अनुकंपा नियुक्ति पर हाईकोर्ट सख्त, पुलिस सेवा के लिए ‘ससम्मान बरी’ जरूरी
पुलिस सेवा में नियुक्ति को लेकर बड़ा फैसला

Gwalior High Court की डिवीजन बेंच ने अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े एक अहम मामले में स्पष्ट किया है कि पुलिस जैसे अनुशासित विभाग में केवल आपराधिक मामलों से बरी होना पर्याप्त नहीं माना जाएगा। कोर्ट ने कहा कि नियुक्ति के लिए “ससम्मान” (honourable) दोषमुक्ति आवश्यक है।
समझौते या गवाही बदलने से नहीं मिलेगी क्लीन चिट
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि यदि किसी आरोपी को गवाहों के मुकरने, सबूतों की कमी या समझौते के आधार पर राहत मिलती है, तो उसे पूरी तरह निर्दोष नहीं माना जा सकता। ऐसे मामलों को “ससम्मान बरी” नहीं कहा जाएगा।
याचिका खारिज, आरक्षक की मांग अस्वीकार
यह फैसला योगेश शर्मा की याचिका पर आया, जिन्होंने अपने पिता की मृत्यु के बाद आरक्षक पद पर अनुकंपा नियुक्ति मांगी थी। कोर्ट ने उनकी रिट अपील खारिज कर दी। मामले की सुनवाई जस्टिस GS Ahluwalia और जस्टिस Pushpendra Yadav की खंडपीठ ने की।
आपराधिक रिकॉर्ड को बताया गंभीर आधार
कोर्ट ने कहा कि नियुक्ति के दौरान चरित्र सत्यापन बेहद महत्वपूर्ण है। यदि किसी अभ्यर्थी का आपराधिक रिकॉर्ड रहा है, तो नियोक्ता यह तय करने के लिए स्वतंत्र है कि वह व्यक्ति भविष्य में पुलिस सेवा के लिए उपयुक्त है या नहीं।
सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला
हाईकोर्ट ने अपने निर्णय में सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का उल्लेख करते हुए कहा कि केवल संदेह का लाभ मिलने से आरोपी को पूर्ण निर्दोष नहीं माना जा सकता। खासकर चोरी और मारपीट जैसे मामलों को नैतिक अधमता से जुड़े गंभीर अपराध माना गया है।
निर्णय का असर
इस फैसले को पुलिस और अन्य अनुशासित सेवाओं में भर्ती और अनुकंपा नियुक्ति के मामलों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिससे भविष्य में चयन प्रक्रिया और सख्त होने की संभावना है।




