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सर्वार्थ सिद्धि-रवि योग में विश्वकर्मा पूजा: कारखानों, गैराज और कार्यस्थलों पर होगी विशेष पूजा-अर्चना

भाद्रपद शुक्ल षष्ठी पर मनाया जा रहा विश्वकर्मा पूजन; मान्यता के अनुसार देवशिल्पी विश्वकर्मा ने देवताओं के नगर, भवन और अस्त्र-शस्त्रों का निर्माण किया

भाद्रपद शुक्ल षष्ठी के अवसर पर गुरुवार को विश्वकर्मा पूजा मनाई जा रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान विश्वकर्मा को देवशिल्पी और देवताओं का वास्तुकार माना जाता है। इस अवसर पर देशभर में कारखानों, गैराज, कंपनियों, हार्डवेयर प्रतिष्ठानों, मोटर वाहन और मशीनरी से जुड़े कार्यस्थलों पर विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।

ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस बार विश्वकर्मा पूजा पर सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग का संयोग बन रहा है। इसी दिन सूर्य के कन्या राशि में गोचर का भी उल्लेख किया गया है।

मशीनरी और औजारों की होगी पूजा

विश्वकर्मा पूजा के अवसर पर औद्योगिक प्रतिष्ठानों और कार्यस्थलों की साफ-सफाई की जाती है। इसके बाद मशीनों, औजारों, वाहनों और अन्य उपकरणों की पूजा-अर्चना की जाती है।

कई कारखानों और प्रतिष्ठानों में इस दिन नियमित कामकाज भी बंद रखा जाता है। कर्मचारी और कारोबारी मिलकर पूजा करते हैं और प्रसाद वितरित करते हैं।

धार्मिक मान्यता के अनुसार विश्वकर्मा भगवान की पूजा करने से व्यापार और कार्यक्षेत्र में उन्नति होती है तथा माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है।

देवशिल्पी विश्वकर्मा से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं

ज्योतिषी झा के अनुसार, धार्मिक ग्रंथों में भगवान विश्वकर्मा को निर्माण और शिल्प कला का देवता माना गया है। मान्यता है कि उन्होंने विभिन्न युगों में स्वर्ग लोक, लंका, द्वारका और हस्तिनापुर जैसे नगरों की रचना की।

सुदामापुरी के निर्माण का श्रेय भी भगवान विश्वकर्मा को दिया जाता है। इसलिए विश्वकर्मा पूजा कलाकारों, शिल्पकारों, बुनकरों, कारीगरों और व्यापारियों के लिए विशेष महत्व रखती है।

धरती, आकाश और जल की रचना से जुड़ी मान्यता

ऋग्वेद के संदर्भ में भगवान विश्वकर्मा को सृष्टि के निर्माण से जोड़कर देखा जाता है। धार्मिक परंपरा में उन्हें धरती, आकाश और जल की रचना करने वाला तथा देवताओं के भवन, नगर और अस्त्र-शस्त्र तैयार करने वाला देवशिल्पी बताया गया है।

भगवान विश्वकर्मा के शिल्प कौशल से जुड़े उदाहरणों में ओडिशा का जगन्नाथ मंदिर भी बताया जाता है। विष्णु पुराण की परंपरा में उनके शिल्प कौशल का उल्लेख मिलता है।

विश्वकर्मा पूजा पर बताए गए उपाय

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार विश्वकर्मा पूजा के दिन कुछ उपाय किए जाते हैं। इनमें शामिल हैं:

नौकरी में तरक्की

शुभ मुहूर्त में भगवान विश्वकर्मा की पूजा करने के बाद बड़ों का आशीर्वाद लेने और घी का दीपक दान करने की परंपरा बताई गई है। पीली मिठाई और पीले वस्त्र का दान भी शुभ माना जाता है।

आर्थिक लाभ

कार्यस्थल पर मशीनरी और औजारों की पूजा करने तथा भगवान विश्वकर्मा के मंत्रों का जाप करने की परंपरा है। मान्यता के अनुसार इससे कार्यकुशलता, बौद्धिक क्षमता और आर्थिक स्थिति में लाभ हो सकता है।

विश्वकर्मा पूजा किन क्षेत्रों में महत्वपूर्ण

  • कल-कारखाने
  • गैराज और वर्कशॉप
  • हार्डवेयर प्रतिष्ठान
  • मशीनरी से जुड़े व्यवसाय
  • मोटर वाहन क्षेत्र
  • साइकिल और ऑटोमोबाइल व्यवसाय
  • शिल्पकार और कारीगर
  • निर्माण एवं तकनीकी कार्यों से जुड़े प्रतिष्ठान

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