बड़े दलों के हाथ से निकले 56% निकाय: 174 शहरों में बोर्ड बनाने के लिए निर्दलीय या थर्ड फ्रंट की जरूरत
भाजपा-कांग्रेस को 309 में से सिर्फ 135 शहरों में स्पष्ट बहुमत; जोधपुर, अजमेर, पाली, अलवर और भरतपुर समेत कई निकायों में बोर्ड गठन का समीकरण उलझा

राजस्थान में ‘वन स्टेट, वन इलेक्शन’ के तहत हुए 309 निकायों के चुनाव में कई जगह भाजपा और कांग्रेस को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है। उपलब्ध चुनावी आंकड़ों के मुताबिक, 309 में से 174 यानी करीब 56% निकाय ऐसे हैं, जहां भाजपा या कांग्रेस अकेले दम पर बोर्ड बनाने की स्थिति में नहीं हैं। दोनों प्रमुख दलों को स्पष्ट बहुमत 135 यानी करीब 44% शहरों में मिला है।
ऐसे निकायों में निर्दलीय, बागी और छोटे दलों के निर्वाचित पार्षद बोर्ड गठन के समीकरण में महत्वपूर्ण हो गए हैं। जोधपुर, अजमेर, पाली, अलवर और भरतपुर जैसे प्रमुख शहरों में भी बोर्ड बनाने के लिए अतिरिक्त समर्थन की जरूरत बताई जा रही है।
कई शहरों में निर्दलीयों की बड़ी संख्या
भरतपुर में 65 में से 36 सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवार जीते हैं। भुसावर में 25 में से 22, नदबई में 35 में से 25, रूपबास में 25 में से 14, उच्चैन में 25 में से 13 और वैर में 25 में से 20 सीटें निर्दलीयों के खाते में गई हैं।
इसी तरह मकराना में 60 में से 36, डीग में 40 में से 24, कामां में 35 में से 21, सादुलशहर में 25 में से 22, हनुमानगढ़ में 60 में से 34, संगरिया में 35 में से 25 और पिलानी में 35 में से 30 सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवार विजयी हुए हैं।
मारवाड़ के कई निकायों में करीबी मुकाबला
जोधपुर में भाजपा और कांग्रेस दोनों को 44-44 सीटें मिली हैं। भीनमाल में 40 में से भाजपा को 19, जालौर में 40 में से कांग्रेस को 19, पीपाड़सिटी में 35 में से भाजपा को 16 और पोकरण में 25 में से कांग्रेस को 12 सीटें मिली हैं।
इन आंकड़ों से कई निकायों में बोर्ड गठन के लिए अन्य पार्षदों के समर्थन की आवश्यकता दिखाई देती है।
जयपुर जिले में भी कई जगह बहुमत से दूर दल
बगरू में भाजपा को 35 में से 16, बस्सी में 35 में से 15, चाकसू में 35 में से 17, दूदू में कांग्रेस को 25 में से 12 और किशनगढ़ रेनवाल में भाजपा को 35 में से 15 सीटें मिली हैं।
मनोहरपुर में कांग्रेस को 35 में से 15, फागी में कांग्रेस को 20 में से 8, फुलेरा में भाजपा को 25 में से 12, सांभर में भाजपा को 25 में से 11 और शाहपुरा में कांग्रेस को 55 में से 23 सीटें मिली हैं।
अजमेर में भी बोर्ड गठन के लिए समर्थन जरूरी
अजमेर में 80 में से कांग्रेस को 37 सीटें मिली हैं। केकड़ी में कांग्रेस को 40 में से 20, किशनगढ़ में भाजपा को 60 में से 29 और नसीराबाद में भाजपा-कांग्रेस दोनों को 9-9 सीटें मिली हैं। पीसांगन में 25 में से भाजपा को 9 सीटें मिली हैं।
अलवर-भरतपुर-धौलपुर क्षेत्र में भी कई समीकरण
अलवर में भाजपा को 65 में से 28 सीटें मिली हैं। बहादुरपुर में भाजपा को 11, बड़ौदमैव में कांग्रेस को 9, गोविंदगढ़-रामबास में भाजपा को 12 और कठूमर में कांग्रेस को 10 सीटें मिली हैं।
भरतपुर में निर्दलीयों ने 36 सीटें जीती हैं। भुसावर में निर्दलीयों को 22 और नदबई में 25 सीटें मिली हैं। भिवाड़ी में भाजपा को 60 में से 30 सीटें, खैरथल में कांग्रेस को 45 में से 20 और तिजारा में निर्दलीयों को 35 में से 31 सीटें मिली हैं।
धौलपुर में 80 में से कांग्रेस को 27, बाड़ी में 45 में से 21 और बसेड़ी में दोनों प्रमुख दलों को 8-8 सीटें मिली हैं।
मेवाड़ और वागड़ में भी कई निकायों में करीबी मुकाबला
आसींद में भाजपा को 25 में से 12, बनेड़ा में 20 में से 10, बिगोद में 25 में से 12 और बिजोलिया में 25 में से 12 सीटें मिली हैं। गुलाबपुरा में भाजपा को 35 में से 14 और रावतभाटा में 40 में से 17 सीटें मिली हैं।
धरियावद में भाजपा और कांग्रेस दोनों को 10-10 सीटें मिली हैं। प्रतापगढ़ में कांग्रेस को 40 में से 20, नाथद्वारा में भाजपा को 40 में से 20, सलूंबर में भाजपा को 25 में से 12 और मावली में कांग्रेस को 20 में से 10 सीटें मिली हैं।
कुशलगढ़ में भाजपा को 20 में से 10 और परतापुर-गढ़ी में कांग्रेस को 25 में से 12 सीटें मिली हैं।
बोर्ड गठन के लिए अब समर्थन जुटाने की कवायद
इन आंकड़ों के बाद कई निकायों में अध्यक्ष, सभापति और चेयरमैन के चुनाव में निर्दलीय, बागी तथा छोटे दलों के पार्षदों की भूमिका अहम हो गई है। भाजपा और कांग्रेस दोनों के सामने अपने-अपने पक्ष में जरूरी संख्या जुटाने की चुनौती है। कुछ जगह छोटे दल भी अध्यक्ष पद के लिए दावेदारी कर रहे हैं।



