ब्याज दर सरकार बदल सकती है। इसके अलावा यदि ब्याज को खाते में ही रहने दिया जाता है तो कंपाउंडिंग जारी रहती है। PPF में टैक्स लाभ भी इसकी प्रमुख विशेषताओं में शामिल है। इंडिया पोस्ट के अनुसार PPF में किए गए निवेश पर आयकर अधिनियम की धारा 80C के तहत निर्धारित सीमा तक कटौती उपलब्ध है और खाते पर मिलने वाला ब्याज आयकर से मुक्त है। खाते में आंशिक निकासी की सुविधा भी नियमों के तहत सातवें वित्त वर्ष से उपलब्ध है, जबकि कुछ परिस्थितियों में समय से पहले खाता बंद करने के प्रावधान भी हैं। इसलिए PPF को रिटायरमेंट या लंबी अवधि के लक्ष्य के लिए इस्तेमाल करने वाले निवेशकों को सिर्फ मौजूदा ब्याज दर देखकर निर्णय लेने के बजाय अपने निवेश की अवधि, नकदी की जरूरत, टैक्स स्थिति और भविष्य की ब्याज दरों को ध्यान में रखना चाहिए। यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि PPF में सालाना ₹1.50 लाख से अधिक की राशि जमा करने पर निर्धारित सीमा से ऊपर की राशि पर PPF का सामान्य लाभ नहीं मिलता। इस तरह 15+5+5 रणनीति का सबसे बड़ा फायदा लंबी अवधि, अनुशासित निवेश और कंपाउंडिंग का संयोजन है, लेकिन ₹1.03 करोड़ और करीब ₹61 हजार मासिक ब्याज वाला आंकड़ा 7.1 प्रतिशत की स्थिर दर मानकर किया गया अनुमान है, इसे भविष्य की निश्चित कमाई या गारंटीड पेंशन नहीं माना जाना चाहिए।


