महापौर की कुर्सी के लिए सियासी जोर: 7 नगर निगमों में मुकाबला, भाजपा की नजर सभी बोर्डों पर
बीकानेर में कांग्रेस के सामने बगावत की चुनौती, अजमेर में क्रॉस वोटिंग की आशंका; अलवर, पाली और भरतपुर में बहुमत से कम सीटों के बावजूद भाजपा समर्थन जुटाने में लगी

राजस्थान की 10 नगर निगमों में से 7 में महापौर पद के चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। बुधवार को इन निगमों में महापौर पद के लिए नामांकन दाखिल किए गए। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, भाजपा ने सभी सात निगमों में अपने उम्मीदवार उतारे हैं और जिन निगमों में उसे स्पष्ट बहुमत नहीं मिला, वहां भी समर्थन जुटाने की कोशिश जारी है।
उदयपुर और भीलवाड़ा में भाजपा के पास बहुमत है। वहीं अलवर, पाली और भरतपुर में बोर्ड गठन के लिए भाजपा को अन्य पार्षदों के समर्थन की जरूरत होगी। दूसरी ओर कांग्रेस का प्रमुख फोकस बीकानेर, अजमेर और पाली पर है।
जयपुर, जोधपुर और कोटा नगर निगमों तथा सुकेत नगर पालिका में महापौर/चेयरमैन के चुनाव फिलहाल स्थगित हैं। कुछ बूथों पर पुनर्मतदान के बाद इन निकायों के परिणाम आने पर चुनाव की अगली प्रक्रिया तय होगी।
305 निकायों में 872 प्रत्याशियों ने भरे 989 नामांकन
प्रदेश की 309 निकायों में से 305 निकायों के लिए बुधवार को नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया पूरी हुई। अंतिम दिन तक 872 प्रत्याशियों ने महापौर, सभापति और चेयरमैन पद के लिए कुल 989 नामांकन दाखिल किए।
17 सितंबर को नामांकन पत्रों की जांच होगी, जबकि 18 सितंबर को नाम वापस लेने की अंतिम तारीख है। नगर निगमों में भाजपा और कांग्रेस ने कुछ जगह एक से अधिक उम्मीदवारों के नामांकन भी दाखिल करवाए हैं।
भरतपुर में भाजपा का मुकाबला निर्दलीय से
भरतपुर में निर्दलीय पार्षदों की संख्या सबसे अधिक है। यहां 38 वार्डों में निर्दलीय उम्मीदवार जीते हैं, जबकि भाजपा के 20 और कांग्रेस के 7 पार्षद हैं।
भाजपा ने अनुराधा सिंह को महापौर पद का उम्मीदवार बनाया है। कांग्रेस ने अपना प्रत्याशी नहीं उतारा है। रिपोर्ट के मुताबिक, निर्दलीय प्रत्याशी विचित्रा को कांग्रेस का समर्थन मिलने की बात सामने आई है।
पाली में कांग्रेस के सामने बगावत की चुनौती
पाली में कांग्रेस ने 29 वार्ड और भाजपा ने 21 वार्ड जीते हैं। निर्दलीयों के खाते में 15 वार्ड गए हैं। यहां राजबाला और सुमित्रा जैन के नामांकन को लेकर कांग्रेस के सामने अंदरूनी चुनौती की स्थिति बनी है। रिपोर्ट के अनुसार, इनमें से एक नामांकन निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर भी दाखिल किया गया है।
बीकानेर में कांग्रेस के सामने अपने ही पार्षद की चुनौती
बीकानेर नगर निगम में कांग्रेस ने अनिल कल्ला को महापौर पद का उम्मीदवार बनाया है। यहां कांग्रेस के 42 पार्षद हैं, जबकि भाजपा के 27 पार्षद चुने गए हैं।
कांग्रेस पार्षद नवरतन डागा के अलग से नामांकन दाखिल करने से पार्टी के सामने चुनौती पैदा हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, डागा ने कांग्रेस प्रत्याशी के साथ-साथ निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर भी नामांकन दाखिल किया है। ऐसे में कांग्रेस के भीतर वोटों के बंटवारे की स्थिति बोर्ड गठन के समीकरण को प्रभावित कर सकती है।
अजमेर में कांग्रेस को क्रॉस वोटिंग की चिंता
अजमेर में कांग्रेस के 37 और भाजपा के 32 पार्षद हैं। शेष पार्षदों की भूमिका महापौर चुनाव में महत्वपूर्ण हो सकती है।
रिपोर्ट के मुताबिक, कांग्रेस ने अपने पार्षदों को एक साथ रखने के लिए उन्हें बेंगलुरू भेजा है। कुछ निर्दलीय पार्षदों के भी उनके साथ होने की बात कही गई है। दूसरी ओर भाजपा निर्दलीय पार्षदों के समर्थन का दावा कर रही है।
कांग्रेस की ओर से अपने पार्षदों के संभावित क्रॉस वोटिंग को लेकर सावधानी बरतने की बात भी सामने आई है।
छोटी नगर पालिकाओं में भी दिलचस्प समीकरण
धोरीमन्ना की नवगठित नगर पालिका में 21 वर्षीय कीर्ति गोसाईवाल निर्विरोध अध्यक्ष चुनी गईं। वह भाजपा से हैं।
खेतड़ी पालिका में कांग्रेस पार्षद गीतादेवी के भाजपा में शामिल होने के बाद उन्हें अध्यक्ष पद का उम्मीदवार बनाया गया और वे निर्विरोध अध्यक्ष चुनी गईं। पहाड़ी पालिका में भाजपा के शिशुपाल शर्मा भी निर्विरोध अध्यक्ष बने।
अब 18 सितंबर तक साफ होगी तस्वीर
17 सितंबर को नामांकन पत्रों की जांच और 18 सितंबर को नाम वापसी के बाद कई निकायों में मुकाबले की अंतिम तस्वीर स्पष्ट होगी। इसके बाद बहुमत वाले निकायों में भी पार्टी अनुशासन और संभावित बगावत पर नजर रहेगी, जबकि त्रिशंकु बोर्ड वाले शहरों में निर्दलीय और अन्य दलों के पार्षदों की भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी।




