AAP से निष्कासन के बाद माइसरखाना के तेवर कायम: समर्थकों से राय लेकर लेंगे अगला फैसला, सरकार के खिलाफ मोर्चे के संकेत
सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी का मुद्दा उठाने के बाद पार्टी से निष्कासन; माइसरखाना बोले- समर्थकों की राय के बाद तय करूंगा अगला कदम

बठिंडा। आम आदमी पार्टी द्वारा मौड़ हलके के विधायक सुखबीर सिंह माइसरखाना को पार्टी से निष्कासित किए जाने के बाद विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है। पार्टी की कार्रवाई के बावजूद विधायक के तेवर बरकरार हैं। अब उन्होंने अपने अगले राजनीतिक कदम का फैसला समर्थकों और हलके के लोगों से चर्चा के बाद लेने की बात कही है।
रविवार को माइसरखाना ने समर्थकों के साथ बैठक शुरू की। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह किसी दबाव में जल्दबाजी में फैसला नहीं लेंगे और पहले लोगों की राय जानेंगे। उनके इस रुख के बाद पंजाब की राजनीति में यह सवाल उठने लगा है कि क्या आने वाले दिनों में वह सरकार के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोलेंगे।
स्कूलों की बदहाली का मुद्दा उठा तो बढ़ा विवाद
विवाद की शुरुआत मौड़ हलके के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी और अन्य समस्याओं को लेकर विधायक द्वारा सवाल उठाने से हुई। सामने आए वीडियो में माइसरखाना इन मुद्दों को लेकर भावुक नजर आए।
उनका दावा था कि हलके की समस्याओं को लेकर उन्होंने मंत्रियों और अधिकारियों से संपर्क किया, लेकिन अपेक्षित सुनवाई नहीं हुई। विधायक ने अफसरशाही की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए।
विधायक ने उठाए सवाल, पार्टी ने लिया निष्कासन का फैसला
माइसरखाना के बयानों को पार्टी नेतृत्व के प्रति असहमति के रूप में देखा गया। इसके बाद आम आदमी पार्टी ने उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया।
अब पार्टी से बाहर किए जाने के बाद विधायक ने सीधे तौर पर अपने समर्थकों से राय लेने का रास्ता चुना है। इससे मौड़ की राजनीति में आगे की दिशा को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
सरकार के लिए बढ़ सकती है राजनीतिक चुनौती
यदि माइसरखाना अपने समर्थकों के साथ सरकार के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोलते हैं, तो मामला केवल एक विधायक और पार्टी संगठन के बीच विवाद तक सीमित नहीं रहेगा। सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी और अफसरशाही से जुड़े उनके सवाल विपक्ष को भी सरकार को घेरने का मुद्दा दे सकते हैं।
खास तौर पर यह सवाल चर्चा में है कि यदि सत्तारूढ़ दल का निर्वाचित विधायक अपने ही हलके की समस्याओं को लेकर सार्वजनिक रूप से असंतोष जताता है, तो सरकार और विधायकों के बीच समन्वय की स्थिति क्या है।
अब सबकी नजर अगले कदम पर
माइसरखाना ने फिलहाल अपने अगले राजनीतिक कदम को लेकर कोई अंतिम घोषणा नहीं की है। उन्होंने समर्थकों और हलके के लोगों से चर्चा के बाद निर्णय लेने की बात कही है।
अब राजनीतिक नजरें इस बात पर टिकी हैं कि माइसरखाना पार्टी से निष्कासन के बाद किस रास्ते पर जाते हैं—सरकार के खिलाफ खुलकर आवाज उठाते हैं, किसी नए राजनीतिक मंच का विकल्प चुनते हैं या फिर अपने समर्थकों के साथ आगे की रणनीति तय करते हैं।
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