यूपी पटाखा फैक्ट्री विस्फोट: बेटे का शव तलाश रहा पिता, बोला- सिर्फ पैर मिला; 9 पुलिसकर्मी सस्पेंड
प्रयागराज-कौशांबी बॉर्डर पर अवैध पटाखा फैक्ट्री में धमाके के बाद 11 मौतें, 8 बच्चों के शवों का पोस्टमॉर्टम; फैक्ट्री मालिक नौशाद एनकाउंटर के बाद गिरफ्तार

प्रयागराज-कौशांबी बॉर्डर पर अवैध पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट के बाद प्रशासन और पुलिस की कार्रवाई तेज हो गई है। हादसे में 8 बच्चों समेत 11 लोगों की मौत हुई है, जबकि विस्फोट के बाद आसपास के मकानों को भी भारी नुकसान पहुंचा। मामले में लापरवाही बरतने के आरोप में एक इंस्पेक्टर और छह दरोगाओं समेत 9 पुलिसकर्मियों को सस्पेंड किया गया है। मंगलवार तड़के पुलिस ने फैक्ट्री मालिक नौशाद (50) को मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के अनुसार वह शहर से बाहर भागने की कोशिश कर रहा था और कार्रवाई के दौरान उसके पैर में गोली लगी। हादसे में मारे गए 11 लोगों के शवों का पोस्टमॉर्टम कराया जा रहा है, जिनमें तीन शवों का पोस्टमॉर्टम प्रयागराज और आठ शवों का कौशांबी में किया जाना है। दूसरी ओर, घटनास्थल पर मंगलवार को भी मलबा हटाने का काम जारी रहा। बुलडोजर की मदद से मलबा हटाया जा रहा है और पुलिस तथा राहत टीम यह जांच कर रही है कि कहीं कोई व्यक्ति अभी भी मलबे में दबा तो नहीं है। फोरेंसिक टीम भी मौके पर पहुंचकर विस्फोट से जुड़े साक्ष्य जुटा रही है। इस बीच एक बुजुर्ग पिता अपने बेटे के शव की तलाश में मलबे और पोस्टमॉर्टम हाउस के चक्कर लगाता नजर आया। सरजू दास ने बताया कि उसके बेटे का सिर्फ एक पैर मिला है, जबकि शरीर का बाकी हिस्सा अभी तक नहीं मिल पाया है। हादसा सोमवार दोपहर करीब 11:30 बजे हुआ था। पटाखा फैक्ट्री में हुए तेज धमाके के कारण आसपास के तीन मकान पूरी तरह जमींदोज हो गए, जबकि पांच अन्य मकानों को भी नुकसान पहुंचा। घटना के बाद सोमवार शाम करीब साढ़े सात बजे फैक्ट्री से लगभग 400 मीटर दूर स्थित नौशाद के पटाखा गोदाम को भी बुलडोजर से गिरा दिया गया। फिलहाल विस्फोट की वास्तविक वजह स्पष्ट नहीं हुई है। हालांकि एक महिला ने दावा किया था कि बिजली का खंभा गिरने के बाद फैक्ट्री में रखे बारूद में तेज धमाका हुआ। पुलिस इस दावे समेत सभी संभावित कारणों की जांच कर रही है। बताया गया है कि यह अवैध फैक्ट्री प्रयागराज के मनौरी एयरफोर्स स्टेशन से करीब 2 किलोमीटर दूर संचालित हो रही थी। घटना के बाद पुलिस की भूमिका और फैक्ट्री के संचालन को लेकर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि फैक्ट्री कितने समय से चल रही थी, वहां पटाखा निर्माण के लिए किस तरह की सामग्री रखी गई थी और संबंधित अधिकारियों को इसकी जानकारी थी या नहीं। फोरेंसिक जांच और मलबे से मिलने वाले साक्ष्यों के आधार पर विस्फोट के कारणों का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है। वहीं मृतकों के परिजनों के लिए सबसे बड़ी चिंता अपने प्रियजनों की पहचान और शवों को हासिल करना है। हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कुछ शवों की पहचान मुश्किल हो रही है और परिजनों को पहचान की प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार है। प्रशासन ने घटनास्थल पर राहत एवं जांच कार्य जारी रखा है।




