रमन सरकार के दिग्गजों का बदला सियासी ग्राफ
कभी छत्तीसगढ़ की सत्ता के केंद्र में रहे बीजेपी नेताओं में किसी की भूमिका बढ़ी तो किसी का राजनीतिक प्रभाव बदले दौर में सीमित हुआ।

छत्तीसगढ़ में बीजेपी की 15 साल की सत्ता के दौरान डॉ. रमन सिंह और उनकी कैबिनेट के कई नेता प्रदेश की राजनीति के सबसे प्रभावशाली चेहरों में शामिल रहे, लेकिन सत्ता बदलने के बाद इन नेताओं की राजनीतिक भूमिका में बड़ा बदलाव आया है। 2003, 2008 और 2013 में लगातार तीन चुनाव जीतकर बीजेपी ने प्रदेश में लंबा शासन किया और उस दौरान रमन सिंह के साथ बृजमोहन अग्रवाल समेत कई नेताओं का सरकार और संगठन में मजबूत प्रभाव रहा। 2018 में बीजेपी की सत्ता जाने के बाद इन नेताओं की भूमिका बदली, जबकि 2023 में बीजेपी की दोबारा सरकार बनने के बाद भी पुराने चेहरों को पहले जैसी जिम्मेदारियां नहीं मिलीं। डॉ. रमन सिंह मुख्यमंत्री से विधानसभा अध्यक्ष बने और आज भी प्रदेश की राजनीति में वरिष्ठ एवं प्रभावशाली नेता के तौर पर सक्रिय हैं। वहीं बृजमोहन अग्रवाल करीब दो दशक तक मंत्री रहने के बाद 2024 में रायपुर से लोकसभा सांसद चुने गए, लेकिन केंद्र में मंत्री पद नहीं मिला। प्रदेश सरकार से जुड़े कुछ मुद्दों पर उनके मतभेद भी सार्वजनिक रूप से सामने आए और उन्होंने कई बार अपनी ही सरकार के फैसलों पर सवाल उठाते हुए पत्र लिखे। ऐसे में रमन सरकार के दौर के इन दिग्गज नेताओं का राजनीतिक सफर बताता है कि लंबे समय तक सत्ता के केंद्र में रहने वाले नेताओं की भूमिका समय और सत्ता समीकरण बदलने के साथ किस तरह बदलती है। एक समय प्रदेश सरकार के फैसलों में निर्णायक भूमिका निभाने वाले कुछ नेता आज अलग-अलग संवैधानिक या संगठनात्मक जिम्मेदारियों में हैं, जबकि कुछ की सक्रिय चुनावी राजनीति में पहले जैसी जगह नहीं रही। इस तरह 2008-13 के दौर और 2026 की स्थिति को साथ रखकर देखें तो रमन सरकार के पुराने चेहरों का सियासी ग्राफ कई अलग-अलग दिशाओं में जाता दिखाई देता है।




