झारखंड में तय शेड्यूल से ज्यादा-कम बिजली लेने पर लगेगा चार्ज, हर हफ्ते होगा हिसाब
बिजली कंपनियों की मनमानी पर रोक की तैयारी; ग्रिड अनुशासन तोड़ने पर डेविएशन चार्ज और भारी पेनल्टी का प्रावधान

झारखंड में बिजली उत्पादन और वितरण कंपनियों की मनमानी पर लगाम लगाने की तैयारी शुरू हो गई है। झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग ने ‘इंट्रा-स्टेट डेविएशन सेटलमेंट मैकेनिज्म रेगुलेशन्स, 2026’ का ड्राफ्ट जारी कर स्टेकहोल्डर्स और आम लोगों से सुझाव व आपत्तियां मांगी हैं। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत बिजली उत्पादक, वितरण कंपनियां और बड़े बिजली उपभोक्ता यदि निर्धारित शेड्यूल से कम या ज्यादा बिजली ग्रिड में देंगे या उससे अधिक बिजली की खपत करेंगे, तो इसे डेविएशन यानी निर्धारित शेड्यूल से विचलन माना जाएगा और इसके लिए डेविएशन चार्ज देना होगा। उदाहरण के तौर पर यदि किसी बिजली उत्पादक को एक निश्चित समय में 100 मेगावाट बिजली ग्रिड में देने का शेड्यूल दिया गया है, लेकिन वह 110 मेगावाट बिजली देता है, तो अतिरिक्त 10 मेगावाट को विचलन के रूप में दर्ज किया जाएगा। इसी तरह निर्धारित मात्रा से अधिक बिजली लेने वाले बड़े उपभोक्ताओं पर भी यह व्यवस्था लागू होगी। इस अंतर का वित्तीय निपटारा निर्धारित बाजार आधारित दरों के अनुसार किया जाएगा। प्रस्तावित नियमों में बिजली कंपनियों और बड़े खरीदारों के बिजली लेने-देने पर सख्त निगरानी की व्यवस्था भी की गई है, ताकि ग्रिड में मांग और आपूर्ति का संतुलन बनाए रखा जा सके। पारदर्शिता के लिए हर सप्ताह ऊर्जा खाते और डेविएशन खाते जारी किए जाएंगे, जिससे यह पता चल सकेगा कि किस कंपनी ने कब और कितनी बिजली निर्धारित शेड्यूल से अलग ली या दी। बार-बार ग्रिड अनुशासन का उल्लंघन करने या सिस्टम का गलत फायदा उठाकर ‘गेमिंग’ के जरिए अनुचित मुनाफा कमाने वालों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई का प्रावधान प्रस्तावित है। ऐसे मामलों में अनुचित तरीके से कमाए गए लाभ की वसूली की जाएगी और बिजली अधिनियम, 2003 के तहत कार्रवाई की जा सकती है। इसके अलावा निर्धारित समय पर भुगतान नहीं करने पर डिलेड पेमेंट सरचार्ज (DPS) और लेटर ऑफ क्रेडिट (LC) जैसे वित्तीय सुरक्षा उपाय लागू किए जाएंगे। यह नियम पारंपरिक बिजली उत्पादन संयंत्रों, हाइड्रो पावर स्टेशनों, डिस्ट्रीब्यूशन लाइसेंसधारियों, ओपन एक्सेस उपभोक्ताओं, कैप्टिव पावर प्लांट और ग्रिड से जुड़े अन्य बिजली खरीदारों व विक्रेताओं पर लागू किए जाने का प्रस्ताव है। हालांकि मौसम और पूर्वानुमान पर निर्भर रहने वाली सौर, पवन और हाइब्रिड परियोजनाओं को फिलहाल इस व्यवस्था से बाहर रखा गया है। बहुउद्देशीय जलाशयों को भी विशेष छूट देने का प्रावधान है। महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रस्तावित व्यवस्था आम घरेलू बिजली उपभोक्ताओं के लिए नहीं है, इसलिए घरों में बिजली इस्तेमाल करने वाले उपभोक्ताओं पर इस डेविएशन चार्ज का अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा। आयोग का उद्देश्य बिजली के उत्पादन और खपत में समयबद्धता बढ़ाने, ग्रिड को स्थिर रखने और बिजली कंपनियों के बीच जवाबदेही सुनिश्चित करना है।




