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केरल यूनिवर्सिटी VC का वंदे मातरम पर बयान, छात्र संगठनों ने लगाया RSS एजेंडा बढ़ाने का आरोप

मोहनन कन्नुम्मल ने कहा- वंदे मातरम का विरोध करने वाले नहीं जानते कि उनकी मां कौन हैं; SFI और KSU ने बयान को लेकर जताई आपत्ति

तिरुवनंतपुरम, 15 अगस्त। केरल यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर मोहनन कन्नुम्मल के वंदे मातरम को लेकर दिए गए बयान पर राज्य में राजनीतिक और छात्र संगठनों के बीच विवाद शुरू हो गया है। कन्नुम्मल ने तिरुवनंतपुरम के मणिविला में आयोजित आरएसएस के युवा सम्मेलन में कहा कि जो लोग वंदे मातरम का विरोध करते हैं, वे नहीं जानते कि उनकी मां कौन हैं। उन्होंने कहा कि देश को ‘मदर इंडिया’ कहा जाता है और इसी सोच से वंदे मातरम का संबंध है। उनके इस बयान पर छात्र संगठनों SFI और KSU ने आपत्ति जताते हुए आरोप लगाया कि वाइस चांसलर विश्वविद्यालय में RSS का एजेंडा आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। यह विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब केरल में विश्वविद्यालयों के वाइस चांसलरों की कथित RSS से नजदीकी को लेकर पहले से राजनीतिक बहस चल रही है। LDF और UDF की ओर से कन्नुम्मल की वाइस चांसलर पद पर नियुक्ति को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं और राज्य की शिक्षा व्यवस्था को कथित तौर पर भगवा रंग देने की कोशिश का आरोप लगाया गया है। दूसरी ओर, वंदे मातरम को लेकर केंद्र सरकार की ओर से जारी दिशा-निर्देशों के बाद भी इस विषय पर देशभर में राजनीतिक चर्चा जारी है। गृह मंत्रालय ने 9 जुलाई को राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और केंद्रीय मंत्रालयों को राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम तथा राष्ट्रगान जन गण मन के गायन और बजाने से संबंधित निर्देश जारी किए थे। निर्देशों के अनुसार यदि किसी कार्यक्रम में दोनों गाए या बजाए जाते हैं तो पहले वंदे मातरम और उसके बाद जन गण मन होगा। यदि किसी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश का अपना राज्य गीत है तो क्रम में पहले राज्य गीत, फिर वंदे मातरम और अंत में जन गण मन होगा। रिपोर्ट के अनुसार इससे पहले 28 जनवरी को भी सरकार की ओर से इसी तरह के निर्देश जारी किए गए थे, जिनमें स्कूलों में दिन की शुरुआत राष्ट्रगीत से करने सहित कई प्रोटोकॉल बताए गए थे। इस पूरे विवाद के बीच वाइस चांसलर के बयान ने केरल की राजनीति और विश्वविद्यालय परिसर में वैचारिक बहस को फिर चर्चा में ला दिया है। छात्र संगठनों का कहना है कि विश्वविद्यालय के पदाधिकारियों को राजनीतिक या वैचारिक गतिविधियों से दूर रहना चाहिए, जबकि कन्नुम्मल के बयान को उनके समर्थक राष्ट्रगीत और राष्ट्रीय भावना से जोड़कर देख रहे हैं। फिलहाल विवाद का केंद्र वंदे मातरम को लेकर VC की टिप्पणी और उसके बाद छात्र संगठनों द्वारा लगाए गए राजनीतिक आरोप हैं।

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