पटना में गंगा ने तोड़ा 10 साल का रिकॉर्ड, दियारा के गांव-घर में घुसा पानी
गांधी घाट पर 50.53 मीटर पहुंचा जलस्तर, 2016 का रिकॉर्ड टूटा; 11 जिलों के 50 प्रखंड और 201 पंचायतें बाढ़ से प्रभावित, 9 नदियां खतरे के निशान से ऊपर

बिहार में बाढ़ की स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है और पटना में गंगा नदी ने पिछले 10 साल का अपना उच्चतम जलस्तर रिकॉर्ड तोड़ दिया है। शनिवार को गांधी घाट पर गंगा का जलस्तर 50.53 मीटर तक पहुंच गया, जबकि वर्ष 2016 में यहां 50.52 मीटर का उच्चतम जलस्तर दर्ज किया गया था। यानी गंगा का पानी पुराने रिकॉर्ड से एक सेंटीमीटर ऊपर पहुंच चुका है और जलस्तर में बढ़ोतरी का सिलसिला अभी जारी है। राज्य आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार बिहार के 11 जिलों के 50 प्रखंडों और 201 ग्राम पंचायतों में करीब 10.26 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार और अररिया में बाढ़ का असर दिखाई दे रहा है। गंगा के साथ गंडक, कोसी, बूढ़ी गंडक, पुनपुन और घाघरा समेत कई नदियां अलग-अलग स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। दीघा, हाथीदह, भागलपुर, कहलगांव, बक्सर और मुंगेर में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान के ऊपर दर्ज किया गया है, जबकि डुमरियाघाट और हाजीपुर में गंडक, बलतारा में कोसी, खगड़िया में बूढ़ी गंडक, श्रीपालपुर में पुनपुन और दरौली में घाघरा भी उफान पर हैं। पटना के दियारा इलाकों में स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक बनी हुई है। नदी का पानी निचले इलाकों में तेजी से फैल रहा है और कई गांवों में घरों के आसपास पानी जमा हो चुका है। दियारा क्षेत्र के खेत, रास्ते और बड़ी संख्या में रिहायशी इलाके पानी से घिर गए हैं, जिससे ग्रामीणों की रोजमर्रा की जिंदगी बुरी तरह प्रभावित हुई है। गंगा का पानी रेलवे पुलों और आसपास के संवेदनशील ढांचों तक पहुंच गया है, जिसके चलते प्रशासन और रेलवे दोनों की निगरानी बढ़ा दी गई है। पुनपुन नदी भी लगातार दबाव बढ़ा रही है और पिछले 24 घंटे में इसके जलस्तर में करीब 28 सेंटीमीटर की वृद्धि दर्ज की गई है। पटना के निचले इलाकों में गंगा और पुनपुन के बढ़ते पानी का असर दिखाई देने लगा है तथा प्रशासन को संभावित जलभराव वाले क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। पंडारक में भी गंगा ने अपना पिछला उच्चतम बाढ़ स्तर पार कर लिया है। यहां 5 सितंबर की सुबह जलस्तर 43.78 मीटर दर्ज किया गया, जबकि पिछला उच्चतम स्तर 43.73 मीटर था, जो 16 अगस्त 2021 को दर्ज हुआ था। लगातार बढ़ते जलस्तर को देखते हुए जिला प्रशासन, जल संसाधन विभाग और आपदा प्रबंधन विभाग को हाई अलर्ट पर रखा गया है। अधिकारियों को तटबंधों की लगातार निगरानी करने, नदी के किनारे और दियारा क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सतर्क करने तथा जरूरत पड़ने पर तत्काल सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं। बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए राज्य के विभिन्न जिलों में सामुदायिक रसोई संचालित की जा रही हैं और राहत सामग्री के वितरण के साथ नावों के जरिए आवागमन एवं निकासी की व्यवस्था की गई है। बिहार में सितंबर के शुरुआती दिनों में सामान्य से काफी अधिक बारिश दर्ज होने और पड़ोसी नेपाल में भी भारी बारिश के कारण नदियों के जलस्तर में तेजी से वृद्धि हुई है। जल संसाधन विभाग के अनुसार गंगा के बढ़ते जलस्तर के पीछे सोन और घाघरा नदियों से आए अतिरिक्त पानी का भी असर माना जा रहा है। पटना सहित कई जिलों में प्रशासन ने लोगों से नदी और बाढ़ के पानी के आसपास अनावश्यक रूप से नहीं जाने की अपील की है। संवेदनशील इलाकों में निगरानी दल सक्रिय किए गए हैं और राहत-बचाव की तैयारियां तेज कर दी गई हैं। बाढ़ का असर अब सड़क और रेल यातायात पर भी पड़ने लगा है। पुनपुन क्षेत्र में रेल पुल के आसपास पानी बढ़ने के कारण पटना-गया रेलखंड पर परिचालन प्रभावित हुआ है और कुछ ट्रेनों को रद्द या वैकल्पिक मार्ग से चलाने की तैयारी की गई है। इस बीच पटना के दियारा इलाकों से सामने आ रहे ड्रोन दृश्यों में बाढ़ के पानी का व्यापक फैलाव दिखाई दे रहा है, जहां दूर-दूर तक खेत और गांव पानी से घिरे नजर आ रहे हैं। गंगा का लगातार बढ़ता जलस्तर और कई नदियों का खतरे के निशान से ऊपर रहना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। अगले कुछ घंटे इसलिए महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं क्योंकि जलस्तर में अभी बढ़ोतरी की प्रवृत्ति बनी हुई है। अधिकारियों का जोर तटबंधों की निगरानी, निचले इलाकों से लोगों की सुरक्षा, राहत सामग्री की उपलब्धता और जरूरत पड़ने पर तत्काल रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू करने पर है।




