निकाय चुनाव: 31 अगस्त तक प्रत्याशियों के टिकट पर सस्पेंस, BJP आज जयपुर-भरतपुर संभाग पर करेगी मंथन
नामांकन की समयसीमा नजदीक; भाजपा-कांग्रेस दोनों में टिकट फाइनल करने के साथ बगावत रोकने की चुनौती, कई दावेदारों को नामांकन के संकेत

जयपुर। राजस्थान में नगर निकाय चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। नामांकन की प्रक्रिया पूरी होने में अब कुछ ही दिन बाकी हैं, लेकिन भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस ने अभी तक सभी प्रत्याशियों की आधिकारिक सूची जारी नहीं की है। इसके चलते टिकट के दावेदारों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
दोनों प्रमुख दल अंतिम दौर में प्रत्याशियों के चयन के साथ-साथ टिकट नहीं मिलने वाले दावेदारों की नाराजगी और संभावित बगावत को रोकने की रणनीति पर भी काम कर रहे हैं।
भाजपा मुख्यालय में जयपुर-भरतपुर संभाग पर मंथन
भाजपा ने प्रत्याशियों के चयन को लेकर शनिवार को जयपुर स्थित पार्टी मुख्यालय में बैठक बुलाई है। इसमें जयपुर और भरतपुर संभाग के नगर निगम, नगर परिषद और नगर पालिकाओं के लिए संभावित प्रत्याशियों के नामों पर चर्चा होगी।
बैठक में पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों के अलावा संबंधित क्षेत्रों के जनप्रतिनिधि और पार्टी प्रभारी भी शामिल होंगे। अलग-अलग निकायों और वार्डों के स्तर पर चर्चा के बाद प्रत्याशियों के नामों को अंतिम रूप देने की कवायद होगी।
भाजपा प्रत्याशियों के चयन के लिए तीन स्तर पर रायशुमारी कर रही है। स्थानीय संगठन, जनप्रतिनिधियों और पार्टी प्रभारियों से मिली रिपोर्ट के आधार पर दावेदारों की स्थिति का आकलन किया जा रहा है।
कई सीटों पर नाम लगभग तय
पार्टी सूत्रों के मुताबिक कई सीटों पर संभावित प्रत्याशियों के नाम लगभग तय हो चुके हैं। इसके बावजूद भाजपा ने अभी तक आधिकारिक सूची जारी नहीं की है।
चर्चा है कि पार्टी इस बार लंबी सूची जारी करने के बजाय कुछ मामलों में संभावित उम्मीदवारों को सीधे जिला कार्यालय बुलाकर पार्टी का अधिकृत सिंबल दे सकती है। इससे टिकट वितरण के बाद होने वाली नाराजगी और बगावत को नियंत्रित करने की कोशिश की जा सकती है।
कांग्रेस भी बगावत रोकने में जुटी
कांग्रेस में भी प्रत्याशियों की आधिकारिक सूची का इंतजार किया जा रहा है। पार्टी नेतृत्व टिकट वितरण के बाद बड़े स्तर पर असंतोष या बगावत से बचने के लिए अंतिम समय तक दावेदारों के बीच सहमति बनाने में जुटा है।
जिन सीटों पर नाम लगभग तय हो चुके हैं, वहां संभावित उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करने के संकेत दिए जाने की बात सामने आई है। कुछ उम्मीदवार शनिवार को नामांकन दाखिल कर सकते हैं।
हालांकि कई सीटों पर अभी भी एक से ज्यादा मजबूत दावेदार हैं। इन सीटों पर अंतिम निर्णय के लिए वरिष्ठ नेताओं के बीच मंथन जारी है। कांग्रेस की बैठक में प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा सहित वरिष्ठ नेता शामिल होंगे।
अलवर में पूर्व पार्षद के परिवार ने दाखिल किया नामांकन
अलवर में वार्ड-47 से कांग्रेस टिकट की दावेदार विमला अपने पति विजेंद्र राठी के साथ नामांकन दाखिल करने पहुंचीं। विजेंद्र राठी पूर्व पार्षद रह चुके हैं। उनका कहना है कि पार्टी की ओर से रात में नामांकन दाखिल करने के लिए फोन आया था।
विमला ने अपने वार्ड में सक्रिय होने का भी दावा किया है।
अजमेर में वार्ड-3 को लेकर भाजपा में विवाद
अजमेर भाजपा में टिकट वितरण को लेकर वार्ड-3 में विरोध के संकेत मिले हैं। निवर्तमान पार्षद प्रतिभा पाराशर और उनके पति अरविंद पाराशर ने विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी के प्रति नाराजगी जताई।
दोनों संभावित भाजपा प्रत्याशी अनामिका शर्मा के ससुर सीताराम शर्मा के घर भी पहुंचे।
कोटा में कांग्रेस के 7 दावेदारों ने वापस लिए आवेदन
कोटा में कांग्रेस के सात दावेदारों ने तीन वार्डों से पार्षद टिकट के लिए दिए गए अपने आवेदन वापस ले लिए हैं। दावेदारों ने संगठन में एकजुटता बनाए रखने और अन्य जमीनी कार्यकर्ताओं को चुनाव लड़ने का मौका देने की बात कही।
कांग्रेस शहर ओबीसी विभाग के जिलाध्यक्ष दीपक नामदेव के अनुसार उनकी टीम से जुड़े सात दावेदारों ने टिकट के लिए दिए गए आवेदन वापस ले लिए हैं।
टिकट के साथ बगावत संभालना भी बड़ी चुनौती
नगर निकाय चुनाव में भाजपा और कांग्रेस दोनों के सामने चुनौती केवल जिताऊ उम्मीदवार चुनने की नहीं है। टिकट से वंचित होने वाले दावेदारों को साथ बनाए रखना भी दोनों दलों के लिए महत्वपूर्ण होगा।
कई वार्डों में एक ही टिकट के लिए कई दावेदार हैं। ऐसे में एक उम्मीदवार का नाम तय होने के बाद दूसरे दावेदार निर्दलीय चुनाव मैदान में उतरते हैं तो पार्टी के आधिकारिक प्रत्याशी के सामने मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
यही वजह है कि दोनों दल अंतिम समय तक समीकरण साधने में जुटे हैं। भाजपा जहां जयपुर और भरतपुर संभाग के प्रत्याशियों पर मंथन कर रही है, वहीं कांग्रेस अटकी हुई सीटों पर सहमति बनाने की कोशिश कर रही है।
31 अगस्त तक साफ होगी तस्वीर
अब सबकी नजर 31 अगस्त पर टिकी है। नामांकन प्रक्रिया की अंतिम समयसीमा तक भाजपा और कांग्रेस अपने प्रत्याशियों की पूरी सूची जारी करती हैं या संभावित उम्मीदवारों को पहले नामांकन दाखिल करवाकर बाद में अधिकृत सिंबल देती हैं, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।
टिकट वितरण के साथ-साथ बगावत रोकने की दोनों दलों की रणनीति भी निकाय चुनाव के अंतिम समीकरणों पर बड़ा असर डाल सकती है।




