पूर्व जिला जज से 8 दिन में 2.50 करोड़ की ठगी, डिजिटल अरेस्ट कर बनाया शिकार
डिजिटल अरेस्ट कर बनाया शिकार

जयपुर: जयपुर में साइबर ठगों ने 90 वर्षीय पूर्व जिला जज को CBI और RBI अधिकारी बनकर डिजिटल अरेस्ट किया और गिरफ्तारी का डर दिखाकर महज आठ दिनों में 2 करोड़ 50 लाख 51 हजार रुपये अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर करवा लिए। मामले की शुरुआत 28 जुलाई को एक वॉट्सऐप वीडियो कॉल से हुई, जिसमें आरोपी पुलिस अधिकारी की वर्दी में नजर आया और खुद को मुंबई CBI का अधिकारी बताते हुए दावा किया कि मुंबई में 50 करोड़ रुपये के हवाला लेनदेन का खुलासा हुआ है, जिसमें 40 लाख रुपये पूर्व जज के SBI खाते में आने की बात कही गई। आरोपियों ने जांच में सहयोग नहीं करने पर मुंबई ले जाकर गिरफ्तार करने की धमकी दी और परिवार के किसी सदस्य को जानकारी देने से भी मना किया। कुछ देर बाद दूसरे आरोपी ने खुद को RBI मैनेजर बताते हुए कॉल किया और हवाला की रकम से म्यूचुअल फंड में निवेश किए जाने की बात कहकर पीड़ित से उनके वित्तीय दस्तावेज और अन्य जानकारी हासिल कर ली। इसके बाद साइबर ठगों ने जांच के नाम पर पूर्व जज से अलग-अलग बैंक खातों में रकम ट्रांसफर करवानी शुरू कर दी। रिपोर्ट के मुताबिक 3 से 10 अगस्त के बीच आठ दिनों में करोड़ों रुपये ट्रांसफर कराए गए और पीड़ित को करीब 15 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट के नाम पर मानसिक दबाव में रखा गया। ठगों ने उनकी वित्तीय जानकारी हासिल कर उनके बैंक और निवेश खातों को भी निशाना बनाया। हालांकि SBI के एक बैंक मैनेजर की सतर्कता के कारण PPF खाते से होने वाला एक बड़ा ट्रांजैक्शन रुक गया, जिसके बाद पूरे मामले का खुलासा हुआ। पीड़ित के भांजे रविन्द्र सिंह मोहनोत की रिपोर्ट पर ज्योति नगर थाने में FIR दर्ज की गई है। पुलिस अब आरोपियों की पहचान, इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबर, बैंक खातों और करोड़ों रुपये के लेनदेन की जांच कर रही है। यह मामला एक बार फिर बताता है कि कोई भी वास्तविक पुलिस, CBI, RBI या सरकारी एजेंसी फोन अथवा वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी का डर दिखाकर बैंक खाते में रकम ट्रांसफर करने या डिजिटल अरेस्ट में रहने का आदेश नहीं देती। ऐसे किसी भी कॉल की स्थिति में तुरंत कॉल काटकर संबंधित विभाग या साइबर हेल्पलाइन से आधिकारिक माध्यम से संपर्क करना जरूरी है।




