यमन में हूती विद्रोहियों और सरकार के बीच लड़ाई तेज: सऊदी पर ड्रोन-मिसाइल हमले का दावा, 82 हजार से ज्यादा लोग बेघर
यमन में हूती और सरकारी बलों के बीच फिर बढ़ा संघर्ष, सऊदी पर ड्रोन-मिसाइल हमले का दावा; 82 हजार से ज्यादा लोग विस्थापित

यमन में हूती विद्रोहियों और सरकार के बीच लड़ाई एक बार फिर तेज हो गई है। रविवार को यमनी सेना ने लाल सागर के पास हूती ठिकानों पर हवाई हमले किए। इसके जवाब में हूतियों ने सऊदी अरब पर ड्रोन और मिसाइल से हमले करने का दावा किया।
हमलों की आशंका के बीच सऊदी अरब के अबहा और खमिस मुशैत शहरों में सायरन बजाए गए और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई। यमन सीमा के पास एक प्रोजेक्टाइल गिरने से दो लोगों के घायल होने की जानकारी है। एक मस्जिद और कुछ अन्य इमारतों को भी नुकसान पहुंचा।
इस संघर्ष का सबसे बड़ा असर आम लोगों पर पड़ा है। संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक, सितंबर की शुरुआत से अब तक 82 हजार से ज्यादा लोग अपना घर छोड़ चुके हैं।
हूतियों ने मोखा शहर पर कब्जा किया
पिछले सप्ताह हूतियों ने यमन के पश्चिमी तट पर स्थित मोखा शहर पर कब्जा कर लिया। यह लाल सागर के किनारे स्थित एक महत्वपूर्ण बंदरगाह शहर है।
हूतियों ने बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट के एक द्वीप पर भी कब्जा करने का दावा किया है। बाब-अल-मंदेब दुनिया के प्रमुख समुद्री मार्गों में शामिल है। यहां से बड़ी संख्या में मालवाहक जहाज गुजरते हैं। ऐसे में क्षेत्र में संघर्ष बढ़ने पर अंतरराष्ट्रीय व्यापार और तेल की सप्लाई प्रभावित होने की आशंका है।
चार हफ्तों में 500 से ज्यादा सरकारी लड़ाकों की मौत का दावा
हूतियों के खिलाफ जारी लड़ाई में पिछले चार सप्ताह के दौरान सरकार समर्थित 500 से ज्यादा लड़ाकों के मारे जाने का दावा किया गया है। सरकार के समर्थन में लड़ रही नेशनल रेजिस्टेंस फोर्स ने यह जानकारी दी है।
संगठन के मुताबिक, इसी अवधि में होदेदा और ताइज प्रांतों में 1,000 से ज्यादा हूती लड़ाके भी मारे गए। हालांकि, हूतियों की ओर से इन आंकड़ों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।
यमनी सरकार ने लाल सागर के तट पर अतिरिक्त सैनिक भेजने का फैसला किया है। सरकार के एक अधिकारी ने पिछले सप्ताह की हार स्वीकार करते हुए कहा कि सरकारी बल दोबारा इस इलाके में लौटेंगे।
रविवार को यमनी सेना ने मोखा, धुबाब और ताइज प्रांत के कई इलाकों में हूती ठिकानों पर हवाई हमले किए। वहीं हूतियों ने ताइज में सरकार और सऊदी समर्थित बलों के हमलों तथा सादा प्रांत में तोपखाने से गोलाबारी की जानकारी दी।
यमन में करीब 12 साल से जारी है संघर्ष
यमन में सरकार और हूती विद्रोहियों के बीच करीब 12 साल से संघर्ष चल रहा है। सऊदी अरब यमन की सरकार का समर्थन करता है, जबकि हूतियों को ईरान का समर्थन मिलता है।
2022 में दोनों पक्षों के बीच सीजफायर हुआ था। इसके बाद बड़े स्तर पर लड़ाई में काफी कमी आई थी। हालांकि, अब हूतियों की बढ़त के बाद यमन में दोबारा बड़े गृहयुद्ध का खतरा बढ़ गया है।
घर छोड़ने वालों के सामने खाने-पीने का संकट
संयुक्त राष्ट्र की प्रवासन एजेंसी के मुताबिक, संघर्ष के कारण विस्थापित हुए लोगों की स्थिति बेहद खराब है। कई परिवारों को अचानक घर छोड़ना पड़ा, जिसके कारण वे कपड़े, भोजन और दूसरी जरूरी चीजें भी साथ नहीं ले जा सके।
अब बड़ी संख्या में लोग राहत कैंपों, दूसरे लोगों के घरों और यहां तक कि सड़कों पर रहने को मजबूर हैं।
अदन के एक राहत कैंप के निदेशक अहमद अल-मसावी के मुताबिक, विस्थापित लोग बेहद मुश्किल परिस्थितियों में रह रहे हैं। होदेदा से भागे हुसैन हैदरा ने बताया कि 2015 में जब उन्हें घर छोड़ना पड़ा था, तब तैयारी के लिए समय मिला था। इस बार अचानक निकलना पड़ा, इसलिए वे मुश्किल से बच्चों को साथ ले जा सके और जितना हल्का सामान उठा सकते थे, उतना ही लेकर निकले।




