बांग्लादेशियों के फर्जी पासपोर्ट: STF के रडार पर 12 अफसर; मास्टरमाइंड रियाल के नाम पर 4 पासपोर्ट, आवेदन पहुंचने से पहले आता था फोन
MP में फर्जी पासपोर्ट रैकेट की जांच तेज, भोपाल-ग्वालियर समेत 5 जिलों के 12 अफसर-कर्मचारी STF के निशाने पर; 100 से ज्यादा पासपोर्ट की आशंका

ग्वालियर। मध्य प्रदेश में बांग्लादेशी नागरिकों के लिए फर्जी भारतीय दस्तावेज और पासपोर्ट तैयार करने वाले अंतरराज्यीय रैकेट के खुलासे के बाद पुलिस और प्रशासन में हड़कंप है। स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की जांच में भोपाल, ग्वालियर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा और बैतूल से जुड़े 12 पुलिस अधिकारियों और अन्य विभागों के कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध मिली है। ये सभी अब STF की जांच के दायरे में हैं।
जांच के मुताबिक फर्जी पासपोर्ट बनाने का नेटवर्क साल 2021 में ग्वालियर के डबरा से शुरू हुआ था। एक ही गवाह, एक ही पते और एक ही मोबाइल नंबर का इस्तेमाल करते हुए 17 फर्जी पासपोर्ट तैयार किए गए, लेकिन उस समय पुलिस को इसकी भनक नहीं लगी।
2023 में विदेश मंत्रालय ने PHQ को दी थी चेतावनी
जांच में सामने आया है कि इस नेटवर्क की पहुंच भोपाल से लेकर डबरा तक थी। विदेश मंत्रालय ने साल 2023 में मध्य प्रदेश पुलिस मुख्यालय (PHQ) को फर्जी पासपोर्ट बनाए जाने को लेकर रिपोर्ट भेजकर आगाह किया था।
इसके बावजूद इस मामले में प्रभावी कार्रवाई नहीं होने का आरोप है। अब STF की जांच में करीब 70 बांग्लादेशी नागरिकों के फर्जी दस्तावेज और पासपोर्ट सामने आने के बाद पूरे मामले की गंभीरता बढ़ गई है।
100 से ज्यादा फर्जी पासपोर्ट मिलने की आशंका
STF को आशंका है कि मध्य प्रदेश में फर्जी तरीके से बनाए गए पासपोर्ट की संख्या 100 से ज्यादा हो सकती है। जांच एजेंसी को कुछ और संदिग्ध पासपोर्ट मिलने की उम्मीद है।
साल 2021-22 और उसके बाद के दो वर्षों में डबरा सहित संबंधित शहरों से जारी हुए पासपोर्ट की भी जांच की जा रही है। इनमें कई पासपोर्ट संदिग्ध श्रेणी में पाए गए हैं।
भोपाल का गोविंदपुरा और डबरा बने नेटवर्क के केंद्र
जांच के मुताबिक इस रैकेट का मुख्य नेटवर्क भोपाल और ग्वालियर में सक्रिय था। भोपाल के गोविंदपुरा के एक ही पते पर करीब 40 फर्जी पासपोर्ट के आवेदन तैयार कर अलग-अलग जिलों के पासपोर्ट सेल में वेरिफिकेशन के लिए भेजे गए।
वहीं ग्वालियर के डबरा में एक ही पते पर 17 बांग्लादेशी नागरिकों के भारतीय दस्तावेज और पासपोर्ट तैयार किए गए।
आवेदन पहुंचने से पहले थाने में आ जाता था फोन
STF की जांच में एक अहम बात सामने आई है। संदिग्ध पासपोर्ट का आवेदन डबरा थाने में वेरिफिकेशन के लिए पहुंचने से पहले ही वहां फोन आ जाता था।
फोन पर आवेदन को ‘अर्जेंट’ बताते हुए जल्द से जल्द क्लियर करने के लिए कहा जाता था। इसके बाद एक फोन कॉल पर पासपोर्ट का वेरिफिकेशन तेजी से कर दिया जाता था।
अब STF यह पता लगाने में जुटी है कि थाने में फोन कौन करता था और उसे आवेदनों से जुड़ी जानकारी पहले से कैसे मिलती थी।
अब तक चार आरोपी गिरफ्तार
