हरि सुमिरन ही मनुष्य के जीवन का सच्चा सहारा: स्वामी रामाचार्य
जाम्भाणी हरि कथा के पांचवें दिन कमरे का उद्घाटन, शकीला देवी सम्मानित; 3 सितंबर को डबवाली में निकलेगी भव्य शोभायात्रा

डबवाली की बिश्नोई धर्मशाला में श्री गुरु जम्भेश्वर भगवान के 576वें अवतार दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित श्री जाम्भाणी हरि कथा समारोह के पांचवें दिन कथा से पहले मुकाम धाम से पधारे स्वामी भागीरथ दास शिक्षाशास्त्री जी के कर कमलों से शकीला देवी धर्मपत्नी स्व. आजाद कुमार धारणिया, अबूबशहर द्वारा निर्माण करवाए गए कमरे का उद्घाटन किया गया। इसके बाद आचार्य स्वामी रामाचार्य जी ने दीप प्रज्वलित कर कथा का शुभारंभ किया, जबकि सभा प्रधान कुलदीप कुमार जादूदा सहित समाज के गणमान्य लोगों ने स्वामी जी का तिलक कर स्वागत किया। कथा की शुरुआत ‘गोबिंद गोबिंद गोपाला, मुरली मनोहर नंदलाला’ संकीर्तन से हुई। स्वामी रामाचार्य जी ने श्री जाम्भाणी वाणी के शब्द ‘क्षण क्षण आयु घटनन्ती जावे, मरण दिनों दिन आव’ की व्याख्या करते हुए कहा कि मनुष्य को समय रहते अपने जीवन की वास्तविकता को समझना चाहिए, क्योंकि जन्म के बाद प्रत्येक क्षण उसकी आयु कम होती जाती है और मृत्यु का समय लगातार निकट आता रहता है। उन्होंने कहा कि जीवन रहते भगवान का सुमिरन, भजन, लोक भलाई, पुण्य कार्य और समाज सेवा करनी चाहिए, क्योंकि अंतिम समय में यही मनुष्य का सच्चा सहारा बनते हैं। यह संसार स्थायी निवास नहीं बल्कि कुछ समय के लिए मिला पड़ाव है, इसलिए मनुष्य को अपने जीवन को सत्कर्मों के माध्यम से सार्थक बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अच्छे कर्म और सेवा भाव मनुष्य को आध्यात्मिक उन्नति की ओर ले जाते हैं और आवागमन के चक्र से मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करते हैं। इस अवसर पर सभा की ओर से कमरे का निर्माण करवाने वाली शकीला देवी को शॉल एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया, जबकि बिश्नोई मंदिर और गौशाला के अध्यक्षों को भी स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। कथा के समापन पर श्रद्धालुओं में प्रसाद का वितरण शकीला देवी की ओर से किया गया। समारोह के तहत 3 सितंबर को बिश्नोई धर्मशाला से भव्य एवं शांतिपूर्ण शोभायात्रा निकाली जाएगी, जो अनाज मंडी रोड, रामलीला ग्राउंड, मेन बाजार, पुरानी सब्जी मंडी, मलोट रोड, सिल्वर जुबली चौक, बस स्टैंड और चौटाला रोड से होते हुए वापस धर्मशाला पहुंचेगी। गांवों से आने वाली बसें सुबह 7 बजे रवाना होकर करीब 8 बजे डबवाली पहुंचेंगी और शोभायात्रा सुबह 8:15 बजे शुरू होकर करीब 12 बजे वापस धर्मशाला पहुंचेगी, जिसके बाद दोपहर 3 बजे तक कथा का आयोजन होगा।



