रायपुर में भगवान शिव पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी से विवाद: बजरंग दल ने क्रिश्चियन फोरम पदाधिकारी के घर किया प्रदर्शन; अरुण पन्नालाल गिरफ्तार
बजरंग दल ने क्रिश्चियन फोरम पदाधिकारी के घर किया प्रदर्शन; अरुण पन्नालाल गिरफ्तार
रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में भगवान शिव को लेकर सोशल मीडिया पर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के बाद विवाद बढ़ गया। मामले को लेकर बीजेपी की ओर से शिकायत की गई, जबकि छत्तीसगढ़ बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने क्रिश्चियन फोरम के पदाधिकारी अरुण पन्नालाल के घर का घेराव कर विरोध प्रदर्शन किया।
मामले में पुलिस ने अरुण पन्नालाल को गिरफ्तार कर लिया है। अदालत ने उन्हें 21 अगस्त तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।
सोशल मीडिया पोस्ट के बाद शुरू हुआ विवाद
बताया जा रहा है कि भगवान शिव को लेकर सोशल मीडिया पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी सामने आने के बाद हिंदू संगठनों में नाराजगी बढ़ी।
बीजेपी की ओर से पुलिस में शिकायत देकर संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई। इसके बाद बजरंग दल के कार्यकर्ता भी सक्रिय हुए और अरुण पन्नालाल के घर के बाहर प्रदर्शन किया।
बजरंग दल कार्यकर्ताओं ने किया घेराव
शुक्रवार को बजरंग दल के कार्यकर्ता बड़ी संख्या में अरुण पन्नालाल के घर पहुंचे। कार्यकर्ताओं ने कथित टिप्पणी के विरोध में नारेबाजी की और कार्रवाई की मांग की।
स्थिति को देखते हुए पुलिस बल भी मौके पर तैनात किया गया, ताकि किसी तरह की अप्रिय स्थिति न बने।
अरुण पन्नालाल गिरफ्तार
विवाद बढ़ने के बाद पुलिस ने अरुण पन्नालाल को गिरफ्तार किया। उन्हें अदालत के समक्ष पेश किया गया, जहां से 21 अगस्त तक न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया गया।
मामले में पुलिस सोशल मीडिया पर की गई टिप्पणी और उससे जुड़े अन्य तथ्यों की जांच कर रही है।
धार्मिक भावनाएं आहत करने के आरोप
शिकायतकर्ताओं की ओर से आरोप लगाया गया है कि सोशल मीडिया पर की गई टिप्पणी से भगवान शिव के प्रति आस्था रखने वाले लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं।
हालांकि, टिप्पणी का वास्तविक संदर्भ और कानूनी रूप से उसमें कौन-से अपराध बनते हैं, यह पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद स्पष्ट होगा।
‘हमारे मठ’ की नजर
धार्मिक आस्था से जुड़े मामलों में सोशल मीडिया पर की गई टिप्पणियां तेजी से विवाद का रूप ले सकती हैं। ऐसे मामलों में कानून के तहत शिकायत और जांच की प्रक्रिया के जरिए कार्रवाई होना जरूरी है। किसी भी आरोप को अंतिम सत्य मानने के बजाय न्यायिक प्रक्रिया के परिणाम का इंतजार किया जाना चाहिए



