जेपीएससी के पूर्व अध्यक्ष एल ख्यांगते की जमानत याचिका खारिज
कोर्ट ने कहा- मामला गंभीर, आरोपी प्रभावशाली; जेल से बाहर आने पर जांच प्रभावित होने की आशंका, भर्ती परीक्षा घोटाले की जांच अभी शुरुआती दौर में

जेपीएससी की भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी और अनियमितताओं से जुड़े मामले में जेल में बंद झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) के पूर्व अध्यक्ष एल ख्यांगते को अदालत से राहत नहीं मिली है। अपर न्यायायुक्त प्रथम योगेश कुमार की अदालत ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने अपने आदेश में मामले की गंभीरता, आरोपी के प्रभावशाली होने और जांच के शुरुआती चरण में होने को महत्वपूर्ण आधार माना। कोर्ट के अनुसार यदि आरोपी को इस समय जमानत पर रिहा किया जाता है तो उसके प्रभाव के कारण जांच प्रभावित होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। अदालत ने माना कि इस स्तर पर आरोपी को जमानत देना उचित नहीं होगा। ख्यांगते को जेपीएससी भर्ती परीक्षा में कथित गड़बड़ी की जांच के दौरान सीआईडी ने 10 अगस्त को गिरफ्तार किया था और तब से वह न्यायिक हिरासत में हैं। इससे पहले जमानत याचिका पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। सुनवाई के दौरान ख्यांगते की ओर से बचाव पक्ष के वकील ने आरोपों का विरोध करते हुए कहा कि उनके खिलाफ कोई ठोस साक्ष्य नहीं है और सीआईडी की छापेमारी के दौरान भी ऐसा कोई प्रत्यक्ष सबूत नहीं मिला, जिससे उनकी संलिप्तता साबित हो। बचाव पक्ष ने अदालत के सामने यह तर्क भी रखा कि केवल आरोप या अन्य लोगों के बयान के आधार पर उन्हें लंबे समय तक जेल में रखना उचित नहीं है। दूसरी ओर सीआईडी ने जमानत का विरोध करते हुए ख्यांगते की कथित भूमिका को गंभीर बताया। जांच एजेंसी की ओर से अदालत को बताया गया कि टीडीपीएल को जेपीएससी की परीक्षा आयोजित कराने की जिम्मेदारी दिए जाने की प्रक्रिया में ख्यांगते की महत्वपूर्ण भूमिका सामने आई है। सीआईडी के अनुसार जिस एजेंसी को परीक्षा आयोजन का काम सौंपा गया, उसकी ओर से आयोजित परीक्षाओं में अपेक्षित पारदर्शिता नहीं बरती गई और ख्यांगते को कथित अनियमितताओं की जानकारी होने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। जांच एजेंसी ने यह भी दावा किया कि पूछताछ के दौरान सामने आए बयानों में ख्यांगते पर टीडीपीएल से करीब दो करोड़ रुपये कमीशन लेने का आरोप लगाया गया है। सीआईडी ने अदालत में जेपीएससी भर्ती मामले के कथित मास्टरमाइंड अभय तिवारी के बयान का भी उल्लेख किया। एजेंसी के अनुसार अभय तिवारी ने अपने स्वीकारोक्ति बयान में एल ख्यांगते के घोटाले में शामिल होने की बात कही है और परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी के रूप में टीडीपीएल के चयन में ख्यांगते की अहम भूमिका होने का दावा किया है। सीआईडी का कहना है कि जांच के दौरान सामने आए तथ्यों और बयानों को अलग-अलग स्तर पर सत्यापित किया जा रहा है और इसी प्रक्रिया के कारण जांच अभी शुरुआती अवस्था में है। जांच एजेंसी के मुताबिक जेपीएससी कार्यालय में छापेमारी और भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों से जुड़े तथ्य सामने आने के बाद ख्यांगते ने आयोग के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद उनसे कई चरणों में पूछताछ की गई और पूछताछ के दौरान टीडीपीएल को परीक्षा का ठेका दिलाने के पीछे कथित आर्थिक लेनदेन से जुड़ी जानकारी सामने आने का दावा किया गया। सीआईडी के अनुसार जांच में यह आरोप भी सामने आया कि टीडीपीएल को परीक्षा संचालन की जिम्मेदारी दिलाने के बदले करीब दो करोड़ रुपये की कथित डील हुई थी। इसके अलावा एजेंसी ने आरोप लगाया कि परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी के भुगतान से 20 प्रतिशत कमीशन दिए जाने की शर्त से जुड़ी जानकारी भी जांच में सामने आई है। इन्हीं आरोपों और जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर सीआईडी ने ख्यांगते को गिरफ्तार किया था। हालांकि इन सभी आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही तय होगा। फिलहाल अदालत द्वारा जमानत खारिज किए जाने के बाद ख्यांगते को जेल में ही रहना होगा और सीआईडी अपनी जांच आगे बढ़ाएगी। अदालत की टिप्पणी से यह भी स्पष्ट है कि जांच एजेंसी को मामले से जुड़े अन्य लोगों, परीक्षा संचालन की प्रक्रिया, कथित वित्तीय लेनदेन और भर्ती परीक्षाओं में हुई अनियमितताओं के संबंध में और साक्ष्य जुटाने का अवसर मिलेगा। जेपीएससी जैसी संवैधानिक भर्ती संस्था से जुड़ा मामला होने के कारण इसकी जांच पर अभ्यर्थियों और आम लोगों की भी नजर बनी हुई है।



