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मध्य प्रदेश

26 साल बाद फिर पहनी CRPF की वर्दी, नौकरी बहाल होते ही बेटा बना संत

1999 में बर्खास्त हुए गिरवर सिंह तोमर ने करीब 20 साल मंदिर में साधना की; लंबी कानूनी लड़ाई के बाद अगस्त 2026 में बीजापुर में दोबारा ज्वाइन की ड्यूटी

मध्य प्रदेश के मुरैना जिले के छिछावली गांव निवासी CRPF जवान गिरवर सिंह तोमर की 26 साल लंबी कानूनी लड़ाई आखिरकार पूरी हुई और उन्होंने दोबारा CRPF की वर्दी पहनकर ड्यूटी ज्वाइन कर ली। गिरवर सिंह ने 1991 में CRPF में हवलदार के पद पर सेवा शुरू की थी, लेकिन करीब आठ साल बाद एक वरिष्ठ अधिकारी से विवाद के बाद उनके खिलाफ विभागीय जांच हुई और 1999 में उन्हें नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया। बर्खास्तगी के बाद वह मुरैना लौट आए और मंदिर में रहकर पूजा-पाठ एवं साधना करने लगे। बाद में गुफा मंदिर में रहने के दौरान वह ‘गिरवर दास महाराज’ के नाम से संत के रूप में पहचाने जाने लगे और करीब दो दशक तक मंदिर में रहकर भगवान की सेवा करते रहे। हालांकि उन्होंने नौकरी वापस पाने की कानूनी लड़ाई नहीं छोड़ी। 1999 में हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने के बाद करीब आठ साल की कानूनी प्रक्रिया चली और 2007 में फैसला उनके पक्ष में आया, लेकिन CRPF की ओर से स्टे लिए जाने के कारण मामला आगे चलता रहा। उन्होंने डबल बेंच में अपील की और इसके बाद भी वर्षों तक सुनवाई जारी रही। आखिरकार अगस्त 2025 में हाईकोर्ट ने उनकी नौकरी बहाल करने का आदेश दिया। इसके बाद भी ज्वाइनिंग में देरी हुई, जिसके चलते उन्होंने संबंधित अधिकारियों को कानूनी नोटिस भेजकर ड्यूटी पर लेने की मांग जारी रखी। अगस्त 2026 में आखिरकार उनकी CRPF में वापसी हुई और उन्हें छत्तीसगढ़ के बीजापुर में तैनाती मिली, जहां पहुंचकर उन्होंने ड्यूटी ज्वाइन कर ली। इस बीच उनके बेटे कृष्णा तोमर ने भी मंदिर में रहकर संत जीवन अपनाने का फैसला किया है। कृष्णा का कहना है कि उनके पिता ने वर्षों तक मंदिर में रहकर भगवान की सेवा की और उन्हें विश्वास है कि भगवान के आशीर्वाद से ही कोर्ट का फैसला उनके पक्ष में आया। गुफा मंदिर के महंत महामंडलेश्वर श्री शिवशरण महाराज के अनुसार गिरवर तोमर करीब 20 वर्षों तक मंदिर में रहकर भक्ति में लीन रहे और शांत एवं मिलनसार स्वभाव के व्यक्ति हैं। गिरवर सिंह के दोबारा CRPF में ज्वाइन करने के बाद मंदिर से जुड़े संत उन्हें विदा करने के लिए ट्रेन तक पहुंचे।

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