फर्जी पासपोर्ट मामले में STF अब तक चार आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। इनमें रैकेट का मास्टरमाइंड रियाल चौधरी, जाय चौधरी बरुआ, महाराष्ट्र के उल्हासनगर से पकड़ा गया प्रियान राय और दक्षिण दिल्ली से गिरफ्तार विप्लव अधिकारी शामिल हैं।
वहीं अन्य आरोपियों की तलाश के लिए STF की अलग-अलग टीमें मध्य प्रदेश के बाहर भी दबिश दे रही हैं।
मास्टरमाइंड रियाल के खुद के 4 फर्जी पासपोर्ट
पूछताछ में रैकेट के मास्टरमाइंड रियाल चौधरी को लेकर भी बड़ा खुलासा हुआ है। जांच के अनुसार उसके नाम पर चार पासपोर्ट बने थे और चारों में फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया।
बताया गया है कि रियाल ने डबरा के दो स्थानीय दलालों के जरिए फर्जी दस्तावेज तैयार करवाए थे। STF की पूछताछ के आधार पर संभावित ठिकानों पर दबिश देने के लिए पांच टीमें गठित की गई हैं।
तत्कालीन TI और पासपोर्ट वेरिफिकेशन सेल भी जांच के घेरे में
जिस दौरान 2021 में डबरा से फर्जी पासपोर्ट वेरिफाई किए गए, उस समय विनायक शुक्ला थाना प्रभारी थे। वे वर्तमान में दतिया में DSP हैं। पासपोर्ट वेरिफिकेशन सेल की जिम्मेदारी प्रधान आरक्षक भूपेंद्र गुर्जर के पास थी।
कुछ समय के लिए सुरेंद्र सिंह भी डबरा थाना प्रभारी रहे। STF इन अधिकारियों और कर्मचारियों से पूछताछ कर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि फर्जी पासपोर्ट के आवेदन कैसे पास हुए और थाने में पहले से सूचना देने वाले लोगों का नेटवर्क क्या था।
बौद्ध विहार के एक भिक्षु के तीन नाम सामने आए
डबरा के जिस बौद्ध विहार के पते पर 17 बांग्लादेशी नागरिकों के भारतीय पासपोर्ट बने, वहां के एक भिक्षु की पहचान को लेकर भी सवाल उठे हैं।
जांच में उसके तीन अलग-अलग नाम सामने आए हैं। आधार कार्ड में नाम रामेश्वर जाटव, वोटर आईडी में भंते संघप्रिय, जबकि मठ की दीवार पर रांघप्रिय महाथेरो लिखा बताया गया है।
आधार कार्ड में रामेश्वर जाटव के पिता का नाम नारायण जाटव और पता दतिया का दर्ज है। वहीं वोटर आईडी में नाम भंते संघप्रिय और पिता का नाम नारायण दर्ज है। भिक्षु का कहना है कि उसने कुछ दिन पहले बौद्ध धर्म अपनाया था और धर्म अपनाने के बाद उसका नाम संघप्रिय रखा गया।
मठों में आने-जाने वालों का रिकॉर्ड नहीं मिला
STF की जांच में बौद्ध मठों में आने-जाने वाले लोगों के रिकॉर्ड को लेकर भी सवाल सामने आए हैं। जांच एजेंसी को मठों में आने वाले लोगों का व्यवस्थित रिकॉर्ड नहीं मिला।
कौन व्यक्ति कहां से आया, कितने समय तक रुका और कब वापस गया, इसका पूरा हिसाब उपलब्ध नहीं होने के कारण मठों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।
MP के बाहर STF की पांच टीमें कर रहीं जांच
STF के एसपी राजेश सिंह भदौरिया के मुताबिक, फर्जी पासपोर्ट मामले में पांच टीमें मध्य प्रदेश के बाहर दबिश दे रही हैं।
पिछले पांच साल में फर्जी तरीके से भारतीय दस्तावेज तैयार करने से लेकर पासपोर्ट वेरिफिकेशन तक जिन विभागों और पुलिस थानों से फाइलें गुजरीं, उनसे जुड़े पुलिस अधिकारी, पुलिसकर्मी और अन्य विभागों के कर्मचारियों की सूची तैयार की गई है।
STF के मुताबिक ये सभी जांच के दायरे में हैं और उनसे पूछताछ की जाएगी। जांच में कई संदिग्धों के दो से तीन दस्तावेज भी मिलने की बात सामने आई है।




