अमेरिका-ईरान में फिर बढ़ा सैन्य तनाव, होर्मुज पर टकराव से दुनिया की नजर
अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरान का जॉर्डन-बहरीन में मिसाइल-ड्रोन अटैक, ट्रम्प बोले- समझौते की जरूरत नहीं

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने दावा किया है कि अमेरिकी सेना ने ईरान के सैन्य ठिकानों पर हमलों की एक नई लहर पूरी की है, जिसमें एयर डिफेंस साइट्स, रडार सिस्टम, समुद्री ठिकाने, संचार केंद्र और समुद्र में बारूदी सुरंगें बिछाने की ईरानी क्षमता को निशाना बनाया गया। अमेरिका के इन हमलों के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए जॉर्डन और बहरीन में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले करने का दावा किया है। जॉर्डन ने 13 ईरानी बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने की जानकारी दी है, जबकि कुवैत में भी ईरानी ड्रोन हमलों के बीच एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय किए गए। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले में बड़ी संख्या में अमेरिकी सैनिकों के मारे जाने का दावा किया, हालांकि अमेरिकी अधिकारियों ने शुरुआती जानकारी के आधार पर इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि हमलों में किसी अमेरिकी सैनिक के हताहत होने की जानकारी नहीं है। दूसरी ओर ईरान ने खुजस्तान प्रांत में अमेरिकी मिसाइल हमले में 7 लोगों की मौत और 8 के घायल होने का दावा किया है। ईरानी अधिकारियों ने सिरिक में एक शादी समारोह के दौरान अमेरिकी हमले का भी आरोप लगाया है, जिसमें 4 लोगों की मौत और करीब 50 लोगों के घायल होने की बात कही गई है, हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि ईरान के साथ किसी समझौते की जरूरत नहीं है और दावा किया कि अमेरिका का होर्मुज स्ट्रेट पर लगभग पूरा नियंत्रण है। अमेरिका का आरोप है कि ईरान ने इस बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग में बारूदी सुरंगें बिछाने की कोशिश की, जिसके बाद अमेरिकी सेना ने ईरानी ठिकानों को निशाना बनाया। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में शामिल है और यहां किसी बड़े सैन्य टकराव का असर सिर्फ अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक तेल आपूर्ति, कच्चे तेल की कीमतों, समुद्री व्यापार और एशिया तथा यूरोप की ऊर्जा सुरक्षा पर भी पड़ सकता है। इसी बीच रूस पर कथित तौर पर ईरान को सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल तकनीक विकसित करने में गुप्त मदद देने की रिपोर्ट भी सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार यह कार्यक्रम 2023 से चल रहा है और इसमें रैमजेट प्रोपल्शन जैसी तकनीक पर काम किया गया है। हालांकि अभी इस बात का कोई पुख्ता प्रमाण नहीं है कि रूस की मदद से विकसित किसी सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल को ईरान ने युद्ध में तैनात किया है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता यह तनाव अब क्षेत्रीय संघर्ष से आगे बढ़कर वैश्विक सुरक्षा और ऊर्जा बाजार के लिए भी बड़ी चिंता बनता जा रहा है।




